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Karnataka: कर्नाटक ने मेकेदातू डिवीजन किया शुरू, सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु की याचिका खारिज होते ही तैयारी तेज
Fri, 14 Nov 2025 10:08 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Fri, 14 Nov 2025 10:08 PM IST
सार
Mekedatu Division Preparations: कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तमिलनाडु की याचिका खारिज किए जाने के बाद मेकेदातू परियोजना पर काम तेज कर दिया है। उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने नई डिवीजन शुरू कर अधिकारियों को कार्य प्रगति बढ़ाने का निर्देश दिया।
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मेकदाटु परियोजना
- फोटो : X- @Mekedatu
विस्तार
कर्नाटक सरकार ने मेकेदातू परियोजना पर तेजी दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तमिलनाडु की याचिका खारिज किए जाने के एक दिन बाद ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने जल संसाधन विभाग के तहत मेकेदातू बैलेंसिंग रिजर्वायर डिवीजन की शुरुआत कर दी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परियोजना को अब तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा।
शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने नई डिवीजन का कार्यालय खोल दिया है और अधिकारियों को तुरंत काम शुरू करने का निर्देश दिया है। तमिलनाडु लगातार विरोध कर रहा है कि यह परियोजना कावेरी नदी के उसके हिस्से के जल प्रवाह को प्रभावित करेगी। लेकिन कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह परियोजना बंगलूरू में पेयजल उपलब्धता बढ़ाएगी और तमिलनाडु के हिस्से में आने वाले पानी को प्रभावित नहीं करेगी।
कृषि और भूमि से जुड़ा है पूरा विवाद
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी भूमि डूब क्षेत्र में जाने की आशंकाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार वन और राजस्व भूमि के बदले सरकारी भूमि की पहचान कर रही है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। उन्होंने किसानों से साफ कहा कि यह परियोजना भावनाओं या राजनीति से नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ी है और जनता को तय करना होगा कि उन्हें फसल चाहिए या बड़ा बांध।
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ये भी पढ़ें- पानी के अंदर बारूदी सुरंगों की रियल-टाइम में होगी पहचान, डीआरडीओ ने विकसित किए अगली पीढ़ी के उपकरण
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया कि उन्होंने केंद्र बजट में तुंगभद्रा परियोजना के लिए घोषित 5,300 करोड़ रुपये जारी नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि जब राज्य में डबल इंजन सरकार थी तब भी फंड जारी नहीं हुआ। शिवकुमार ने कहा कि भाजपा सांसदों ने संसदीय मंचों पर अपने ही राज्य के विकास मुद्दों को नहीं उठाया, जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के सांसद अपने राज्यों के हितों के लिए एकजुट रहते हैं।
मेकेदातू परियोजना का उद्देश्य और लागत
मेकेदातू बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना में कावेरी नदी पर एक बांध निर्माण शामिल है, जो बंगलूरू और आसपास के क्षेत्रों को 4.75 टीएमसी फीट पेयजल प्रदान करेगा और लगभग 400 मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता रखेगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह रिजर्वायर तमिलनाडु को उसका हिस्सा मिलने वाले पानी में कोई कटौती नहीं करेगा, बल्कि एक बफर स्टोरेज की तरह काम करेगा।
परियोजना की अनुमानित लागत 9,000 करोड़ रुपये से 14,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि इस परियोजना का विरोध राजनीतिक है, तकनीकी नहीं।
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शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने नई डिवीजन का कार्यालय खोल दिया है और अधिकारियों को तुरंत काम शुरू करने का निर्देश दिया है। तमिलनाडु लगातार विरोध कर रहा है कि यह परियोजना कावेरी नदी के उसके हिस्से के जल प्रवाह को प्रभावित करेगी। लेकिन कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह परियोजना बंगलूरू में पेयजल उपलब्धता बढ़ाएगी और तमिलनाडु के हिस्से में आने वाले पानी को प्रभावित नहीं करेगी।
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कृषि और भूमि से जुड़ा है पूरा विवाद
शिवकुमार ने बताया कि उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी भूमि डूब क्षेत्र में जाने की आशंकाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सरकार वन और राजस्व भूमि के बदले सरकारी भूमि की पहचान कर रही है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। उन्होंने किसानों से साफ कहा कि यह परियोजना भावनाओं या राजनीति से नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ी है और जनता को तय करना होगा कि उन्हें फसल चाहिए या बड़ा बांध।
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राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर आरोप लगाया कि उन्होंने केंद्र बजट में तुंगभद्रा परियोजना के लिए घोषित 5,300 करोड़ रुपये जारी नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि जब राज्य में डबल इंजन सरकार थी तब भी फंड जारी नहीं हुआ। शिवकुमार ने कहा कि भाजपा सांसदों ने संसदीय मंचों पर अपने ही राज्य के विकास मुद्दों को नहीं उठाया, जबकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के सांसद अपने राज्यों के हितों के लिए एकजुट रहते हैं।
मेकेदातू परियोजना का उद्देश्य और लागत
मेकेदातू बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना में कावेरी नदी पर एक बांध निर्माण शामिल है, जो बंगलूरू और आसपास के क्षेत्रों को 4.75 टीएमसी फीट पेयजल प्रदान करेगा और लगभग 400 मेगावॉट बिजली उत्पादन की क्षमता रखेगा। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह रिजर्वायर तमिलनाडु को उसका हिस्सा मिलने वाले पानी में कोई कटौती नहीं करेगा, बल्कि एक बफर स्टोरेज की तरह काम करेगा।
परियोजना की अनुमानित लागत 9,000 करोड़ रुपये से 14,000 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि इस परियोजना का विरोध राजनीतिक है, तकनीकी नहीं।