{"_id":"5c8cda77bdec2214577e6da5","slug":"lok-sabha-elections-2019-assam-mp-ram-prasad-sharma-resigns-from-bjp-said-party-was-ignoring","type":"story","status":"publish","title_hn":"आम चुनाव 2019: असम में भाजपा को लगा झटका, सांसद राम प्रसाद शर्मा ने छोड़ी पार्टी छोड़ी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आम चुनाव 2019: असम में भाजपा को लगा झटका, सांसद राम प्रसाद शर्मा ने छोड़ी पार्टी छोड़ी
Sat, 16 Mar 2019 05:06 PM IST
अमित मंडल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी
Published by: अमित मंडल
Updated Sat, 16 Mar 2019 05:06 PM IST
विज्ञापन
राम प्रसाद शर्मा
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लोकसभा चुनाव के पहले नेताओं के पार्टी छोड़ने और दल बदलने का सिलसिला तेज हो चला है। असम के तेजपुर से भाजपा सांसद राम प्रसाद शर्मा ने भी पार्टी छोड़ दी है। शर्मा ने भाजपा छोड़ते हुए कहा कि पार्टी में नए घुसपैठियों के कारण पुराने कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
विज्ञापन
Sitting MP from Tezpur constituency, Ram Prasad Sarmah, has resigned from Bharatiya Janata Party (BJP). #Assam pic.twitter.com/n2vkeryi5z
— ANI (@ANI) March 16, 2019विज्ञापन
शर्मा ने कहा कि आरएसएस और विहिप के लिए 15 वर्ष और भाजपा के लिए 29 वर्ष काम करने के बाद वह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि मैंने आज भाजपा छोड़ दी। मैं असम के उन पुराने भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए दुख महसूस करता हूं जिन्हें नए घुसपैठियों के कारण नजरअंदाज किया जा रहा है।
विज्ञापन
उम्मीदवारों की सूची में शर्मा का नाम नहीं
तेजपुर लोकसभा सीट के लिए पार्टी के संभावित उम्मीदवार के पैनल में शर्मा का नाम शामिल नहीं था। इसमें केवल असम के मंत्री और एनईडीए के संयोजक हिमंत बिस्वा शर्मा का नाम था। वहीं असम की 14 लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों की सूची दिल्ली भेजी जा चुकी है और इसकी शनिवार को घोषणा किए जाने की संभावना है।
शर्मा की बेटी को एपीएससी नौकरी घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किए जाने के बाद से ही उनकी उम्मीदवारी दांव पर थी।
लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का एलान होते ही दल बदलने का सिलसिला जोर पकड़ने लगा है। नेता पाला बदलने में व्यस्त हैं। 16 मार्च को कई नेताओं ने दूसरे दलों का रुख कर लिया।