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'स्वच्छता दिवस' पर सरकार के फरमान से टेंशन में आए केंद्रीय विद्यालय, फंड जुटाना पड़ रहा भारी

Mon, 30 Sep 2019 08:55 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 30 Sep 2019 08:55 PM IST
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kendriya vidyalaya sangathan issued circulars to arrange funds on Mahatma gandhi swachhata abhiyan
Swachhata Mission in Parliament - फोटो : PTI
महात्मा गांधी की जयंती 02 अक्टूबर को केंद्र सरकार स्वच्छता दिवस के रूप में मनाती है। 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने खुद पहल करके इस अभियान को वरीयता दी थी। इस वर्ष भी केंद्र सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती को स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत मना रही है। इसके बाबत केंद्रीय विद्यालय संगठन ने देश भर के केंद्रीय विद्यालयों को स्वच्छता कार्यक्रम का सर्कुलर भेजा है। इस सर्कुलर में इस तरह के कार्यक्रम के लिए विद्यालयों से अपने स्तर पर फंड जुटाने के लिए कहा गया है।
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नई परेशानी का सबब

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने विद्यालयों से कहा है कि वह स्थानीय स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम के लिए दान-दाताओं से अनुदान ले सकते हैं। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल का कहना है कि विद्यालयों के लिए यह एक नई परेशानी का सबब है। आखिर इसके लिए विद्यालय कहां से फंड जुटाएं? एक अन्य विद्यालय की प्रिंसिपल का कहना है कि वह हाल में विद्यालय में स्थानांतरित होकर आई हैं। उनके लिए स्वच्छता कार्यक्रम के लिए फंड जुटाना बड़ी समस्या है।

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विद्यालय के रूल एंड रेगुलेशन के हिसाब से वह इसका बोझ अध्यापकों पर भी नहीं डाल सकती। वहीं 02 अक्टूबर को मनाया जाने वाला स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम महज दो दिन दूर है।

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फंड की कोई व्यवस्था नहीं

केंद्रीय विद्यालय के प्रिंसिपल का कहना है कि आए दिन केंद्रीय विद्यालय संगठन से कार्यक्रम के सर्कुलर आ रहे हैं, लेकिन इसे केंद्र में रखकर फंड (वित्तीय सहायता) का कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। केंद्रीय विद्यालय संगठन चाहता है कि इस तरह के कार्यक्रमों के लिए विद्यालय अपने स्तर पर समाज सेवा करने वाले लोगों की तलाश करे और उनसे अनुदान लेकर कार्यक्रम पूरा कराएं। विद्यालय स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम को विद्यार्थियों के माध्यम से पूरा कराते हैं।


इस दिन विद्यार्थियों को स्वच्छता का महत्व और उसके प्रति नागरिकों के कर्तव्य भी बताए जाते हैं। बताते हैं स्वच्छता कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को झाड़ू, डस्टबिन, डस्टर (कपड़ा), ग्लब्स, चेहरे पर लगाने के लिए मास्क (ताकि धूल या इंफेक्शन से बचाव हो) आदि विद्यालय उपलब्ध कराता है।

कहां से हो फंड का प्रबंध

विद्यालय प्रशासन की परेशानी यह है कि इसके लिए आखिर फंड कहां से लाएं। दिल्ली में एक केंद्रीय विद्यालय में औसतन पांच से सात हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। इस तरह से स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम मनाने के लिए पांच-पांच के समूह में छात्र-छात्राओं को बांटने के बाद भी विद्यालय को यह समझ में नहीं आ रहा है कि हजारों रुपये के खर्च का प्रबंध कैसे हो।

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