सिख विरोधी दंगों में मौत की सजा से पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगी: फुल्का
1984 में हुए सिख विरोधी दंगों में पहली बार किसी अपराधी को सजा सुनाई गई। दिल्ली की निचली अदालत ने एक दोषी यशपाल सिंह को मौत की सजा सुनाई है जबकि इसी मामले के दूसरे आरोपी नरेश सहरावत को उम्रकैद की सजा दी है। पीड़ितों के दूसरे मामलों में वकील एचएस फुल्का ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि इससे पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने अमर उजाला से कहा कि इस बात को समझना चाहिये कि इसी मामले को दिल्ली पुलिस ने साक्ष्यों के अभाव में बंद कर दिया था। लेकिन इस मामले में जब 2015 में एसआईटी का गठन किया गया तब इस मामले में न्याय मिला। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि दिल्ली पुलिस ने जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को अब तक बचाए रखा था। लेकिन उन मामलों में भी अब सुनवाई अंतिम दौर में है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि उन मामलों में भी न्याय होगा।
बता दें कि दोनों दोषियों को दक्षिणी दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों में भागीदार होने के कारण सुनाई गई है। उस मामले की रिपोर्ट मृतक हरदेव सिंह के भाई संतोष सिंह ने लिखवाई थी। यशपाल और नरेश सहरावत पर हमलों की आशंका के मद्देनजर कोर्ट ने इस मामले पर सजा का एलान तिहाड़ जेल में ही किया। कोर्ट ने दोषियों पर 35-35 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।