केरल विधानसभा में सीएए को रद्द करने की मांग का प्रस्ताव पारित, डीएमके ने पलानीस्वामी से की अपील
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केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने राज्य विधानसभा में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ मंगलवार को एक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सीएए को वापस लेने की मांग की। यह प्रस्ताव पास हो गया है। प्रस्ताव को पेश करते हुए विजयन ने कहा कि सीएए धर्मनिरपेक्ष नजरिए और देश के ताने बाने के खिलाफ है तथा इसमें नागरिकता देने में धर्म के आधार पर भेदभाव होगा। उन्होंने कहा, 'यह कानून संविधान के आधारभूत मूल्यों और सिद्धांतों के विरोधाभासी है।'
Thiruvananthapuram: Kerala Assembly passes resolution demanding withdrawal of the #CitizenshipAmendmentAct. pic.twitter.com/xMvCZeBgVp
— ANI (@ANI) December 31, 2019विज्ञापन
विधानसभा में केरल के मुख्यमंत्री ने कहा, 'केरल में धर्मनिरपेक्षता, यूनानियों, रोमन, अरबों का एक लंबा इतिहास रहा है। हर कोई हमारी भूमि पर पहुंचा है। ईसाई और मुस्लिम शुरुआत में केरल पहुंच गए थे। हमारी परंपरा समावेशिता की है। हमारी विधानसभा को इस परंपरा को जीवित रखने की आवश्यकता है।' विजयन ने विधानसभा को यह भी आश्वासन दिया कि इस दक्षिणी राज्य में कोई हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) नहीं खोला जाएगा।
सीपीआई (एम) के विधायक जेम्स मैथ्यू ने मुख्यमंत्री के विधानसभा में पेश किए प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस के वीडी सतीशन ने भी सीएए के खिलाफ मुख्यमंत्री द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'एनआरसी और सीएए एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सीएए साफतौर पर सिवंधान के अनुच्छेद 13,14 और 15 का उल्लंघन है।'
सीपीआई के सी दिवाकरन ने प्रस्ताव के समर्थन में कहा, 'विधानसभा को यह प्रस्ताव पेश करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। भारत में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जैसे कि पहले कभी नहीं देखे गए। इस प्रस्ताव को पास करके विधानसभा दुनिया को एक संदोश देना चाहती है।'
सत्र शुरू होते हुए विधानसभा में भाजपा के इकलौते विधायक ओ राजगोपाल ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह गैरकानूनी है क्योंकि संसद के दोनों सदनों ने सीएए कानून को पारित कर दिया है।
डीएमके ने केरल का किया समर्थन, कहा अनुकरण करे सरकार
केरल विधानसभा में नागरिकता संशोधन अधिनियम को खत्म करने के प्रस्ताव को तमिलनाडु की विपक्षी पार्टी डीएमके ने समर्थन किया है। डीएमके ने मंगलवार को सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक से कहा कि तमिलनाडु सरकार केरल का अनुकरण करे और संविधान की रक्षा के लिए विवादास्पद कानून के खिलाफ तमिलनाडु विधानमंडल में इसी तरह का कदम उठाए।
डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन ने कहा कि केरल का कदम स्वागत योग्य है। डीएमके प्रमुख ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा, इस देश के लोगों की इच्छा है कि हर राज्य विधानसभा को संविधान की बुनियादी विशेषताओं की रक्षा के लिए ऐसा संकल्प अपनाना चाहिए।
स्टालिन ने मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी से छह जनवरी को जब सदन का नए साल में पहला सत्र शुरू होगा, तमिलनाडु विधानसभा में इसी तरह के प्रस्ताव लाने का आग्रह किया है।
बता दें कि अन्नाद्रमुक ने संसद में नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन किया है और मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी इसका समर्थन कर रहे हैं। साथ ही लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे सीएए के बारे में फैलाई जा रही अफवाहों पर विश्वास न करें।