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आगरा के लोहामंडी से भी 350 से ज्यादा हिंदुओं का पलायन, कैराना जैसे हालात-विहिप

Fri, 17 Jun 2016 09:25 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो/ अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 17 Jun 2016 09:25 AM IST
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Loha Mandi Of Agra becomes Kairana, 350 Hindus departed up till now

शामली के कैराना-कांधला में ही हिंदुओं ने पलायन नहीं किया, आगरा के लोहामंडी क्षेत्र से भी दहशत के चलते पिछले पांच सालों में साढ़े तीन सौ से अधिक हिंदू पलायन कर चुके हैं। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सर्वे कराकर इनकी सूची तैयार कर ली है। जल्द ही इसे उजागर किया जाएगा। हालांकि शहीद नगर और अन्य क्षेत्रों से भी पलायन करने वालों की तलाश की जा रही है।

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कैराना में हिंदुओं का पलायन का मामला अब सिर्फ शामली तक ही सीमित नहीं रहा। विहिप इसे मुद्दा बनाकर प्रदेशस्तर पर ले जाना चाहती है। इस दिशा में केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से निर्देश भी जारी कर दिया गया है। मगर, स्थानीय स्तर पर विहिप ने इस पर काफी पहले ही काम शुरू कर दिया था। सूत्रों की मानें तो संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं की टीम बनाकर लोहामंडी के जटपुरा, खातीपाड़ा, मोतीकुंज, बिल्लोचपुरा में सर्वे कराया है। 
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इसके लिए इन क्षेत्रों की पांच साल पहले की वोटर लिस्ट और वर्तमान वोटर लिस्ट में मेल कराया गया। इसमें पाया कि इन क्षेत्रों में इस बीच 350 से अधिक हिंदू पलायन कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश को खोज लिया है। इनमें से जल्द ही कुछ लोगों को सामने लाया जाएगा। हालांकि विवाद की वजह में पड़ने की वजह से पलायन करने वाले कुछ परिवार खुलकर सामने नहीं आना चाहते।

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'दहशत में बेचे घर'

Loha Mandi Of Agra becomes Kairana, 350 Hindus departed up till now

सूत्रों की मानें तो विहिप के सर्वे के मुताबिक, अधिकांश हिंदुओं ने दहशत के चलते पलायन किया है। एक समुदाय विशेष के क्षेत्र में बढ़ते वर्चस्व की वजह से पलायन करने वाले लोग परिवार सहित रहने में असहज महसूस करने लगे थे। दहशत के चलते ही अपने घर बेचकर दूसरे क्षेत्रों में शिफ्ट हो गए हैं। कुछ व्यापारी इसमें भी इसमें शामिल हैं। असुरक्षा के डर की वजह से वे अपनी दुकानें बंद करके जा चुके हैं।

विहिप लोहामंडी क्षेत्र के रूप में जल्द अपनी पहली सूची जारी करेगा। मगर, उसका सर्वे शहरभर में जारी है। तमाम क्षेत्रों से ऐसे लोग तलाशे जा रहे हैं जो हाल के वर्षों में दहशत और परेशान छोड़कर पलायन कर गए हों। नौकरी या व्यापार को विस्तार रूप देने के लिए क्षेत्र छोड़ने वालों को इसमें शामिल नहीं किया जा रहा। विहिप कार्यकर्ता पलायन करने वाले अधिकांश लोगों से मिल रहे हैं, उनसे पलायन करने का कारण भी जान रहे हैं। कुछ दिनों में दूसरी सूची जारी की जा सकती है।

अरुण माहौर हत्याकांड के समय उठा मुद्दा

इसी साल फरवरी के आखिर में मंटोला क्षेत्र में हिंदूवादी नेता अरुण माहौर की हत्या के समय भी विभिन्न संगठनों ने इस मुद्दे को उठाया था। इन संगठनों का आरोप था कि पूर्व में अरुण और उसका परिवार मंटोला क्षेत्र में ही रहता था। मगर, एक समुदाय विशेष के दबंग लोगों ने उसके परिवार का रहना मुश्किल कर दिया था। इसकी वजह से अरुण को परिवार को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा था। इन संगठनों ने यह भी आरोप लगाया था कि ये दबंग लोग उसे दुकान भी नहीं करने दे रहे थे। उसकी दुकान में कई बार आग लगा चुके थे। ताकि वह अपनी दुकान बेचकर चला जाए।

नेतृत्व के निर्देश के बाद शहर में पलायन करने वालों की सूची तैयार की जा रही है। नेतृत्व को सौंपने के बाद जल्द ही इसे जारी किया जाएगा।
- सुनील पाराशर, प्रदेश उपाध्यक्ष, विहिप

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