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इंदौर लोकसभा सीट: 'कांग्रेस' बनाम 'भाजपा के 30 साल', ताई के बिना क्या खिल पाएगा कमल?

Wed, 01 May 2019 04:02 PM IST
Prachi Priyam चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Wed, 01 May 2019 04:02 PM IST
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Lok Sabha Chunav 2019: Tough fight between Shankar lalwani and Pankaj Sanghvi in Indore 
इंदौर का सियासी समीकरण - फोटो : Amar Ujala

इंदौर लोकसभा सीट की गिनती मध्य प्रदेश की राजनीति की अहम सीटों में होती है। यह 16 वीं लोकसभा की स्पीकर सुमित्रा महाजन की सीट है। इस बार लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने इस सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। उनके इनकार करने की वजह टिकट देने में भाजपा की ओर से हील-हवाली थी। इसके बाद भाजपा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को इस सीट से मुख्य दावेदार माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने भी यहां से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद भाजपा नेतृत्व ने यहां से शंकर लालवानी को टिकट दिया। इस बार यहां भाजपा के शंकर लालवानी और कांग्रेस उम्मीदवार पंकज संघवी के बीच मुकाबला होगा। 

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इंदौर का राजनीतिक इतिहास 

इंदौर लोकसभा सीट की लड़ाई भाजपा के लिए थोड़ी आसान हो सकती है। यहां 1989 में सुमित्रा महाजन ने पहली बार चुनाव लड़ा था। इसके बाद से इस सीट से उन्हें कभी निराशा नहीं मिली। वो इंदौर से लगातार 8 बार चुनाव जीतती आई हैं। 1957 में यहां पहला लोकसभा चुनाव हुआ था। तब से 1984 तक यहां ज्यादातर कांग्रेस ने जीत हासिल की। साल 1989 में पहली बार सुमित्रा महाजन ने भाजपा के टिकट पर यहां से जीत हासिल की, और तब से लगातार यह सीट उन्हीं के नाम है। 2014 में उन्होंने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को 4 लाख से भी ज्यादा वोटों से हरा कर जीत हासिल की थी। माना जाता है कि यहां के लोग अपनी 'ताई' को खूब मानते हैं। हालांकि सुमित्रा महाजन इस बार चुनाव नहीं लड़ रही हैं, लेकिन उन्हें जनता से मिलने वाले समर्थन का फायदा भाजपा को मिलने की पूरी उम्मीद है। 

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इंदौर से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाली महाजन को मध्यप्रदेश की इस सीट से भाजपा के टिकट का शीर्ष दावेदार माना जा रहा था. लेकिन इस सीट से भाजपा उम्मीदवार की घोषणा में देरी के चलते अटकलों के सियासी गलियारों में यह सवाल जोर पकड़ रहा था कि क्या लालकृष्ण आडवाणी (91) और मुरलीमनोहर जोशी (85) सरीखे वरिष्ठतम भाजपा नेताओं की तरह महाजन को भी चुनावी समर से विश्राम दिया जाएगा? आखिर में ऐसा ही हुआ और उन्होंने हाईकमान का संकेत समझते हुए खुद ही चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। 
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सुमित्रा महाजन: लगातार 8 बार लोकसभा चुनाव जीतकर इतिहास रचने वालीं 'ताई' का सियासी सफर

22 लाख से ज्यादा मतदाता  

इंदौर लोकसभा सीट में 22,02,105 मतदाता हैं। चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में यहां 21,15,303 मतदाता थे, इसमें से 10,08, 842 महिला और 11,06,461 पुरुष मतदाता थे। 2014 में इस सीट पर 62.25 फीसदी मतदान हुआ था। माना जा रहा है कि ग्रामीण और शहरी मतदाताओं के मिश्रित समीकरण वाली इंदौर लोकसभा सीट का मुकाबला इस बार सबसे दिलचस्प होने वाला है।

किसका किससे है मुकाबला?

इंदौर से सुमित्रा महाजन के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद भाजपा ने शंकर लालवानी को टिकट दिया है। उनके सामने कांग्रेस के पंकज संघवी खड़े हैं। शंकर लालवानी का नाम भाजपा के सदाबहार नेताओं की सूची में आता है। साल 1993 में लालवानी को विधानसभा क्षेत्र-4 की जिम्मेदारी मिली थी। इसके तीन साल बाद 1996 में हुए नगर निगम चुनाव में उन्हें जयरामपुर वार्ड से टिकट मिला था, जिसमें वो अपने भाई और कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश लालवानी को हराकर पार्षद बने थे। इसके अलावा वो इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी की इंदौर में अच्छी पकड़ मानी जाती है। गरीब या जरूरतमंद की मदद पंकज संघवी की बहुत बड़ी ताकत है। उनकी सर्वसुलभता ही उनकी शक्ति मानी जा रही है। इसके अलावा इंदौर के गुजराती समाज का भी मजबूत समर्थन उनके साथ माना जाता है|  वैसे पंकज संघवी 1998 में भी ताई के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं| तब ताई को 4 लाख 40 हज़ार 47 वोट मिले थे और पंकज संघवी को 3 लाख 90 हजार 195| मतलब हार हुई थी 49 हजार 852 वोटों से| क्या संघवी अब 2019 में ये रास्ता तय कर पाएंगे? वो भी तब जब पिछले चुनाव में हार का अंतर बहुत बड़ा, 4 लाख से भी ज़्यादा का था| 

ऐेसे में इंदौर मध्य प्रदेश की उन हॉट सीटों में से एक बन गया है, जिसपर पूरे देश की नजर रहेगी। माना जा रहा है कि इस बार का मुकाबला इतना कड़ा है कि जीत किसी के भी हाथ लग सकती है और किसी को भी हार का स्वाद चखना पड़ सकता है।

मूलतः महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाली सुमित्रा महाजन वर्ष 1965 में विवाह के बाद अपने ससुराल इंदौर में बस गई थीं। उन्होंने वर्ष 1982 में इंदौर नगर निगम के चुनावों में पार्षद पद की उम्मीदवारी से अपने चुनावी करियर की कामयाब शुरुआत की थी। वर्ष 1989 में इंदौर से अपना पहला लोकसभा चुनाव जीतने से पूर्व वह वर्ष 1984-85 में इंदौर नगर निगम की उप महापौर भी रही थीं। 

भाजपा संगठन में कई अहम पदों की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली एनडीए सरकार (1999-2004) की अवधि में मानव संसाधन विकास, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस विभागों का मंत्री भी बनाया गया था। वह संसद की कई समितियों की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। 

साल 2014 में 16वीं लोकसभा के चुनावों में महाजन ने परंपरागत इंदौर क्षेत्र में अपने नजदीकी प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस उम्मीदवार सत्यनारायण पटेल को चार लाख 66 हजार 901 मतों के विशाल अंतर से हराया, तब वह एक ही सीट और एक ही पार्टी से लगातार आठ बार लोकसभा पहुंचने वाली देश की पहली महिला सांसद बन गई थीं। 

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