Kathua Encounter: कमांडो वाला कॉम्बैट चाकू लेकर आए थे आतंकी, इस खास हैंडसेट से पाक के हैंडलर से करते थे संपर्क
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विस्तार
पिछले दिनों जम्मू में हुए तीन दिन में तीन आतंकी हमलों को लेकर पाकिस्तान की बड़ी साजिश सामने आ रही है। रियासी, कठुआ और डोडा में लगातार तीन आतंकी हमले हुए। इनमें कठुआ में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के बाद आतंकियों से जो हथियार और सामान बरामद हुआ है, उससे साबित होता है कि वह बड़ी तैयारी के साथ और लंबा टिकने के मकसद से आए थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने बॉर्डर क्रास किया, सुरक्षा बलों ने उनकी लाइफ स्पैन कम कर दी। आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बनीं दवाईयों के अलावा स्टील कोर बुलेट, अमेरिकी एम4 कार्बाइन और चीनी हैंड ग्रेनेड बरामद हुए हैं। वहीं पाकिस्तान में बैठे आकाओं से संपर्क में रहने के लिए आतंकी पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्मित फोन इस्तेमाल कर रहे थे।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
कठुआ जिले में हीरानगर स्थित सैदा सुखल गांव में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए आतंकी के पास से जो सामान बरामद हुआ है, उसने एक बार फिर आतंक पर पाकिस्तान का चेहरा बेनकाब कर दिया है। मारे गए आतंकी के पास से भारी मात्रा में हथियार और एक लाख रुपये मिले हैं। आतंकी के पास से सुरक्षाबलों ने अमेरिकी एम4 कार्बाइन, टाइप एके-56 एसाल्ट राइफल, 6 एके-56 मैगजीन, एम4 के लिए 7 स्टैगनैग मैगजीन, 75 राउंड का एक पॉलिथीन बैग, 6 ग्रेनेड, एटीएन थर्मल नाइट विजन स्कोप, पाकिस्तान में बनी चॉकलेट, सूखा चना, चपाती, पाकिस्तान में बनी दवाई, पेन किलर इंजेक्शन, 1 सिरिंज, A4 बैटरी और 1 हैंडसेट बरामद किया है। इसके अलावा दो कॉम्बैट चाकू भी बरामद हुए हैं।
कमांडो यूज करते हैं ऐसा चाकू
सुरक्षा मामलों के जानकार विक्रमजीत सिंह का कहना है कि ये चाकू कॉम्बैट कैटेगरी के हैं, जो सिर काटने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पाकिस्तानी सेना की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) इनका इस्तेमाल करती है। वह कहते हैं कि आतंकियों की पूरी प्लानिंग थी, कि वे हेड हंटिंग में इसका इस्तेमाल करेंगे। ऐसा बहुत की कम देखने को मिलता है कि जब आतंकी इस तरह के चाकू का इस्तेमाल करते देखे गए हैं। क्योंकि इसे चलाने के लिए बेहद कुशलता चाहिए। इससे साबित होता है कि आतंकियों को पाकिस्तानी सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) तरफ से ट्रेनिंग दी गई है। कमांडो ट्रेनिंग में ही इस तरह के चाकू का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है। इस चाकू को रखने का मकसद यही हो सकता है कि गोला बारूद खत्म होने या कम होने की सूरत में कॉम्बैट चाकू का इस्तेमाल किया जा सके।
आतंकियों ने की फार्मेसिस्ट की गला रेत कर हत्या
इस बात के संकेत इससे भी मिलते हैं कि कठुआ में मुठभेड़ से दो दिन पहले वहां से पांच किमी दूर मेला गांव में एक फार्मेसिस्ट अमरजीत शर्मा का शव मिला था। जिसका गला काटा हुआ था। सूत्र बताते हैं कि शुरुआती में यह सांप्रदायिक हिंसा का मामला लगा। लेकिन चाकू मिलने के बाद यह पुख्ता हो गया है कि आतंकियों के इन्ही ग्रुप ने उसकी गला रेत कर हत्या की है।
एनक्रिप्टेड रेडियो हैंडसेट हुआ बरामद
