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Khabron Ke Khiladi: प्रियंका को लेकर राहुल की क्या है रणनीति? वायनाड या रायबरेली, पढ़ें सबसे सटीक विश्लेषण

Sat, 15 Jun 2024 05:10 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 15 Jun 2024 05:10 PM IST
सार

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी 2004 से 2019 तक अमेठी के सांसद थे। अमेठी संसदीय सीट से उन्हें 2019 में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। तब वह अमेठी के साथ ही केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़े थे। इस बार भी वह वायनाड और रायबरेली से चुनाव लड़े, दोनों ही जगह चुनाव जीते हैं। 

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Khatron Ke Khiladi Congress Strategy Priyanka and Rahul Gandhi Raebareli Wayanad Lok Sabha Seat
प्रियंका को लेकर राहुल की क्या है रणनीति? जानिए सियासी पंडितों की राय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि राहुल गांधी वायनाड बरकरार रखेंगे या मां की अमानत रायबरेली को तरजीह देंगे। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि राहुल जिस भी सीट को छोड़ने का मन बनाएंगे, वहां से अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा को उम्मीदवार बना सकते हैं। इन सभी अटकलों पर इस हफ्ते के 'खबरों के खिलाड़ी' में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, अवधेश कुमार, पूर्णिमा त्रिपाठी, रामकृपाल सिंह, समीर चौगांवकर और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
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समीर चौगांवकर
कांग्रेस पहले ही चाहती थी कि प्रियंका गांधी चुनाव लड़ें। मगर शायद वह तैयार नहीं थीं, इसलिए उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। राहुल गांधी कौन सी सीट अपने पास रखेंगे, इस पर संशय है। मगर जीत के बाद उन्हें राहत मिली। जितना मुझे लगता है वो रायबरेली में रहेंगे और वायनाड से इस्तीफा दे सकते हैं। मगर यहां से प्रियंका को नहीं उतारा जाएगा। शायद उन्हें उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया जाए। अब पार्टी को लग रहा है कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा सकता है। वहीं, केरल राहुल के लिए एक महत्वपूर्ण राज्य रहा है। साथ ही कर्नाटक भी उनके हित में रहा है। आगे हो सकता है कि प्रियंका को राज्यसभा में भेजा जाए।
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विनोद अग्निहोत्री
राहुल गांधी रायबरेली रखेंगे। उन्होंने किशोरी लाल को जिम्मेदारी दी थी कि रायबरेली को भी अमेठी की तरह देखें। इससे साफ होता है कि वह रायबरेली सीट पर बने रहेंगे और किशोरी लाल शर्मा उनके प्रतिनिधि के रूप में काम करेंगे। कांग्रेस नेता को बहुत मुश्किल से यूपी में पैर जमाने का मौका मिला है तो इस अवसर को वो छोड़ेगे नहीं और न ही उन्हें छोड़ना चाहिए। अमेठी के बाद राहुल वायनाड चले गए थे, तब सवाल उठने लगे थे कि उन्होंने यूपी क्यों छोड़ दिया, तो मुझे नहीं लगता कि वह यूपी छोड़ेंगे। 

वहीं, समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के साथ उनके संबंध बन गए हैं। अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव साथ में लड़ सकते हैं। यह लोग शायद साभार यात्रा निकाल सकते हैं। इन सबसे तो यही लगता है कि वह रायबरेली रखेंगे। राहुल के वायनाड को छोड़ने पर वहां के लोगों को जरूर धक्का लगेगा। इसलिए उस भावना को बनाए रखने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा को चुनाव लड़वाया जा सकता है। वहीं, अब परिवारवाद का आरोप भी कुछ खास असर करता नहीं है। वह यूपी का प्रभार नहीं संभालेंगी क्योंकि वह पहले ही वहां की हालत देख चुकी हैं। 

