लोकसभा अध्यक्ष और इंदौर से मौजूदा सांसद सुमित्रा महाजन चर्चा में हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा की तरफ से टिकट के एलान में देरी के बाद सुमित्रा महाजन ने इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। इंदौर सीट से प्रत्याशी घोषित करने के भाजपा के असमंजस के बाद सुमित्रा महाजन ने ये फैसला किया है। एक तरह से उन्होंने पार्टी से अपनी नाराजगी जताई है। सुमित्रा आठ बार लोकसभा सांसद रही हैं। आइए जानते हैं भाजपा और भारतीय सियासत में कैसा रहा है सुमित्रा महाजन का सफर।
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सुमित्रा का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के चिपलूण में एक साधारण परिवार में हुआ था। 22 साल की उम्र में उनकी शादी इंदौर के रहने वाले जयंत महाजन से हुई। इसके बाद उन्होंने इंदौर से एमए और एलएलबी की डिग्री ली। उनके दो बेटे मंदार महाजन और मिलिंद महाजन हैं। मीसाबंदी परिवार की मदद करते करते उनके कदम राजनीति की तरफ बढ़ चले।
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Sumitra Mahajan
- फोटो : लोकसभा टीवी
मौजूदा समय में सुमित्रा महाजन लोकसभा की 16वीं स्पीकर हैं। 2014 में वह आठवीं बार लोकसभा से चुनी गईं। ऐसा करने वाली वह तीसरी सांसद हैं। इसके अलावा वह सबसे लंबे समय तक कार्यरत महिला लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने 1989 से इंदौर की लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया है।
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सुमित्रा महाजन
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राजनीति में प्रवेश
राजनीति में उनका प्रवेश इंदौर की उप महापौर चुने जाने के तौर पर हुआ। 1989 में उन्होंने पहली बार इंदौर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रकाश चंद्र सेठी को हराकर सनसनी मचा दी। उन्होंने शहरी विकास मंत्रालय में राज्य मंत्री रहने के दौरान इंदौर में कई काम कराए जिसने उन्हें लोकप्रियता और यहां से लगातार जीत दिलाई। मध्य प्रदेश की सियासत में उन्हें 'ताई' नाम से बुलाया जाता है।
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लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन
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सबसे वरिष्ठ महिला सांसद
ताई लोकसभा की सबसे वरिष्ठ महिला सांसद हैं। 2002 से 2004 तक वह केंद्रीय मंत्री भी रहीं। तब उन्हें मानव संसाधन, संचार और पेट्रोलियम मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी मिली। मीरा कुमार के बाद वह लोकसभा स्पीकर चुनी जाने वाली दूसरी महिला सांसद रहीं। राजनीति में सुमित्रा महाजन का करियर अब तक बेदाग रहा है। वह कभी किसी विवाद में नहीं फंसीं। लोकसभा स्पीकर रहने के दौरान उन्होंने सख्त फैसले भी लिए।