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Judiciary: वकील संगठनों ने की सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई पर भाजपा सांसद के बयान की निंदा, कार्रवाई की मांग

Tue, 22 Apr 2025 08:35 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 22 Apr 2025 08:35 PM IST
सार

Judiciary: एससीबीए और एससीएओआरए ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना पर की गई टिप्पणी की निंदा की है। दोनों वकील संगठनों ने इस बयान को कोर्ट की अवमानना बताया और सांसद के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। 

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Lawyers' bodies denounce BJP MP Nishikant Dubey’s statements criticising SC, CJI
निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

वकीलों की दो संस्थाओं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस (सीजेआई) संजीव खन्ना पर दिए बयान की निंदा की। एससीबीए ने सोमवार को पारित अपने प्रस्ताव में कहा, एससीबीए भाजपा सांसद दुबे के उस आपत्तिजनक और कार्रवाई योग्य बयान की निंदा करता है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि देश में होने वाले सभी गृहयुद्धों के लिए सीजेआई जिम्मेदार हैं। 

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एससीबीए के बयान के मुताबिक, भाजपा सांसद ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमाओं को लांघ रहा है और अगर हर बात के लिए बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े तो फिर संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए। इसमें आगे कहा गया, यह बयान ने केवल मानहानि वाला है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के जैसे भी है। यह सुप्रीम कोर्ट जैसे संस्थान और सीजेआई खन्ना जैसे व्यक्ति पर सीधा हमला है, जो किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। 
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इस प्रस्ताव पर एससीबीए के अध्यक्ष कपिल सिब्बल, सचिव विक्रांत यादव और अन्य ने हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्ताव में उम्मीद जताई गई है कि अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमणी उस याचिका को मंजूरी देंगे, जिसमें भाजपा सांसद के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई है, ताकि सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई की गरिमा की रक्षा की जा सके। 


वहीं, एससीएओआरए ने आज एक बयान में कहा, सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक, अपमानजनक और भड़काऊ भाषा का उपयोग करना, खासकर व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ के लिए, परी तरह अनुचित है। यह एक खतरनाक मिसाल कायम करता है और आम नागरिकों में कानून के शासन में भरोसे को कमजोर करता है। बयान में आगे कहा गया, हम सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह करते हैं कि वे संयम बरतें, सांविधानिक मूल्यों का पालन करें और न्यायपालिका की गरिमा का सम्मान करें। हम ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और नुकसानदायक बयानों के बीच सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के साथ एकजुटता से खड़े हैं। 

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बयान में यह भी कहा गया कि व्यक्ति किसी कोर्ट के किसी विशेष फैसले या आदेश से असहमति रख सकता है, लेकिन ऐसी असहमति को व्यक्त करने का तरीका गरिमा, सांविधानिक शिष्टाचार और कानूनी मर्यादाओं के भीतर ही होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सहमति दी कि वह अगले हफ्ते उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई की आलोचना को लेकर चिंता जताई गई है और सोशल मीडिया से आपत्तिजनक वीडियो हटाने की मांग की गई है।

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