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सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी का 111 साल की उम्र में निधन, शोक में डूबा कर्नाटक

Mon, 21 Jan 2019 03:10 PM IST
अनिल पांडेय न्यूज डेस्क, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, बंगलूरू Published by: अनिल पांडेय Updated Mon, 21 Jan 2019 03:10 PM IST
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lingayat dharma guru and Mahant of Siddaganga Mutt shivakumara swami death at the age of 111
शिवकुमार स्वामी जी

लिंगायत समुदाय के जाने माने धर्मगुरु और सिद्धगंगा मठ के महंत शिवकुमार स्वामी का 111 साल की उम्र में निधन हो गया है। बीमारी के चलते उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। उनके निधन से कर्नाटक में शोक की लहर है। राज्य में तीन दिन के राजकीय शोक का एलान किया गया है। उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि स्वामी जी का 11.44 मिनट पर निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे के बाद किया जाएगा।

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कुमारस्वामी ने कहा कि महंत शिवकुमार जीवित भगवान थे। उन्होंने देश के लिए जो किया उन्हें शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। उनके जाने से देश को भारी क्षति हुई है। उनके निधन पर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है। बता दें कि महंत शिवकुमार का कर्नाटक की राजनीति में काफी प्रभाव रहता था। कुमारस्वामी के अलावा भाजपा नेता बीएस येदुरप्पा और सदानंद गौड़ा सहित कई नेता मठ पहुंचे।

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पीएम मोदी ने जताया शोक 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिवकुमार स्वामीजी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह लोगों, खासकर गरीबों, के लिए जिये। तुमकुरू स्थित सिद्धगंगा मठ के 111 वर्षीय संत शिवकुमार स्वामीजी का सोमवार को निधन हो गया। साक्षात देवता (वॉकिंग गॉड) के तौर पर मशहूर स्वामीजी लंबे समय से बीमार थे। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, परम पूजनीय डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु लोगों, खासकर गरीबों व कमजोरों, के लिए जिये। उन्होंने गरीबी, भूख और सामाजिक अन्याय जैसी समस्याओं के उन्मूलन की दिशा में खुद को समर्पित कर दिया था। दुनिया भर में फैले उनके अनगिनत श्रद्धालुओं के प्रति प्रार्थनाएं और एकजुटता। 

उन्होंने कहा कि स्वामीजी वंचित तबकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएं सुनिश्चित करने के प्रयासों में आगे रहे और वह करुणामयी सेवा, आध्यात्मिकता एवं वंचितों के अधिकारों का संरक्षण करने की भारतीय परंपरा के प्रतिनिधि रहे। मोदी ने कहा, मुझे श्री सिद्धगंगा मठ जाने और परम पूजनीय डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त है। प्रधानमंत्री ने कहा,वहां सामुदायिक सेवा की व्यापक पहल शानदार है और अकल्पनीय रूप से बहुत बड़े पैमाने पर है। 

राष्ट्रपति ने जताया दुख

वहीं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आध्यात्मिक नेता डॉ. श्रीश्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु जी के निधन से अत्यंत दुखी हूं। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा की दिशा में समाज के लिए बहुत योगदान दिया है। उनके अनगिनत अनुयायियों के प्रति मेरी संवेदना है।

दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भारत सरकार से अनुरोध किया है कि स्वामी शिवकुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्वामी को महान व्यक्ति बताया है।

कलाम ने कहा था: मैंने ईश्वर को देखा है

बात 10 मई 2007 की है। तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम संसद सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्वामी शिवकुमार की 100वीं जन्म शती समारोह और लिंगायत मठ के 300 साल पुराने इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा- 'मैंने ईश्वर को देखा है। साक्षात अपनी आंखों के सामने। उस व्यक्ति को देने में खुशी मिलती है।

शरीर और आत्मा में आपको देने के लिए सब कुछ है। यदि आपके पास ज्ञान है, तो उसे साझा करें। संसाधन है, तो जरूरतमंदों के साथ बांटे। अपने दिल का इस्तेमाल दूसरों के दुख-दर्द को दूर करने और उन्हें खुशी देने के लिए करें।

अगर आपको देने में खुशी मिलती है, तो ईश्वर आपके सभी कार्यों को आशीर्वाद देंगे। मैंने यह सब कुछ अपनी आंखों के सामने स्वामीजी को करते देखा है। उन्होंने लोगों को सिर्फ दिया। उन्हें हमेशा ईश्वर का आशीर्वाद मिलेगा। इसलिए वे जीवित भगवान हैं।' संसद में उन्होंने स्वामीजी पर लिखी अपनी कविता भी सुनाई।

2015 में पद्म भूषण से नवाजा गया था

कर्नाटक के रामनगर जिले के वीरपुरा गांव में जन्मे लिंगायत-वीरशैव समुदाय के शिवकुमार स्वामी को 2015 में पद्म भूषण से नवाजा गया था। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और कई सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने जीते जी लोगों के दुख-दर्द बांटे, गरीबों को मुफ्त शिक्षा और रहने के लिए घर उपलब्ध करवाए।

  • जन्म: 1 अप्रैल 1907
  • मृत्यु: 21 जनवरी 2019

10 हजार बच्चों को शिक्षा और रहना-खाना फ्री में

मठ की ओर से 10 हजार बच्चों को रोजाना मुफ्त भोजन और उनकी पढ़ाई की व्यवस्था की गई है। मठ 150 से ज्यादा शिक्षण संस्थाएं चला रहा है। इनमें इंजीनियरिंग कॉलेज भी हैं। कर्नाटक के 30 जिलों में लिंगायत मठ का प्रभाव है। इस समुदाय के वोटरों का हिस्सा 18% है और 100 से ज्यादा सीटों पर इनका सीधा प्रभाव है।

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