उत्तर प्रदेश में 25 से ज्यादा भाजपा सांसदों का कट सकता है टिकट, कार्यकर्ताओं को तरजीह
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आने वाले लोकसभा चुनाव में महासंग्राम की आशंका को पहचान कर भारतीय जनता पार्टी अपनी रणनीति में तेजी से बदलाव कर रही है। पार्टी, उत्तर प्रदेश में नेताओं की जगह कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने जा रही है। संगठन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी सांसदों का टिकट काटकर उनकी जगह अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट दे सकती है। इसी वजह से बुधवार देर रात पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के घर हुई बैठक में प्रदेश के 25 से ज्यादा सांसदो के टिकट काटने की सिफारिश की गई है। आगे जाकर इस आंकड़े में और तब्दीली होने की संभावना है।
'जो सांसद काम नहीं करेगा उसका टिकट कटेगा ही'
संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि जो सांसद काम नहीं करेगा उसका टिकट कटेगा ही। भारतीय जनता पार्टी पूर्ण रूप से पारदर्शी और लोकत्रांतिक पार्टी है। पार्टी अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं को आगामी लोकसभा चुनाव में तवज्जो देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान उत्तर प्रदेश के कुछ सांसदों के कामकाज से खुश नहीं है। इनमें से कुछ सांसदों की छवि जनता के बीच अच्छी नहीं है। कार्यकर्ता भी इन सांसदों के कामकाज से नाखुश हैं। इन सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी अच्छा नहीं है।
बाहर से पार्टी में शामिल हुए कुछ सांसदों पर गिर सकती है गाज
सूत्रों के मुताबिक, टिकट कटने वाले कुछ सांसद वो भी हो सकते हैं जो दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए हैं। दरअसल, उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव को लेकर बुधवार देर रात को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के घर पर बैठक हुई है। इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य और दिनेश शर्मा भी मौजूद थे। इस बैठक में भाजपा उत्तर प्रदेश इकाई पर लंबी मंत्रणा हुई है। बैठक में उत्तर प्रदेश के 25 से ज्यादा सांसदों के टिकट काटने की सिफारिश भी की गई है। संगठन सूत्रों का कहना है कि पार्टी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने पर आगे विचार कर रही है।
पिछले साल भाजपा ने सांसदों और मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड जारी किया था। यूपी में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को मौजूदा सांसदों के रिपोर्ट कार्ड बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। जुलाई में अमित शाह जब दो दिवसीय दौरे पर यूपी गए थे, तो खराब प्रदर्शन वाले सांसदों का टिकट काटने पर चर्चा हुई थी। तब भी ऐसी चर्चा छिड़ी थी कि इन सांसदों के स्थान पर कुछ कद्दावर मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों को भी मैदान में उतारा जा सकता है।