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LS Polls 2024: देवेंद्र फडणवीस बोले- यह युद्ध की नीति है, कनविंस नहीं कर सकते तो कनफ्यूज कर दो

Mon, 20 May 2024 12:37 PM IST
श्वेता महतो सुरेंद्र मिश्र, मुंबई
सुरेंद्र मिश्र, मुंबई Published by: श्वेता महतो Updated Mon, 20 May 2024 12:37 PM IST
सार

देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उनका मानना है कि किसी भी राज्य में क्षेत्रीय अस्मिता की बात गलत नहीं है। लेकिन एक बड़े समाज को निशाना बना कर क्षेत्रीय अस्मिता की बात करना हमें मंजूर नहीं है। जिस तरह से शिवसेना ने क्षेत्रीय अस्मिता से ऊपर उठकर राष्ट्रीय अस्मिता की ओर प्रवास किया।

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Lok Sabha Polls maharashtra politics BJP leader Devendra fadnavis question and answer
देवेंद्र फडणवीस - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के बाद लोकसभा की सर्वाधिक 48 सीटें महाराष्ट्र में हैं। जहां 2019 में भाजपा और अविभाजित शिवसेना गठबंधन नें 41 सीटें जीती थीं, जिनमें 23 पर भाजपा और 18 सीटों पर शिवसेना के प्रत्याशी विजयी हुई थे। लेकिन उसी साल के अंत में हुए विधानसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र में शह और मात का खेल शुरू हुआ, जो पांच साल से अनवरत जारी है। इस दौरान उद्धव ठाकरे का मुख्यमंत्री बनने का सपना साकार हुआ तो शिवसेना भी टूटी। शरद पवार की एनसीपी भी दो फाड़ हो गई। इस पूरे घटनाक्रम में देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति के केंद्र में रहे। फडणवीस भले ही उपमुख्यमंत्री हैं लेकिन वे भाजपा-शिवसेना और एनसीपी (अजित गुट) की महायुति के निर्विवाद नेता हैं। सूबे की 48 लोकसभा सीटों में से भाजपा 28, शिवसेना 15 और एनसीपी (अजित गुट) 4 और रासप एक सीट पर चुनाव लड़ रही है। विपक्षी गठबंधन लगातार भाजपा पर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप लगा रहा है। वहीं, फडणवीस कहते हैं कि यह लोगों में भ्रम पैदा करने की विपक्ष की चाल है। वह कहते हैं कि राज ठाकरे अब हिंदुत्व की भूमिका में आ गए हैं। इन तमाम मुद्दों को लेकर अमर उजाला ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात की। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंशः
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प्रश्नः महाराष्ट्र में 20 मई को आखिरी चरण का चुनाव है। क्या माहौल है?

उत्तरः हम लोग पिछला परफॉर्मेंस दोहराएंगे। अंतिम चरण में मुंबई और महानगर क्षेत्र की 10 सीटों पर मतदान है। मुंबईकरों के मन में मोदी हैं। जब मुंबईकर मतदान करने जाते हैं, तो वे मोदी को वोट करते हैं। हम मुंबई और मुंबई महानगर की सभी 10 सीटें जीतेंगे। यह हम इसलिए कह पा रहे हैं क्योंकि 2014 मोदी जी की सरकार आने के बाद मुंबई का बदलता हुआ चेहरा लोग देख पा रहे हैं। मुंबई में जो चीजें 2014 के बाद हुईं, वह 10 साल पहले होनी चाहिए थीं। अगर, ऐसा होता तो शायद आज बेंगलुरु या हैदराबाद अपने आपको आईटी कैपिटल नहीं कह पाते। जो बदलाव मुंबईकर देख पा रहे हैं, उसमें पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा योगदान है। जो मुंबई हर दो साल बाद बम धमाकों से दहलती थी। मोदी के आने के बाद किसी की हिम्मत नहीं हुई कि यहां कोई ऐसा कर सके।
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प्रश्नः इस बार राज ठाकरे भी आपके साथ हैं। क्या इससे भाजपा को नुकसान नहीं होगा?

