महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने मंगलवार को 7 राज्यों में छापेमारी की। जिसके बाद माओवादियों से संपर्क रखने के संदेह में पांच वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जिन माओवादियों को गिरफ्तार किया गया उनके पास मिले दस्तावेजों में लोगों के नाम थे। चलिए आपको बताते हैं गिरफ्तार हुए इन पांच माओवादी शुभचिंतकों के बारे में-
सुधा भारद्वाज
सुधा भारद्वाज फरीदाबाद की रहने वाली हैं। वह दिल्ली की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। वह मानवाधिकार संगठन पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) में राष्ट्रीय सचिव हैं। इसके अलावा सुधा एक्टिविस्ट के तौर पर भूमि अधिग्रहण की नीतियों का भी विरोध करती रही हैं। आईआईटी से टॉपर होकर निकलने के बाद भी सुधा को करियर का आकर्षण बांधे नहीं रख सका और अपने वामपंथी रुझान के कारण वो 80 के दशक में छत्तीसगढ़ के यूनियन लीडर शंकर गुहा नियोगी के संपर्क में आयी और फिर उन्होंने छत्तीसगढ़ को अपना कार्यक्षेत्र बना लिया।
पी. वरवर राव
माओवादियों के पास से मिली चिट्ठियों में से एक में विभिन्न नक्सल गतिविधियों के लिए प्रतिष्ठित तेलूगू कवि वरवर राव के कथित मार्गदर्शन के लिए उनकी तारीफ की गई थी। इस चिट्ठी को एक माओवादी नेता ने लिखा है। 78 साल के राव एक लेखक और कवि हैं। ह्यूमन राइट्स और सिविल लिबर्टीज फ्रंट पर वह एक्टिव हैं। जिसके कारण उनका कई बार सरकारों से टकराव भी हो चुका है।
गौतम नवलखा
गौतम नवलखा छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित इलाकों में काम करने के लिए जाने जाते हैं। वह पेशे से पत्रकार हैं। इसके साथ ही वह पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स नाम के संगठन से भी जुड़े हैं।
अरुण परेरा
अरुण परेरा को पहली बार नागपुर पुलिस की एंटी-नक्सल सेल ने साल 2007 में गिरफ्तार किया था। उनपर करीब 10 मामले दर्ज हैं और वह पांच साल जेल में भी बिता चुके हैं। लेकिन उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया गया है। पुलिस अब सभी को ट्रांजिट रिमांड पर पेश करने की तैयारी कर रही है।