संसद: देशभर की अदालतों में न्यायाधीशों के 5000 से ज्यादा पद खाली, कानून मंत्री मेघवाल ने सदन में दी जानकारी
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को संसद में प्रश्नकाल के दौरान एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। एक पूरक प्रश्न के जवाब में कानून मंत्री ने बताया कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 में नियुक्तियों का प्रावधान किया गया है।
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देश में सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतों तक न्यायाधीशों के 5,611 पद रिक्त हैं। इनमें सबसे कम सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के दो पद रिक्त हैं। शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों के स्वीकृत पद 34 हैं। इसके अलावा, 25 उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के 364 पद खाली हैं, जबकि उनकी स्वीकृत संख्या 1,114 है। इस क्रम में जिला न्यायालयों में सबसे ज्यादा 5,245 पद रिक्त हैं।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को संसद में प्रश्नकाल के दौरान एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। एक पूरक प्रश्न के जवाब में कानून मंत्री ने बताया कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के लिए संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 में नियुक्तियों का प्रावधान किया गया है। यहां पदों के खाली होने की वजह सेवानिवृत्ति, इस्तीफे, न्यायाधीशों की पदोन्नति और स्वीकृत संख्या में बदलाव होता है। इन्हें भरने के लिए त्वरित कार्यवाही जारी है, जबकि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में पदों को भरने की जिम्मेदारी न्यायालय और राज्य सरकार की होती है। इसके लिए सांविधानिक तौर पर राज्य सरकारों को संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से संविधान के अनुच्छेद 309 में और अनुच्छेद 233 और 234 में प्रावधान किए गए हैं। इसके अनुसार राज्य को अधिकार दिया गया है कि वह राज्य न्यायिक सेवा में नियुक्ति के लिए भर्ती के नियम बना सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जनवरी 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में एक विशेष समय सीमा तय की थी, जिसका पालन राजकीय, उच्च न्यायालयों द्वारा जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायाधीशों की भर्ती प्रक्रिया में किया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय न्यायिक सेवा को लेकर नहीं बन पाई आम सहमति
अखिल भारतीय न्यायिक सेवा को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री ने संसद को बताया कि मतभेद के कारण इस पर आम सहमति नहीं बन पाई है। 30 अप्रैल, 2022 को मुख्यमंत्रियों व उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के संयुक्त सम्मेलन के एजेंडे में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के मुद्दे को शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया था, पर इसे सम्मेलन के एजेंडे में शामिल नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि विभिन्न हितधारकों के बीच मतभेदों को देखते हुए अभी अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की स्थापना के प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं है।
जजों के तबादले पर कॉलेजियम की 5 सिफारिशें लंबित
एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में कानून मंत्री ने लोकसभा में बताया कि हाईकोर्ट के जजों के स्थानांतरण के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से की गई पांच सिफारिशें सरकार के पास छह महीने से अधिक समय से लंबित हैं।
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