Khabaron Ke Khiladi: पश्चिम एशिया संकट का हम पर कितना असर, सरकार की क्या तैयारी? बता रहे हैं खबरों के खिलाड़ी
पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर दुनियाभर में दिखाई देने लगा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। इस संकट में हमारी क्या तैयारी है? आने वाले दिनों में संकट कितना बड़ा हो सकता है? ऐसी ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर दुनियाभर में दिखाई देने लगा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। अभी हमारी ऊर्जा सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लग रहा है, संकट जारी रहा तो आने वाले महीनों में खद्यान सुरक्षा पर भी प्रश्न चिह्न लगेगा। हमारी क्या तैयारी है? आने वाले दिनों में संकट कितना बड़ा हो सकता है? विपक्ष के आरोपों में कितना दम है और सत्ता पक्ष क्या तैयारी कर रहा है? ऐसी ही सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पूर्णिमा त्रिपाठी, राकेश शुक्ल और अनुराग वर्मा मौजूद रहे।
पूर्णिमा त्रिपाठी: विपक्ष का काम सरकार पर सवाल उठाना है। सरकार ने अब तक जो भी कदम उठाएं हैं, वो एक स्वागत योग्य कदम हैं। विपक्ष की परेशानी शायद इस बात से है कि उनसे थोड़ी देर से राय ली गई है। सिलिंडर रिफिल मिलने में लोगों को दिक्कत आ रही है। कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लाइनें भी दिख रही हैं। दूसरा अगर हम रूस या ईरान से तेल लेते थे, अगर हमने उसे खरीदना बंद नहीं किया होता तो हमारे पास पर्याप्त भंडारण होता।
रामकृपाल सिंह: आज की जो स्थिति है, अगर हम उसका आकलन करें तो हम तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में हैं। वैश्विक संकट है, इसका असर सभी पर आएगा। अगर पेट्रोल की कीमतें हमारे यहां नहीं बढ़ीं, दूसरे देशों में बढ़ गईं। संकट निश्चित तौर पर है, आगे की स्थितियां पल-पल इतनी बदल रही हैं कि किसी को कुछ पता नहीं है। इस संकट ने बताया है कि कोई किसी का नहीं है। भारत की स्थिति पूरी दुनिया में हम किसी देश से पीछे नहीं हैं।
राकेश शुक्ल: सरकार की तरफ से शुरू में कहा गया है कि हमारे पास 67 दिन का रिजर्व है। 27 दिन का अगर खत्म हो गया तो भी 50 दिन का रिजर्व होना चाहिए। इसके साथ हमारे यहां हर रोज तेल आ भी रहा है। इस संकट में भी होर्मुज से भारत के टैंकर निकल पा रहे हैं तो क्या इसे एक उपलब्धि नहीं मानी जानी चाहिए। आने वाले दिनों में महंगाई आएगी। इसमें कोई दो राय नहीं है। हमें इसके लिए इंतजाम करना होगा।
अनुराग वर्मा: प्रधानमंत्री ने कोविड की बात इसलिए कही क्योंकि जिस तरह उस वक्त केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया था उस तरह से काम करने की आवश्यकता है। राजनीति सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों कर रहे हैं। दोनों ही पक्षों की ओर से सियासत तो की ही जाएगी कोई यहां संन्यास लेने के लिए नहीं आया है। पैनिक बाइंग कहीं से भी ठीक नहीं है। इसको कंट्रोल करने की आवश्यकता है।
विनोद अग्निहोत्री: ये तो तय है कि कुछ जगहों पर दिक्कत है और कुछ जगहों पर दिक्कत नहीं है। जहां डिलिवरी देर से पहुंच रही है वहां शॉर्टेज भी है। ये स्वाभाविक है। जब दुनिया में संकट है, शॉर्टेज है तभी तो सरकार ने कई कदम उठाए हैं। अगर ये शॉर्टेज नहीं होती तो इन कदमों को उठाने की जरूरत कहां थी। विपक्ष को लेकर हम बहुत ज्यादा निर्मम हो जाते हैं। विपक्ष के दबाव में कई बार सरकारें कदम उठाती हैं। विपक्ष जब सवाल उठाता है तो कहीं न कहीं सराकर उसके हिसाब से फैसले लेती है।
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