इसके अलावा आतंकियों के पास से एक एनक्रिप्टेड रेडियो हैंडसेट बरामद हुआ है, इस हैंडसेट का इस्तेमाल पाकिस्तानी सेना करती है। सूत्र बताते हैं कि आतंकी इसी रेडियो हैंडसेट के जरिए पाकिस्तान में बैठे आकाओं के संपर्क में थे और उन्हें पाकिस्तानी मिलिट्री की तरफ से पूरा सहयोग मिल रहा है। आतंकियों के पास से जो एनक्रिप्टेड रेडियो हैंडसेट बरामद हुआ है वह टू वे डिजिटल मोबाइल रेडियो है और यह सेना में यूज होता है। इसका मॉडल नंबर MPD 2505 है, जिसे पाकिस्तान की कंपनी माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक्स इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड बनाती है।
लाहौर कैंट के अंदर है रेडियो हैंडसेट की फैक्टरी
सेना से रिटायर्ड मेजर मानिक जॉली के मुताबिक वॉकी टॉकी टाइप माइक्रो सिक्योर डीएमआर वीएचएफ लैंड मोबाइल रेडियो (एलएमआर) हैंडसेट है। यह कंपनी पाकिस्तानी आर्मी के लिए काम करती है और इसकी फैक्टरी भी लाहौर कैंट के अंदर है। पाक रक्षा मंत्रालय ने मिलिट्री ग्रेड रेडियो बनाने के लिए कंपनी को जगह कैंट के अंदर लीज पर दी है। वह कहते हैं कि आतंकी सेना और आईएसआई के साथ लगातार संपर्क में होंगे। नहीं तो कोई कंपनी कैंट के अंदर अपना दफ्तर क्यों बनाएगी। इसके अलावा कंपनी का रावलपिंडी दफ्तर भी रावलपिंडी छावनी के अंदर पाकिस्तान सैन्य लेखा अधिकारी कॉलोनी में स्थित है, और इसका कराची ऑफिस सर्विसेज क्लब बिल्डिंग में स्थित है। यह कंपनी स्ट्रैटेजिक प्लांस डिवीजन, पाकिस्तान आर्मी, पाकिस्तान एयर फोर्स, पाकिस्तान नेवी, पाकिस्तान रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स, फ्रंटियर कांस्टेबुलरी केपीके, पुलिस, एयरपोर्ट सिक्योरिटी फोर्स, सुरक्षा एजेंसियां आदि को यह रेडियो सेट सप्लाई करती है।
पाकिस्तानी सेना यूज करती है यह डिजिटल फ्रिक्वेंसी
सूत्र बताते हैं कि इसकी खासियत यह है कि इसमें टेक्स्ट और वॉयस कॉल दोनों की जा सकती हैं। इस रेडियो हैंडसेट की फ्रिक्वेंसी भी वही है, जो पाकिस्तानी सेना यूज करती है। कॉमन डिजिटल फ्रिक्वेंसी जैसे: 143.500 मेगाहर्ट्ज, 147.270 मेगाहर्ट्ज, 149.310 मेगाहर्ट्ज, 150.230 मेगाहर्ट्ज, 151.230 मेगाहर्ट्ज, 155.610 मेगाहर्ट्ज, 157.220 मेगाहर्ट्ज, 160.430 मेगाहर्ट्ज, 162.340 मेगाहर्ट्ज, 165.710 मेगाहर्ट्ज। सामान्य एनालॉग फ्रिक्वेंसी हैं: 145.100 मेगाहर्ट्ज, 144.700 मेगाहर्ट्ज, 143. 702 मेगाहर्ट्ज, 143.548 मेगाहर्ट्ज और 143.887 मेगाहर्ट्ज।
नगरोटा एनकाउंटर में भी मिले थे हैंडसेट
सूत्र बताते हैं कि 2020 में जम्मू के नगरोटा में एनकाउंटर में मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से इसी तरह के रेडियो हैंडसेट बरामद हुए थे। इस मुठभेड़ में जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादी मारे गए थे। इसमें भी पाकिस्तान के सीधे तौर पर शामिल होने की बात सामने आई थी। इसमें मारे गए आतंकी पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से चैट कर रहे थे। आतंकियों के लैंड मोबाइल रेडियो हैंडसेट की पड़ताल से यह खुलासा हुआ था कि वहीं से इन्हें निर्देश दिए जा रहे थे। मारे गए आतंकियों में से एक से उसके हैंडलर ने मैसेज में पूछा था, "कहां पहुंचे? क्या सूरतेहाल है? कोई मुश्किल तो नहीं?" उस आतंकी ने जवाब दिया था, "2 बजे"। ये सारी चैट रोमन लैटर्स में थीं। इन आतंकियों को ये हैंडसेट बॉर्डर क्रॉस करने के पहले दिए गए थे।