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केरल: मदरसा शिक्षक हत्या मामला, कोर्ट ने तीन आरएसएस कार्यकर्ताओं को किया रिहा, सात साल से जेल में थे बंद

Sun, 31 Mar 2024 05:12 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि Published by: जलज मिश्रा Updated Sun, 31 Mar 2024 05:12 AM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि मृतक ने किन-किन लोगों से बात की। उन्होंने एक अच्छा मौका गंवा दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की चुप्पी ही तीनों व्यक्तियों पर लगे आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त है।

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Kerala Madrasa teacher murder case court releases three RSS workers jailed for seven years
Court Room - फोटो : Social Media

विस्तार

केरल की एक अदालत ने मदरसा शिक्षक की हत्या से जुड़े एक मामले में तीन आरएसएस कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया। तीनों आरोपियों ने बिना जमानत के सात साल जेल में बिताएं हैं। कासरगोड प्रधान सत्र न्यायालय के न्यायाधीश केके बालाकृष्णन ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपियों की मुस्लिम समुदाय से किसी तरह की दुश्मनी थी। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष यह भी साबित नहीं कर पाए कि आरोपी का आरएसएस से किसी भी तरह का संबंध रहा है 

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अब जानिए, क्या है पूरा मामला
मामला 2017 का है। आरोप है कि तीन आरएसएस कार्यकर्ताओं- अखिलेश, निधिन और अजेश ने चुरी की मुहयुद्दीन जुमा मस्जिद के अंदर मुअज्जिन मोहम्मद रियास मौलवी (34) और चूरी के मदरसा शिक्षक की हत्या कर दी थी। तीनों पर कथित तौर पर आरोप है कि उन्होंने मौलवी का गला काट दिया था।

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अभियोजन पक्ष की चुप्पी ही तीनों व्यक्तियों पर लगे आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त  
अदालत ने अपने आदेश में आगे कहा कि आरोपियों और अभियोजन पक्ष के गवाहों से जब्त किए गए फोन से भी कुछ भी उपयोगी नहीं मिला। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि मृतक ने किन-किन लोगों से बात की। उन्होंने एक अच्छा मौका गंवा दिया। इस मामले में अभियोजन पक्ष की चुप्पी ही तीनों व्यक्तियों पर लगे आरोपों को खारिज करने के लिए पर्याप्त है। सबूतों और गवाहों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जांच मानकों के अनुसार ही हुई है। अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि पीड़ित की हत्या इन्हीं आरोपियों ने ही की थी। अदालत ने कहा कि उनपर आरोप साबित नहीं हुए इसलिए तीनों इन अपराधों के लिए दोषी नहीं हैं। 

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अभियोजन पक्ष ने जताई आपत्ति
अभियोजन पक्ष ने फैसले पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे आदेश के खिलाफ अपील करेंगे। अभियोजकों ने कहा कि मामले में मजबूत सबूत पेश किए गए थे। एक आरोपी के कपड़ों पर मौलवी का खून भी मिला था। चाकू पर भी मौलवी के कपड़े का एक टुकड़ा मिला था। हमने सभी सबूत जमा कर दिए थे। मौलवी की पत्नी अदालत में ही मीडिया के सामने रो पड़ीं और कहा कि आदेश निराशाजनक हैं। मौलवी के परिवारों के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने मामले में इस तरह के फैसले की कभी उम्मीद नहीं की थी। बता दें, अदालत ने मामले में 97 गवाहों, 215 दस्तावेजों और 45 भौतिक साक्ष्यों की जांच की है। 

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