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क्या है इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस, जिसने कुलभूषण पर सुनाया फैसला
Updated Thu, 18 May 2017 07:22 PM IST
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International Court of Justice
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जिस कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने फांसी की सजा दी थी, उस सजा पर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) पर अंतिम फैसले तक रोक लगा दी है। जानिए क्या है ICJ और इसकी ताकतें?
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत यूएन की अहम न्यायिक अंग है। अदालत उन कानूनी विवादों का निपटारा करती है, जो विभिन्न देश उसके पास लेकर जाते हैं। साथ ही कोर्ट मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को कानूनी राय देता है और संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों ओर से लाए गए कानूनी प्रश्नों के जवाब सुझाता है।
इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस को ‘वर्ल्ड कोर्ट’ भी कहा जाता है। इसकी स्थापना 1945 में हॉलैंड के शहर हेग में हुई थी। इसने 1946 से काम करना शुरू किया था। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है।
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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी अंतरराष्ट्रीय अदालत यूएन की अहम न्यायिक अंग है। अदालत उन कानूनी विवादों का निपटारा करती है, जो विभिन्न देश उसके पास लेकर जाते हैं। साथ ही कोर्ट मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को कानूनी राय देता है और संयुक्त राष्ट्र महासभा समेत अधिकृत संयुक्त राष्ट्र के अंगों ओर से लाए गए कानूनी प्रश्नों के जवाब सुझाता है।
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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस को ‘वर्ल्ड कोर्ट’ भी कहा जाता है। इसकी स्थापना 1945 में हॉलैंड के शहर हेग में हुई थी। इसने 1946 से काम करना शुरू किया था। इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस की भाषा अंग्रेजी और फ्रेंच है।
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आईसीजे बना कूटनीति का अखाड़ा
कुलभूषण जाधव
- फोटो : SELF
आईसीजे भारत-पाकिस्तान के बीच अपनी कूटनीतिक ताकत साबित करने का अखाड़ा बन चुका है। भारत ने कूलभूषण मामले में पाकिस्तान पर वियेना समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जबकि पाकिस्तान यह साबित करना चाहता है कि कुलभूषण जासूसी के मामले में गिरफ्तार किया गया। लिहाजा उस तक राजनयिक पहुंच की इजाजत नहीं दी जा सकती।
सिर्फ एक रुपये में हरीश साल्वे लड़ रहे हैं केस
अदालत में सिर्फ एक सुनवाई का दस से पंद्रह लाख रुपये लेने वाले हरीश साल्वे कुलभूषण मामले में आईसीजे में भारत का केस सिर्फ एक रुपये की टोकन फीस पर लड़ रहे हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसका खुलासा किया है। साल्वे सीए रह चुके हैं और टैक्स कानूनों के साथ-साथ उन्हें आपराधिक और संवैधानिक कानूनोें में भी महारत हासिल है। साल्वे अगर कुलभूषण का केस नहीं लड़ते तो यह मामला सरबजीत सिंह जैसा हो सकता था। सरबजीत को पाक ने जासूसी के आरोप में फांसी की सजा दी थी लेकिन जेल में कैदियों के हमले में उसकी मौत हो गई थी।
आईसीजे की सुनवाई का प्रसारण
सुनवाई का सीधा प्रसारण कोर्ट की वेबसाइट पर ऑन डिमांड वीडियो के तौर पर होता है। साथ ही यूएन की वेब टीवी पर भी इसे दिखाया जाता है। फोटो उसी दिन आईसीजे और यूएन फोटो वेबसाइटों पर अपलोड कर दिए जाते हैं। कोर्ट के ट्वीटर फीड पर भी यह उपलब्ध होते हैं। टीवी चैनलों के लिए हाई रेज्यूलेशन वीडियो भी मुहैया कराए जाते हैं। सुनवाई को यूएन की टेलीविजन प्रसारण सेवा भी कवर करती है।
सिर्फ एक रुपये में हरीश साल्वे लड़ रहे हैं केस
अदालत में सिर्फ एक सुनवाई का दस से पंद्रह लाख रुपये लेने वाले हरीश साल्वे कुलभूषण मामले में आईसीजे में भारत का केस सिर्फ एक रुपये की टोकन फीस पर लड़ रहे हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इसका खुलासा किया है। साल्वे सीए रह चुके हैं और टैक्स कानूनों के साथ-साथ उन्हें आपराधिक और संवैधानिक कानूनोें में भी महारत हासिल है। साल्वे अगर कुलभूषण का केस नहीं लड़ते तो यह मामला सरबजीत सिंह जैसा हो सकता था। सरबजीत को पाक ने जासूसी के आरोप में फांसी की सजा दी थी लेकिन जेल में कैदियों के हमले में उसकी मौत हो गई थी।
आईसीजे की सुनवाई का प्रसारण
सुनवाई का सीधा प्रसारण कोर्ट की वेबसाइट पर ऑन डिमांड वीडियो के तौर पर होता है। साथ ही यूएन की वेब टीवी पर भी इसे दिखाया जाता है। फोटो उसी दिन आईसीजे और यूएन फोटो वेबसाइटों पर अपलोड कर दिए जाते हैं। कोर्ट के ट्वीटर फीड पर भी यह उपलब्ध होते हैं। टीवी चैनलों के लिए हाई रेज्यूलेशन वीडियो भी मुहैया कराए जाते हैं। सुनवाई को यूएन की टेलीविजन प्रसारण सेवा भी कवर करती है।