अनुराग वर्मा
गांधी का सरनेम ही किसी सांसद या पीएम से बड़ा है। हालांकि, रायबरेली और वायनाड को लेकर संशय बना हुआ है। यह आसान नहीं होगा। रायबरेली में अखिलेश यादव के साथ काम करना पड़ेगा। केरल में उनकी खुद की एक पहचान है। राहुल के बयान पर गौर करने वाली बात है तो वो सोच समझकर नहीं बोलते हैं। उनके हर बयान का मजाक बनता है। दुर्भाग्य है कि मतदाता अपने वोट के महत्व को कम आंकता है।  क्या कांग्रेस परिवारवाद से बाहर आ सकती है? आज पार्टी कहां से कहां पहुंच गई, लेकिन हम लोग इंदिरा, नेहरू से बाहर निकलकर बात नहीं करते हैं। इसी का नतीजा है कि अमेठी में रॉबर्ट वाड्रा के पोस्टर लगे कि हमें रॉबर्ट चाहिए। यह समय दूर नहीं है, जब प्रियंका गांधी के बच्चे मारिया और रियान के पोस्टर भी लगे होंगे। कांग्रेस यह न समझे कि पूरे लोकतंत्र ने उसे स्वीकार कर लिया है। कहीं न कहीं राहुल को परिवार के बाहर अपना कैडर बनाना होगा।

पूर्णिमा त्रिपाठी
मुझे राहुल के मन की बात नहीं पता है। पर अगर हम राजनीति पर गौर करें तो उन्हें वायनाड की सीट बनाए रखना चाहिए। वायनाड में लोगों का उनसे इमोशनल कनेक्ट है।अगर वो सोच रहे हैं कि किसी को भी यहां से खड़ा कर देंगे और जीत जाएंगे तो यह आसान नहीं होगा। रायबरेली अगर वो छोड़ते हैं तो प्रियंका को मैदान में उतार सकते हैं। उन्हें यूपी में सुधार करने की जरूरत है। उन्हें सपा की जरूरत पड़ेगी। प्रियंका और अखिलेश की अच्छी बातचीत है। 


अवधेश कुमार
प्रियंका कहीं से भी लड़ें क्या ही फर्क पड़ता है। हालांकि, उत्तर प्रदेश का सवाल है तो क्या होता है कि कभी कभी जो है, जब सत्ता पर सफलता दिखाई देती है या मूल्याकंन किया जाता है, जिससे कोई सहमत नहीं होता है। इस बार का ऐसा चुनाव है, जिससे सभी पक्ष खुश हैं। अब सवाल उठता है कि क्या समाजवादी पार्टी साथ नहीं होती तो कांग्रेस को इतना फायदा होता? सपा ने खूब मेहनत की और मुस्लिमों ने सोचा होगा कि भाजपा को हराना है तो वोट देना पड़ेगा। वोट जिहाद करके राहुल जीते हैं। जेल में बंद अमृपाल तक जीत गया। कांग्रेस ने किसी राज्य की पार्टी को आज तक जगह क्यों नहीं दी। कांग्रेस से सवाल होना चाहिए कि प्रियंका को चुनाव क्यों नहीं लड़वाया। अगर राहुल इस्तीफा देते हैं तो क्या गांरटी है कि प्रियंका को चुनाव लड़वाएंगे। राहुल वायनाड या रायबरेली में से किसे चुनेंगे? इसका जवाब जानने से पहले कांग्रेस से जानना जरूरी है कि वो प्रियंका को चुनाव में उतारेंगे भी या नहीं। 

रामकृपाल सिंह
देश में कांग्रेस एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है, जो भाजपा को टक्कर दे सकती है। मुझे लगता है कि राहुल वायनाड नहीं छोड़ेंगे। रायबरेली अगर छोड़ते हैं तो प्रियंका जीत सकती हैं। राष्ट्रीय राजनीति को देखते हुए राहुल गांधी को वायनाड नहीं छोड़ना चाहिए। सबसे ज्यादा फोकस परिवारवाद पर है। राहुल का बयान देखो। वे कहते है कि अगर प्रियंका बनारस से खड़ी होतीं तो कभी नहीं हारती, तो क्या अजय राय गए गुजरे हैं। पार्टी को सोचना चाहिए कि वे तिहाई के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई। कांग्रेस को लंबा लक्ष्य रखना चाहिए। वहीं, अगर राहुल विपक्ष का नेता नहीं बनते हैं तो समझदारी होगी। जिम्मेदारियों में बंधने से अच्छा है कि खुलकर काम करें।
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