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विजय माल्या की तरह नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की राह भी आसान नहीं

Thu, 21 Mar 2019 12:11 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: vivek shukla Updated Thu, 21 Mar 2019 12:11 AM IST
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Like Vijay Mallya path of extradition of Nirav Modi is not easy
नीरव मोदी

 पीएनबी घोटाले का मुख्य आरोपी नीरव मोदी भले ही लंदन में गिरफ्तार हो चुका है, लेकिन उसके भारत प्रत्यर्पण की राह आसान नहीं है। भारत को भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की तरह ही नीरव के लिए भी ब्रिटेन की लंबी कानूनी व न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। नीरव के पास वहां की अदालत में अपने खिलाफ प्रत्यर्पण को चुनौती देने का विकल्प मौजूद है।

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अगर नीरव प्रत्यर्पण को चुनौती देता है, तो फैसले में एक साल से ज्यादा का वक्त लग सकता है। नीरव खुद भारत आकर न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होना चाहे तभी उसकी जल्द वापसी संभव है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि नीरव की गिरफ्तारी के बाद भारत की तरफ से दिए गए प्रत्यर्पण अनुरोध पर वहां की अदालत में बहस होगी। ब्रिटिश कानून के मुताबिक, अदालत सीधे तौर पर नीरव को प्रत्यर्पित करने का आदेश नहीं दे सकती।
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अदालत ब्रिटिश गृह मंत्रालय को यह आदेश देगी। इस आदेश को भी नीरव ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता है। इस फैसले में अमूमन लंबा वक्त लगता है। माल्या को प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया गया था, लेकिन उस पर लंबे समय से फैसला नहीं हो पाया है। हालांकि, नीरव के खिलाफ रेड कार्नर नोटिस और गैर जमानती वारंट भी है। लेकिन यह सिर्फ उसकी गिरफ्तारी में काम आया है। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया इससे अलग है।
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ब्रिटेन से प्रत्यर्पण का इतिहास अच्छा नहीं
ब्रिटेन से भारतीय आरोपियों के प्रत्यर्पण का इतिहास अच्छा नहीं है। दोनों देशों के बीच 1992 में प्रत्यर्पण संधि पर करार हुआ था। तब से सिर्फ एक गुजराती व्यापारी का ही ब्रिटेन से प्रत्यर्पण हो पाया है। वह भी इसलिए कि उस व्यापारी ने खुद भारत आकर न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसके अलावा करीब दो दर्जन प्रत्यर्पण के मामले वहां कि अदालतों में या तो लटके हुए हैं या उसे खारिज कर दिया गया है।


नवंबर, 2017 में लंदन की अदालत ने लंबी प्रक्रिया के बाद क्रिकेट सट्टेबाजी के मुख्य आरोपी संजीव चावला के प्रत्यर्पण की भारत की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके पीछे अदालत ने तिहाड़ जेल की खराब हालात का हवाला दिया था। माल्या ने भी भारतीय जेलों की खराब स्थिति को आधार बनाते हुए अपने प्रत्यर्पण का विरोध किया था। चावला की ही तरह लंदन की अदालत ने वित्तीय धोखाधड़ी मामले में जितेंद्र अंगुरती और उसकी पत्नी आशा रानी के प्रत्यर्पण को पिछले साल खारिज कर दिया था।

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