सिख दंगा पीड़ितों ने राहुल को लिखा पत्र, कहा- राजीव गांधी को न बताएं शहीद
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजीव गांधी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के बाद इस पर बयानों का सिलसिला तेज हो गया है। राजीव को शहीद बताने पर सिख दंगों के पीड़ितों ने राहुल गांधी को एक पत्र लिखकर उनसे अपील की है कि वे अपने पिता को शहीद न बताएं। पीड़ितों ने अपने पत्र में कहा है कि राजीव गांधी दस हजार सिखों की हत्याओं के दोषी हैं और उनके घावों पर आज भी मलहम नहीं लगा है।
पत्र में कहा गया है कि राजीव ने इन हत्याओं को यह कहकर जायज ठहराने की कोशिश की थी कि 'जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है'। पीड़ितों के मुताबिक, इस तरह सिख हत्याओं के दोषी को शहीद बताना उन शहीदों का अपमान है जो इस देश पर अपनी जान कुर्बान करते आए हैं। इस पत्र के नीचे सिख दंगा पीड़ितों ने अपने हस्ताक्षर किए हैं और अपने नाम के सामने अपने मोबाइल नंबर भी लिखे हैं।
टीचर्स फ्रंट ने कहा, पित्रोदा का बयान एकतरफा
दिल्ली एनसीआर में विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के अध्यापकों के संगठन नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) ने एक पत्र लिखकर कहा है कि सभी प्रोफेसर व लेक्चरर सैम पित्रोदा की बात से सहमत नहीं हैं।
एनडीटीएफ के पदाधिकारी एके भागी ने अमर उजाला से कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री का काल पूरी तरह सिर्फ गुणों या अवगुणों से भरा नहीं होता है। ऐसे में जब भी किसी प्रधानमंत्री के कार्यकाल की समीक्षा की जाती है, उसके सभी फैसलों को ध्यान में रखते हुए उसकी समीक्षा की जानी चाहिए। लेकिन जब एक ही पक्ष को ध्यान में रखकर बात रखी जाती है तो इससे एकतरफा परिणाम निकलते हैं। राजीव गांधी के बारे में भी यही बात हुई है।
टीचर्स संगठन ने कहा- पित्रोदा से सहमत नहीं
एके भागी ने कहा है कि राजीव सरकार ने देश के लिए कई अच्छे काम किए थे, इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। लेकिन साथ ही इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि उसी राजीव सरकार में हजारों सिखों की हत्या हुई थी। उन हत्याओं की जिम्मेदारी आखिर किसके ऊपर डाली जानी चाहिए। भागी के मुताबिक इसी प्रकार भोपाल गैस कांड के हजारों पीड़ितों के दोषी एंडरसन को भारत से भगाने में भी कांग्रेस के नेताओं का नाम आया था। उन्होंने कहा कि देश को इन घटनाओं के बारे मे भी जानने का हक है।
भागी ने कहा कि सैम पित्रोदा कुछ लोगों के नाम से पत्र ट्वीट कर यह बताना चाहते हैं कि पूरे अध्यापक वर्ग की राय राजीव गांधी को क्लीन चिट देने की थी, लेकिन यह सच नहीं है। सच यह है कि इस मुद्दे पर भी लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ लोग उन्हें अच्छा तो कुछ गलत भी मानते हैं। उन्होंने कहा कि 125 अध्यापकों के लिखे पत्र को जारी कर वे जनता से यह अपील कर रहे हैं कि मौजूदा दौर में नरेंद्र मोदी सरकार का कोई विकल्प नहीं है और इस सरकार को दुबारा मौका मिलना चाहिए। पत्र के साथ नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा किए गए कामों के कई आंकड़े भी जारी किए गए हैं।