बिहार की चार सीटों पर मतदान आज, इन महारथियों के बीच होगी कांटे की टक्कर
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जमुई: लोजपा बनाम रालोसपा
जमुई संसदीय क्षेत्र में एनडीए की तरफ से चिराग कुमार पासवान और महागठबंधन के भूदेव चौधरी आमने सामने हैं। भूदेव को रालोसपा के खाते की टिकट मिली है। चिराग, लोजपा अध्यक्ष राम विलास पासवान के बेटे हैं। वो पासवान जिन्हें 'मौसम वैज्ञानिक' कहा जाता है। यानी वो भांप लेते हैं कि हवा का रुख किधर है। उनकी राजनीतिक सूझबूझ का फायदा तो चिराग को मिलेगा लेकिन खुद का राजनीतिक तजुर्बा रुकावट भी बन सकता है। जमुई के अंतर्गत चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनपर राजद सांसद सह पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश नारायण यादव और जदयू नेता नरेन्द्र सिंह की अच्छी पकड़ रही है। जदयू के दामोदर राउत अति पिछड़ा वर्ग के नेता माने जाते हैं। इस क्षेत्र में जदयू, राजद और भाजपा के मतदाताओं की संख्या अधिक है।
बिहार और झारखंड की सीमा पर पड़ने वाली गया लोकसभा सीट का इतिहास राजनीतिक उठा पटक से भरपूर रहा है। वर्तमान में यहां से भाजपा के हरि मांझी सांसद हैं लेकिन इतिहास में गया को कभी कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। 2004 और 2019 के चुनावों में यहां भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा। 2014 में हरि मांझी ने राजद उम्मीदवार राजेश कुमार मांझी को हराकर ये सीट हासिल की थी। यहां एनडीए ने विजय कुमार मांझी और महागठबंधन ने जीतन राम मांझी को मैदान में उतारा है। मांझी, बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्हें मांझी समुदाय के अलावा मुस्लिम-यादव का साथ मिलता दिख रहा है लेकिन स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, गया में प्रधानमंत्री की रैली के बाद विजय कुमार के लिए समर्थन बढ़ा है।
औरंगाबाद: भाजपा बनाम हम
सूर्य की नगरी औरंगाबाद में इस बार का मुकाबला काफी रोचक होने वाला है, क्योंकि महागठबंधन में यह सीट हम के खाते में चली गई है। कांग्रेस की सीट हम के खाते में जाने से पुराने कांग्रेसी नाराज हैं। यहां से चुनाव में कुल नौ प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच है। एनडीए से वर्तमान भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह एक बार फिर मैदान में हैं, वहीं महागठबंधन की ओर से हम पार्टी के उपेंद्र प्रसाद उम्मीदवार हैं। सुशील कुमार सिंह 2009 से लगातार सांसद हैं, जबकि उपेंद्र पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उपेंद्र प्रसाद ने जदयू छोड़कर हम का दामन थामा है।
यहां के नेता मुख्यमंत्री और राज्यपाल का पद भी सुशोभित कर चुके हैं। छोटे साहब के नाम से प्रसिद्ध सत्येन्द्र नारायण सिन्हा छह बार चुनाव जीते थे। एक बार 1950 में बनी प्रोविजनल पार्लियामेंट के लिए भी चुने गए थे। वह बिहार के मुख्यमंत्री भी बने। इन्हीं के पुत्र निखिल कुमार भी यहां से सांसद रहे हैं, जो केरल और नागालैंड के राज्यपाल भी बने।
भाजपा के कद्दावर नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के टिकट कटने को लेकर चर्चा में हैं। इस सीट पर मुख्य मुकाबला एनडीए के लोजपा उम्मीदवार चंदन सिंह और महागठबंधन की ओर से राजद उम्मीदवार विभा देवी के बीच है। विभा देवी, दुष्कर्म के आरोपी राजद नेता राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं, जिनके पक्ष में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी रैली कर चुकी हैं।
लोजपा ने इस सीट से चंदन सिंह को चुनाव मैदान में उतारा है। नवादा लोकसभा सीट के परिणाम यहां के जातीय समीकरण से तय होते रहे हैं। इसी कारण पार्टियां भी उम्मीदवार तय करने में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखती हैं। पिछले 10 वर्षो से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में भूमिहार बहुल इस सीट से भाजपा के गिरिराज सिंह विजयी हुए थे। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के राजबल्लभ यादव को हराया था।