उत्तरः कोई नुकसान नहीं होगा। मेरा मानना है कि किसी भी राज्य में क्षेत्रीय अस्मिता की बात गलत नहीं है। लेकिन एक बड़े समाज को निशाना बना कर क्षेत्रीय अस्मिता की बात करना हमें मंजूर नहीं है। जिस तरह से शिवसेना ने क्षेत्रीय अस्मिता से ऊपर उठकर राष्ट्रीय अस्मिता की ओर प्रवास किया। वैसे ही, पिछले 5 सालों में राज ठाकरे का प्रवास भी हिंदुत्व और राष्ट्रीय अस्मिता की ओर हुआ है। उनके साथ आने से नुकसान कुछ नहीं है। फायदा ये हैं कि मुंबई, ठाणे, पुणे, नासिक में उन्हें चाहने वाला युवा वर्ग का हमें चुनाव में समर्थन मिला है। हमारे लिए ठाकरे ब्रांड कोई विषय नहीं है। मुंबई में हिंदीभाषी, गुजराती, मराठी, दक्षिण भारतीय सभी भाजपा को वोट कर रहे हैं। कोई ऐसा समाज नहीं है जो भाजपा के साथ नहीं है।
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प्रश्नः क्या राज ठाकरे के भाजपा के साथ आने से उत्तर भारतीय नाराज या भयभीत हैं?

उत्तरः देखिए, 2014 में मेरी सरकार आने के बाद मुंबई में उत्तर भारतीयों का डर समाप्त हो गया। आज उत्तर भारतीय या कोई भी व्यक्ति मुंबई और महाराष्ट्र से सुरक्षित है। केवल भाषा के आधार पर उसके साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। लोगों को ये पता है कि उत्तर भारतीयों के साथ हम खड़े हैं। इसलिए ये जो भयभीत या नाराज होने की जो बाते हैं, उसमें कोई दम नहीं है। उत्तर भारतीय समाज पूरे देश में मोदी के साथ खड़ा है।

प्रश्नः लोग ये क्यों कहते हैं कि आपने शिवसेना से शिवसेना और पवार से पवार की लड़ाई करवा दी?

उत्तरः हमने कुछ नहीं किया। राजनीति में कोई भी व्यक्ति किसी के कहने पर कुछ नहीं करता। उद्धव ठाकरे की पार्टी उनके अहंकार और अतिमहत्वाकांक्षा से टूटी। उद्धव को बहुत पहले से मुख्यमंत्री बनना था। उसी के चलते नारायण राणे के पर कतरे गए। अगर, उनके पर नहीं कतरते तो 2004 में ही राज्य में भाजपा-शिवसेना की सरकार बनती। पहले तो कहा कि एकनाथ शिंदे को सीएम बनाएंगे, लेकिन खुद बन गए। उन्हें लगा कि एकनाथ शिंदे नए नारायण राणे बन रहे हैं। अगर, वे पॉवरफुल हो गए तो आदित्य ठाकरे को लांच नहीं कर पाउंगा। इसलिए उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे के पर कतरना शुरू किया। शिंदे नगर विकास मंत्री थे, लेकिन विभागीय बैठक आदित्य ठाकरे करते थे। इससे शिंदे को लगा कि शिवसेना ने हिंदुत्व को छोड़ दिया और जमीन खिसक रही है। धीरे-धीरे उद्धव मेंरा भी अस्तित्व समाप्त कर रहे हैं। तब जाकर वे शिवसेना से बाहर आए। ऐसे ही शरद पवार ने बार-बार अजित पवार को खलनायक बनाया, क्योंकि उन्हें सुप्रिया को हीरो बनाना था। शिवसेना की टूट फैमिली फर्स्ट के कारण और एनसीपी में टूट फर्स्ट फैमिली के कारण हुई।

प्रश्नः एक वर्ग में यह बात फैलाई जा रही है कि भाजपा का 400 पार का नारा संविधान बदलने के लिए है। क्या सच्चाई है?

उत्तरः यह युद्ध की नीति है कि अगर, आप किसी को कनविंस नहीं कर सकते तो उसके कन्फ्यूज कर दो। कांग्रेस और पूरे विपक्ष को यकीन हो गया कि वे विकास पर, गरीब कल्याण के एजेंडे पर और भ्रष्टाचार पर नहीं लड़ सकते, तो उन्हें नई नीति सूझी कि रोज झूठ बोलो और लोगों में भ्रम फैलाओ। संविधान बदलने की बात उसी झूठ के एजेंडे का एक हिस्सा है। मोदी के पास 10 साल तक पूरा बहुमत था। लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया बल्कि मोदी सरकार ने संविधान दिवस मनाया। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इसका भी विरोध किया था। अनुच्छेद 370 कांग्रेस की देन थी, जिसकी वजह से जम्मू कश्मीर में संविधान लागू नहीं था। एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण लागू नहीं था। मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू कश्मीर में पूर्णरूप से भारत का संविधान लागू किया। कांग्रेस ने 1975 में संविधान को अलमारी में बंद करके रखा और देश में चुनाव नहीं होने दिया। ये उनका ट्रैक रिकार्ड है। मोदी हमेशा कहते हैं कि डॉ. आंबेडकर का संविधान था, इसलिए चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बना।

प्रश्नः तीन दलों के गठबंधन के बीच चुनाव प्रचार के दौरान क्या कहीं अड़चन आई? आपने कार्यकर्ताओं को क्या मंत्र दिया?

