Kerala: केरल में निजी विश्वविद्यालयों के संचालन का रास्ता साफ, विपक्ष की चिंताओं के बावजूद पारित हुआ विधेयक
केरल विधानसभा में राज्य सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बावजूद आज निजी विश्वविद्यालय विधेयक को पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने के साथ ही राज्य में निजी विश्वविद्यालयों के संचालन का रास्ता साफ हो गया। इससे पहले विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सदन में अपनी चिंताएं व्यक्त की।
विस्तार
विपक्ष की चिंताओं के बावजूद विधेयक पारित
हालांकि, दूसरी ओर विपक्षी दलों ने फीस संरचना और प्रवेश नीतियों के बारे में अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। विपक्ष ने विधेयक को पूरी तरह से खारिज नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसके कुछ पहलुओं पर गंभीर आपत्तियां जाहिर की। इसके बावजूद स्पीकर ए.एन. शमसीर ने विधेयक को पारित कर दिया, जिसके बाद अब विधेयक को कानून बनने से पहले राज्यपाल की मंजूरी की आवश्यकता होगी।
ये भी पढ़ें:- TMC: कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज चौहान को कहा 'अमीरों का दलाल', बीजेपी ने की माफी की मांग
वीडी सतीशन ने विधेयक पर जताई चिंता
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने निजी विश्वविद्यालय विधेयक पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनका दल विधेयक का पूरी तरह से विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन यह जरूरी है कि यह अध्ययन किया जाए कि निजी विश्वविद्यालयों के आने से सार्वजनिक विश्वविद्यालयों पर क्या असर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन कॉर्पोरेट शिक्षा एजेंसियों ने केरल के शिक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन्हें निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का अवसर मिले। साथ ही सतीशन ने कहा कि राज्य को सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को प्राथमिकता देनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी संस्थान बिना किसी जवाबदेही के काम न करें।
ये भी पढ़ें:- Maharashtra: 'पानीपत की तीसरी लड़ाई मराठाओं की हार नहीं, बल्कि वीरता की प्रतीक', विधानसभा में बोले फडणवीस
कांग्रेस नेता ने राज्य में छात्रों के पलायन पर दिया जोर
इसके साथ ही कांग्रेस नेता रमेश चेन्निथला ने केरल में छात्रों के पलायन की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नया निजी विश्वविद्यालय विधेयक इस प्रवृत्ति को रोकने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि केरल में छात्रों का पलायन बड़े पैमाने पर हो रहा है। ये एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि विधेयक लागू करने से पहले इसका बड़े पैमाने पर अध्ययन किया जाना चाहिए। साथ ही कांग्रेस नेताओं ने विधेयक पर आगे की जांच की मांग की, जबकि क्रांतिकारी मार्क्सवादी पार्टी (आरएमपी) के विधायक के.के. रेमा ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसे पूरी तरह से वापस लेने की मांग की।