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SSB: सशस्त्र सीमा बल का अलंकरण समारोह, केंद्रीय गृह सचिव ने किया 18 अफसरों/कार्मिकों का सम्मान
Tue, 01 Sep 2026 10:21 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 01 Sep 2026 10:21 PM IST
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सशस्त्र सीमा बल का अलंकरण समारोह
- फोटो : अमर उजाला
सशस्त्र सीमा बल के अलंकरण समारोह में केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 18 अधिकारियों एवं कार्मिकों को वीरता एवं पराक्रम के लिए वीरता पदक तथा पांच अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया। 18 वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं में दिवंगत मुख्य आरक्षी रवि शर्मा को मरणोपरांत प्रदान किया गया वीरता पदक उनकी धर्मपत्नी ने प्राप्त किया।
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केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने लिखित संदेश के माध्यम से अलंकृत किए गए सभी अधिकारियों एवं कार्मिकों तथा उनके परिवारजनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सशस्त्र सीमा बल के 51 वीर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनकी वीरता, कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्रभक्ति एसएसबी की अमूल्य विरासत है। अमित शाह ने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में जान गवाने वाले सभी लोगों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान एसएसबी द्वारा किए जा रहे मानवीय सहायता एवं बचाव कार्यों की भी सराहना की और इसे बल के ध्येय वाक्य ‘सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व’ का जीवंत स्वरूप बताया।
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केन्द्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने कहा कि भारत की सीमाओं की सुरक्षा देश की आंतरिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। सीमा सुरक्षा बलों की भूमिका राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत-नेपाल और भारत-भूटान की मित्रवत एवं खुली सीमाओं की सुरक्षा में एसएसबी द्वारा निभाई जा रही भूमिका की सराहना की। इन सीमाओं पर बड़ी संख्या में वैध आवागमन के बीच सुरक्षा, जनसुविधा और मित्रवत संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना एसएसबी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। गोविंद मोहन ने गृह मंत्रालय द्वारा परिकल्पित चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों की अग्रिम पंक्ति की व्यवस्थाओं, केन्द्र सरकार की संबंधित संस्थाओं तथा सीमावर्ती समुदायों के समन्वित प्रयासों से सीमा सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकता है। इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में पहली महत्वपूर्ण बैठक एसएसबी के तत्वावधान में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आयोजित की गई थी।
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केन्द्रीय गृह सचिव ने कहा कि बिना किसी भौतिक अवरोध के खुली सीमा की सुरक्षा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। उन्होंने फेशियल रिकग्निशन, रडार, सीसीटीवी तथा अन्य आधुनिक निगरानी प्रणालियों के माध्यम से सीमा सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए एसएसबी द्वारा किए जा रहे तकनीकी नवाचारों की सराहना की। उन्होंने मानव तस्करी, जाली मुद्रा, मादक पदार्थों और हथियारों की तस्करी के विरुद्ध एसएसबी की प्रभावी कार्रवाई का भी उल्लेख किया।
एसएसबी डीजी संजय सिंघल ने कहा, बल के अधिकारी एवं जवान मादक पदार्थों, हथियारों, जाली मुद्रा, मानव तस्करी, अवैध आव्रजन तथा अन्य संगठित अपराधों के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त बल आंतरिक सुरक्षा, वामपंथी उग्रवाद, काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस, निर्वाचन ड्यूटी, कानून-व्यवस्था तथा आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रहा है। नेपाल में आई हालिया आपदा के दौरान भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में एसएसबी के राहत एवं बचाव दलों द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
महानिदेशक ने कहा कि हाइब्रिड वॉरफेयर, साइबर एवं इंफॉर्मेशन वॉरफेयर, ड्रोन आधारित खतरे तथा तस्करी के नए तौर-तरीके सीमा सुरक्षा के समक्ष नई चुनौतियां प्रस्तुत कर रहे हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक निगरानी प्रणालियों, संचार साधनों, ड्रोन तथा अन्य तकनीकी उपकरणों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से एसएसबी की परिचालन क्षमता को निरंतर मजबूत किया जा रहा है। समारोह के दौरान मुख्य अतिथि ने एसएसबी की 248 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं का ई-लोकार्पण तथा एसएसबी ई-स्मारिका का विमोचन भी किया गया।