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सबसे पहले कब कराया गया था एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल से ये कितना अलग?

Sun, 19 May 2019 03:46 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Sun, 19 May 2019 03:46 PM IST
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Lok sabha chunav 2019: History of exit poll and opinion poll
एग्जिट पोल - फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव 2019 के आखिरी चरण का मतदान आज हो रहा है। शाम छह बजे मतदान खत्म होने के साथ ही एग्जिट पोल का सिलसिला शुरू हो जाएगा। तमाम एजेंसियों की तरफ से राजनीतिक दलों को मिलने वाली सीटों का अनुमान लगाया जाएगा। लेकिन आपको बता दें कि एग्जिट पोल हमेशा सही साबित नहीं होते हैं। हालांकि, कुछ एजेंसियों का एग्जिट पोल सही भी साबित होता है। ऐसे में आपको बता रहे हैं कि एग्जिट पोल की शुरुआत कहां से हुई थी और ओपिनियन पोल से यह कितना अलग होता है।  
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एग्जिट पोल

नीदरलैंड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वान डैम को इसका जनक माना जाता है और सबसे पहली बार इसे 15 फरवरी, 1967 में कराया गया था। यह ओपिनियन पोल से अलग होता है। जब मतदाता अपने मत का प्रयोग कर चुका होता है तो उससे यह पूछा जाता है कि उसने अपना मत किसे दिया। इस आधार पर किए गए सर्वे से जो व्यापक नतीजे निकलकर सामने आते हैं उनके आधार पर इसके परिणामों को तैयार किया जाता है। चूंकि यह एक निश्चित संख्या किया जाता है, इसलिए अनुमान हर समय सही साबित नहीं होता।  
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ओपिनियन पोल

इस सर्वे का जनक जॉर्ज गैलप और क्लॉड रोबिंसन को माना जाता है। सबसे पहले अमेरिका में चुनावी सर्वे कराया गया था। इससे प्रभावित होकर इंग्लैंड और फ्रांस ने इसे अपनाया। इंग्लैंड में इसका प्रयोग 1937 में किया गया वहीं फ्रांस ने इसे 1938 में अपनाया। ओपिनियन पोल के परिणामों के लिए चुनाव के लिहाज से प्रमुख मसलों पर जनता के मन की बात जानने की कोशिश की जाती है। जनता किस बात से नाराज और किस बात से संतुष्ट है इन सभी को आधार बनाते हुए अनुमान लगाया जाता है कि किस दल और किस नेता को वो आगे चुनने वाली है। मतदाताओं से पूछा जाता है कि वो किसे अपना मत देने का मन बना रहे हैं।
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भारत में चुनावी सर्वे की दस्तक

भारत में चुनावी सर्वे का जनक भारतीय जनमत संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन) के प्रमुख एरिक डी कोस्टा को माना जाता है। भारत में चुनाव के दौरान इस प्रकार के सर्वे से जनता के रुख को जानने का काम सबसे पहले इन्होंने ही किया था। भारत में जब इसका चलन बढ़ा तो सबसे पहले इसे पत्रिकाओं के माध्यम से प्रकाशित किया गया। टेलीविजन पर इसने अपनी दस्तक 1998 में दी जब एक राष्ट्रीय समाचार चैनल ने इस संबंध में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में चुनावी विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिकों को बुलाया गया था।


चुनावी सर्वे के नियम 

चुनाव आयोग द्वारा 1999 में एक आदेश जारी कर ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद एक समाचार पत्र ने इसका विरोध किया और कोर्ट में चुनौती दे दी। इसके बाद कोर्ट ने इस पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था। 2009 में भी इसके विरोध में आवाज उठी थी जिसके बाद कानून मंत्रालय ने जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 में संशोधन किया था। इसके बाद यह नियम लागू किया गया कि जब तक चुनावी प्रक्रिया का अंतिम वोट न डल जाए किसी भी चुनावी सर्वे को न तो दिखाया जा सकता है और न ही प्रकाशित किया जा सकता है।

 
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