{"_id":"5ff9b7b78ebc3e2e2c37c91d","slug":"kovid-19-does-not-leave-the-person-after-six-months-this-is-the-reason","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में भर्ती रहे शख्स का छह माह बाद भी पीछा नहीं छोड़ता कोविड-19, यह है वजह","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अस्पताल में भर्ती रहे शख्स का छह माह बाद भी पीछा नहीं छोड़ता कोविड-19, यह है वजह
Sat, 09 Jan 2021 07:33 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Sat, 09 Jan 2021 07:33 PM IST
विज्ञापन
corona, file photo
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक नए अध्ययन में यह बात उजागर हुई है कि कोविड-19 के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती रहे एक तिहाई से ज्यादा मरीजों में बीमार पड़ने के छह महीनों तक कम से कम एक लक्षण बना रहता है। 'लांसेट जर्नल' में यह अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
अनुसंधानकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए 1,733 मरीजों में संक्रमण से पड़ने वाले दीर्घकालिक असर का अध्ययन किया। अध्ययन में चीन के जिन यिन तान अस्पताल के अनुसंधानकर्ता शामिल थे और इन लोगों ने मरीजों में लक्षण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एक प्रश्नावली पर आमने सामने बात की।
63 फीसदी की हो गईं मांसपेशियां कमजोर
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार 63 फीसदी मरीजों में एक सामान्य दिक्कत मांसपेशियों में कमजोरी की थी। इनके अलावा 26 प्रतिशत लोगों को सोने में दिक्कत हो रही है। 23 प्रतिशत लोगों में बेचैनी और अवसाद के लक्षण पाए गए।
विज्ञापन
अंग क्षतिग्रस्त होने का संकेत
अध्ययन में यह भी बात सामने आई कि ऐसे मरीज जो अस्पताल में भर्ती थे और जिनकी हालत गंभीर थी, उनके सीने के चित्रों में फेफड़ों में गड़बड़ी पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि लक्षण दिखाई देने के छह माह बाद यह अंग के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हो सकता है।
‘चाइना-जापान फ्रेंडशिप हॉस्पिटल इन चाइना’ में नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी मेडिसिन में अध्ययन के सह-लेखक गिन काओ ने कहा,‘‘ हमारे विश्लेषण से संकेत मिलता है कि अधिकतर रोगियों में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी संक्रमण के कुछ प्रभाव रहते हैं, और यह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद काफी देखभाल किए जाने की जरूरत को रेखांकित करता हैं, खासतौर पर उन लोगों को जो काफी बीमार थे।’’
विज्ञापन
अनुसंधानकर्ताओं ने कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आए 1,733 मरीजों में संक्रमण से पड़ने वाले दीर्घकालिक असर का अध्ययन किया। अध्ययन में चीन के जिन यिन तान अस्पताल के अनुसंधानकर्ता शामिल थे और इन लोगों ने मरीजों में लक्षण और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए एक प्रश्नावली पर आमने सामने बात की।
विज्ञापन
63 फीसदी की हो गईं मांसपेशियां कमजोर
अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार 63 फीसदी मरीजों में एक सामान्य दिक्कत मांसपेशियों में कमजोरी की थी। इनके अलावा 26 प्रतिशत लोगों को सोने में दिक्कत हो रही है। 23 प्रतिशत लोगों में बेचैनी और अवसाद के लक्षण पाए गए।
विज्ञापन
अंग क्षतिग्रस्त होने का संकेत
अध्ययन में यह भी बात सामने आई कि ऐसे मरीज जो अस्पताल में भर्ती थे और जिनकी हालत गंभीर थी, उनके सीने के चित्रों में फेफड़ों में गड़बड़ी पाई गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि लक्षण दिखाई देने के छह माह बाद यह अंग के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हो सकता है।
‘चाइना-जापान फ्रेंडशिप हॉस्पिटल इन चाइना’ में नेशनल सेंटर फॉर रेस्पिरेटरी मेडिसिन में अध्ययन के सह-लेखक गिन काओ ने कहा,‘‘ हमारे विश्लेषण से संकेत मिलता है कि अधिकतर रोगियों में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी संक्रमण के कुछ प्रभाव रहते हैं, और यह अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद काफी देखभाल किए जाने की जरूरत को रेखांकित करता हैं, खासतौर पर उन लोगों को जो काफी बीमार थे।’’