उत्तरः जब अजित पवार हमारे साथ आए, तब हमें अपने कार्यकर्ताओं को एक दो महीने तक समझाना पड़ा। हमने कार्यकर्ताओं को समझाया कि हमारे साथ धोखा किया गया। राजनीति में जब आपको घेरने की कोशिश होती है तो चक्रव्यूह से बचकर भी निकलना पड़ता है और चक्रव्यूह को तोड़ना भी पड़ता है। हमने कहा है कि शिवसेना के साथ भाजपा का भावनात्मक गठबंधन है जबकि एनसीपी के साथ राजनीतिक गठबंधन है। हो सकता है कि 10 साल के बाद एनसीपी के साथ भी भावनात्मक संबंध हो जाए, लेकिन आज नहीं है।

प्रश्नः लोकसभा चुनाव में इस बार जाति की राजनीति ज्यादा दिखाई दी। इससे कितना फर्क पड़ेगा?

उत्तरः यह दुखद है कि महाराष्ट्र में कुछ सीटों पर जातिगत ध्रुवीकरण का असर देखने को मिला है। यह महाराष्ट्र के सामाजिक ढांचे को बिगाड़ने वाला है। जो लोग राजनीति के लिए इस प्रकार जातिगत ध्रुवीकरण कर रहे हैं, वे राज्य का हित नहीं कर रहे हैं। इसके जो जख्म है वो लंबे समय तक रहेंगे।

प्रश्नः वोट जेहाद का क्या मामला है?

उत्तरः पुणे में एक बहुत बड़ी तंजीम बुलाई गई, जिसमें पर्सनल लॉ बोर्ड के भी लोग थे। पूरा वीडियो उपलब्ध है। इस तंजीम का उद्देश्य है मोदी को हराना। भाषण में कहा गया कि सामने जो भी प्रत्याशी मोदी हरा सकता है, उसे मतदान करो। चाहे वह किसी भी पार्टी या जाति का हो। अगर, मुस्लिम प्रत्याशी कमजोर है, तो उस हिंदु उम्मीदवार को मत दो, जो मोदी को हरा सकता है। लेकिन, मोदी को हराने के लिए वोट जेहाद करो। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था। मुझे ऐसा लगता है कि आज कांग्रेस से भी ज्यादा जेहादियों के नेता अगर कोई है तो वो उद्धव ठाकरे हैं।


प्रश्नः विपक्षी कहते हैं कि भाजपा वॉशिंग मशीन है। अजित पवार के बारे में क्या कहना है?

उत्तरः जो लोग हम पर यह आरोप लगाते हैं उन्हें सार्वजनिक तौर पर कहना चाहिए कि उनके सारे लोग भ्रष्ट हैं। अगर, वो भ्रष्ट होंगे तभी हम धो पाएंगे। अगर, वो साफ होंगे तो कैसे धो सकते हैं। जहां तक अजित पवार का सवाल है उनके खिलाफ मैने 2009 से 2011 तक सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया था। 2012 में जांच शुरू हुई धीरे-धीरे जांच में कई लोगों को दोषी पाया गया। उसमें भ्रष्टाचार सामने आया। कुछ लोग गिरफ्तार हुए। कुछ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई और कुछ लोगों को नौकरी से निकाला गया। इस सारी प्रक्रिया में 12 साल बाद जब अजित हमारे साथ आए तब तक किसी भी जांच एजेंसी ने अजित पवार और सुनील तटकरे को आरोपी करार नहीं दिया और न ही उनका कोई रोल सामने आया। मैने जब आरोप लगाए थे तब अजित पवार उस विभाग के मंत्री थे। भ्रष्टाचार हुआ था तो मैं आरोप इंजीनियर पर नहीं लगाउंगा। मैं तो मंत्री पर ही आरोप लगाउंगा।
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