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Khabron Ke Khiladi: क्यों पार्टी छोड़ रहे हैं कांग्रेस के बड़े नेता? असली कहानी बता रहे ‘खबरों के खिलाड़ी’

Sat, 06 Apr 2024 08:58 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Sat, 06 Apr 2024 08:58 PM IST
सार

जैसे जैसे चुनावों का समय नजदीक आता जा रहा है नेता एक दल से दूसरे दलोें में जा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को लेकर भी लगभग यही स्थिति है। हाल ही में उसके कई बड़े नेता भाजपा में शामिल हो गए। 

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Khabron Ke Khiladi: Why big Congress leaders leaving party Know real story
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चुनाव का मौसम है। नेताओं का दलबदल जारी है। बीते हफ्ते भी कई नेताओं का हृदय परिवर्तन हुआ। इनमें कांग्रेस पार्टी के नेताओं की संख्या ज्यादा रही। बॉक्सर विजेंदर सिंह से लेकर कांग्रेस के प्रवक्ता गौरव वल्लभ तक ने पार्टी छोड़ दी। पार्टी छोड़ने के साथ इन नेताओं ने पार्टी संगठन पर कई तरह से आरोप लगाए। इस हफ्ते के ‘खबरों के खिलाड़ी में इसी मुद्दे पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, अवधेश कुमार, अनुराग वर्मा और राकेश शुक्ला मौजूद रहे। 
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विनोद अग्निहोत्री: राम और सनातन के विरोध में अगर पार्टी छोड़नी होती तो ये नेता पहले ही पार्टी छोड़ देते। यह सिर्फ बहानेबाजी है। कारण कुछ और होते हैं। ये कारण छिपे होते हैं। जो सामने नहीं आते। भाजपा के जो नेता बीते हफ्ते पार्टी छोड़कर कांग्रेस में आए, उन्हें भाजपा में बुराई नजर आने लगी। इसी तरह जो नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं, उन्हें कांग्रेस में बुराई नजर आने लगी है। असल कारण कुछ और होते हैं। ये जरूर है कि कांग्रेस के नेताओं की संख्या ज्यादा है। जो पार्टी छोड़ रहे हैं। वैचारिक प्रतिबद्धता जिनकी नहीं रही, एक वो पार्टी छोड़कर जाते हैं। दूसरे वो जिन्हें लगता है कि अब पार्टी में कुछ नहीं मिल सकता है तो वो पार्टी छोड़ देते हैं। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी आलाकमान अनदेखी करता है। जो राम और सनातन को कारण बता रहे हैं, उन्हें असल कारण बताना चाहिए। 
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अवधेश कुमार: जब कोई नेता पार्टी छोड़ता है, उस वक्त उनके द्वारा दिए गए वक्तव्य को ही सही नहीं मान लेना चाहिए। जो लोग पार्टी छोड़ रहे हैं, उनके बारे में मैं बहुत कुछ नहीं बोलूंगा, लेकिन उन्होंने जो कारण बताए हैं, क्या वो इस समय कांग्रेस के अंदर असंतोष का सबसे बड़ा कारण नहीं है? अर्जुन मोढवाडिया से शुरू हुआ सिलसिला आज तक चल रहा है। सबसे बड़ा विद्रोह मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कर दिया था। जो वहां (राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में) गए। संजय निरुपम ने पार्टी छोड़ते समय एक महत्वपूर्ण बात कही है। कांग्रेस इसको भले स्वीकार नहीं करे। 

समीर चौगांवकर: कांग्रेस में पावर सेंटर की बात कोई पहली बार नहीं हो रही है। जवाहरलाल नेहरू जब प्रधानमंत्री बने, तब से ही इस तरह से सवाल उठते रहे। इंदिरा गांधी के समय को देखिए, उन्होंने खुद प्रधानमंत्री रहते हुए पार्टी छोड़ी, लेकिन नेहरू और इंदिरा इतनी ताकतवर स्थिति में रहे कि उनके विरोध में पार्टी छोड़ने वाले नेताओं से पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। सोनिया गांधी की सक्रियता कम होने के बाद राहुल गांधी अध्यक्ष बने। वो उम्मीदें पूरी नहीं कर सके। इसके बाद खरगे अध्यक्ष बने। प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने  के बाद उनका भी एक पावर सेंटर बना। केसी वेणुगोपाल का भी एक पावर सेंटर है। बड़े स्तर पर खींचतान हो रही है। एक बड़ा वर्ग ऐसा भी होता है, जो सत्ता के पीछे भी जाता है। वो वर्ग जल्दी पार्टी को छोड़ता है। 

अनुराग वर्मा: मुझे लगता है कि ये कांग्रेस ज्यादा बदल गई। जिसे इतना बदलने का जरूरत नहीं थी। अगर मूल रूप में रहती तो शायद ज्यादा बेहतर होती। यूपीए-2 के समय से पार्टी में ये काम किया जाने लगा कि अब राहुल पार्टी की कमान संभालेंगे। शुरू में राहुल ने बहुत आक्रामकता से काम भी किया। इसके बाद एक कोटरी राहुल की, एक सोनिया की बन गई। राहुल ने बहुत से पुराने चेहरे हटा दिए। लेकिन, नए चेहरे खड़े नहीं कर सके।
 
राहुल गांधी की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि आप जो नई विचारधारा लेकर आए वो लेफ्ट की विचारधारा से ज्यादा प्रभावित थी। विदेशी मंचों पर राहुल के बयान उनकी बड़ी गलती थी। दूसरा जब सर्जिकल स्ट्राइक हुई, उस वक्त के स्टैंड से भी उन्हें नुकसान हुआ। तीसरा चीन के मामले में भी जो बात बंद दरवाजे में होनी चाहिए थी, उसे आप विदेशी मंचों में उठा रहे हैं।  


राकेश शुक्ला: स्वार्थ और संभावना पर केंद्रित राजनीति में नेता नए ठिकाने तलाशता ही है। कांग्रेस अवसर के हिसाब से राजनीति करती रही है। समाजनीति के नीचे होने और राजनीति के ऊपर होने के बाद कांग्रेस की स्थिति कमजोर होती गई। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला। जब आलाकमान की रस्साकशी की वजह से इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई।

अस्वीकरण: 'खबरों के खिलाड़ी' डिजिटल मीडिया के सबसे लोकप्रिय कार्यक्रमों में से एक है। इसमें शामिल होने वाले अतिथि वक्ता विषय  विशेषज्ञ या विश्लेषक के तौर पर अपनी राय रखते हैं। चर्चा के दौरान उनकी कही बातें उनके स्वतंत्र विचारों पर आधारित होती हैं। इन विचारों को या इनके किसी हिस्से को संदर्भ से काटकर प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
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