{"_id":"5cd0b740bdec22072c330cdf","slug":"lok-sabha-election-2019-results-from-kamal-nath-view-are-more-important","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकसभा चुनाव 2019: ‘कमल’ के सामने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे ‘नाथ’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकसभा चुनाव 2019: ‘कमल’ के सामने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे ‘नाथ’
Tue, 07 May 2019 04:07 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Tue, 07 May 2019 04:07 AM IST
विज्ञापन
कमलनाथ (फाइल फोटो)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले दिनों भाजपा के बड़े नेता और मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खजुराहो में लोगों से कहा, जनता के सामने एक वोट से दो सरकारें चुनने का मौका है। परोक्ष रूप से तोमर कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी को दोबारा चुनोगे तो मध्य प्रदेश में भी भाजपा लौट आएगी और कमलनाथ विदा कर दिए जाएंगे। इस बार आम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही खासे दबाव में हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की तस्वीर कुछ अलग है। खासकर कांग्रेस या कहें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के नजरिये से परिणाम ज्यादा महत्व रखने वाले हैं।
विज्ञापन
दरअसल, बीजेपी का यही दृष्टिकोण कमलनाथ की स्थिति को अलग बना रहा है। इस चुनाव में कमलनाथ अपनी चार माह पुरानी सरकार के भविष्य की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। आशंका में हैं कि दिल्ली में अगर मोदी सरकार लौटी तो प्रदेश में उनकी सरकार पर जोखिम बढ़ सकता है। गुना में बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती सरकार को समर्थन पर पुनर्विचार की धमकी दे चुकी हैं।
विज्ञापन
पिछले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 230 में से 114 और भाजपा को 109 सीटों पर जीत मिली थी। चार निर्दलीय, बसपा के 2 और सपा के 1 विधायक के समर्थन से कमलनाथ ने सदन में बहुमत साबित किया था। न सिर्फ तोमर बल्कि भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेता भी समर्थकों का हौसला बढ़ाने के लिए यह समझाना नहीं भूलते कि मोदी के लौटने पर अपनी सरकार भी लौट आएगी।
विज्ञापन
कांग्रेस में पूरी कमान कमलनाथ के हाथ
कांग्रेस के सारे सूत्र मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथ में हैं। हाल ही में उन्होंने धार, खंडवा और खरगोन में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे उम्मीदवारों को बैठाने में कामयाबी हासिल की। दावा है कि कांग्रेस कम से कम 20 सीटें जीतेगी। जाहिर है इनमें भोपाल और इंदौर भी शामिल हैं। उन्हें शंका थी कि छिंदवाड़ा और गुना में बीजेपी दमदार चेहरा उतारेगी, लेकिन दोनों जगहों पर मुफीद हालात बन गए हैं।
भाजपा में उदासीनता और कुछ गुटबाजी भी
15 साल बाद राज्य की सत्ता में लौटी कांग्रेस विधानसभा चुनावों का प्रदर्शन दोहराना चाहती है। हालांकि विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत कांग्रेस से आधा फीसदी अधिक था। विधानसभा सीटों के लिहाज से कांग्रेस को 12 लोकसभा क्षेत्रों में बढ़त थी और भाजपा को नौ सीटों पर नुकसान हुआ था। गुटबाजी से जूझ रही भाजपा का आत्मविश्वास डांवाडोल है, कार्यकर्ता उदासीन हैं। स्टार प्रचारकों में सबसे ज्यादा दौरे शिवराज के कराए जा रहे हैं। चौहान जहां जाते हैं, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं की लिस्ट लेकर जाते हैं। उन्हें समझाया-बुझाया जाता है। कहा जाता है कि मोदी पीएम बनेंगे तो अपनी सरकार फिर लौट आएगी।
चुनाव या इवेंट मैनेजमेंट
सभी 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच ही सीधी टक्कर है। पांचवें चरण में सोमवार को सात सीटों पर मतदान हुआ। पूरा चुनाव इवेंट मैनेजमेंट की तर्ज पर हो रहा है। राज्य के शहरी और कस्बों में चुनाव जैसा माहौल नहीं है। दोनों ही पार्टियों ने मैनेजमेंट टीमें बैठा रखी हैं, वॉर रूम और कंट्रोल रूम बनाए गए हैं।
कर्जमाफी पर घिर सकती है कांग्रेस
शहरी इलाकों में पीएम मोदी की वापसी बड़ा मुद्दा है। इस नजरिए से लोग भाजपा उम्मीदवार की खामियां नहीं देख रहे हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसी स्थिति नहीं है। कांग्रेस किसानों को 2 लाख तक का कर्ज माफ करने के वादे के साथ सत्ता में आई थी। उसका दावा भी है कि करीब 22 लाख किसानों के कर्ज माफ हो गए हैं। शेष 28 लाख किसानों के भी चुनाव बाद कर्ज माफ होंगी। लेकिन भाजपा इसे वादा खिलाफी बताकर प्रचारित कर रही है।
