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लोकसभा चुनाव: राजनीतिक चंदे पर रहेगी पैनी नजर, जानिए क्या हैं इलेक्टोरल बॉन्ड?

Fri, 15 Mar 2019 07:09 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prabudhh Jain Updated Fri, 15 Mar 2019 07:09 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019- what is electoral bond, how it works
इलेक्टोरल बॉन्ड (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media
देश के राजनीतिक गलियारों में 'इलेक्टोरल बॉन्ड' का नाम साल 2017 से खूब चर्चा में है। 2017 में मोदी सरकार ने राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के इरादे से वार्षिक बजट में कई अहम प्रावधान किए। इसी दौरान केंद्र सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड की घोषणा की जो राजनीतिक हल्कों के लिए बिल्कुल नई बात थी। 
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क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड?

इलेक्टोरल बॉन्ड राजनीतिक दलों की फंडिग की व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बनाया गया एक वचन पत्र है जिसे भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता है। इलेक्टोरल बॉन्ड बैंक नोट की तरह ही होते हैं, जिसके मानकों का पालन राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले से फंड लेने के दौरान करना होता है। इलेक्टोरल बॉन्ड ब्याज मुक्त होते हैं। इन्हें किसी भी भारतीय नागरिक या भारतीय संस्था द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की अधिकृत शाखाओं से खरीदा जा सकता है। 
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2017 के यूनियन बजट में इलेक्टोरल बॉन्ड की स्कीम की घोषणा के बाद इन्हें पहली बार 1 मार्च 2018 को दान कर्ताओं द्वारा खरीदने के लिए जारी किया गया था। इस दौरान कई राज्यों में चंदादाताओं इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदे थे।
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इनका इस्तेमाल पिछले लोकसभा चुनावों में 1 प्रतिशत या उससे ज्यादा वोट पाने वाले राजनीतिक दलों को फंड देने के लिए किया जा सकता है।


इलेक्टोरल बॉन्ड के तीन हिस्से-

  • पहला, डोनर जो राजनीतिक दलों को चंदा देना चाहता है। वह कोई व्यक्ति, संस्था या कंपनी हो सकती है।
  • दूसरा, देश के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल जो इसके जरिए चंदा लेते हैं। 
  • और तीसरा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जिसके तहत ये पूरी व्यवस्था है।

इलेक्टोरल बॉन्ड के फायदे

  • राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता का दावा
  • दान कर्ताओं को किसी प्रकार के उत्पीड़न से सुरक्षा मिलेगी
  • तीसरे पक्ष के सामने जानकारी का कोई खुलासा नहीं होगा
  • चंदे पर कर अवलोकन की निगरानी होगी
  • राजनीतिक दलों को मिलने वाले काले धन पर लगाम लग सकेगी

क्या खास है इलेक्टोरल बॉन्ड में ?

कुछ देशों में राजनीतिक पार्टियों को भ्रष्टाचार से बचाने के लिए उनका पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है। हालांकि भारत में ऐसा नहीं है, इसलिए राजनीतिक पार्टियों में, खास कर चुनावों के दौरान भ्रष्टाचार पनपने का खतरा रहता है। इसलिए राजनीतिक चंदे और राजनीति में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से भारत इस तरह के बॉन्ड जारी करने वाला पहला देश है। इस बॉन्ड की मदद से राजनीतिक दलों को मिलने वाले काले धन को पूरी तरह परे रखने की कोशिश की जाएगी।
  • इस बॉन्ड को कोई नोटीफाइड बैंक ही जारी कर सकता है।
  • इस बॉन्ड को सिर्फ चेक अथवा डिजिटल पेमेंट करके खरीदा जा सकता है।
  • इस बॉन्ड के लिए देश के सभी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग से एक बैंक अकाउंट नोटिफाई कराना होगा।
  • राजनीतिक दल अपने नोटिफाइड बैंक अकाउंट के जरिए इन बॉन्ड को कैश करा सकते हैं।
  • यह इलेक्टोरल बॉन्ड एक बियरर चेक की तरह होता है ताकि बॉन्ड के जरिए चंदा देने वालों का नाम गुप्त रखा जा सके।
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