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DRDO: पानी के अंदर बारूदी सुरंगों की रियल-टाइम में होगी पहचान, डीआरडीओ ने विकसित किए अगली पीढ़ी के उपकरण
Fri, 14 Nov 2025 09:54 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 14 Nov 2025 09:54 PM IST
सार
DRDO: डीआरडीओ ने नई पीढ़ी के पानी के अंदर चलने वाले स्वचालित वाहन (एमपी-एयूवी) विकसित किए हैं, जिनमें सोनार और कैमरे लगे हैं और ये संदिग्ध बारूदी सुरंग जैसी खतरनाक संदिग्ध चीजों का तुरंत पता लगा सकते हैं। इन मशीनों में डीप लर्निंग तकनीक है, जिससे वे खुद पहचान और वर्गीकरण कर सकती हैं। रक्षा मंत्रालय ने यह जानकारी दी।
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डीआरडीओ ने विकसित किए पानी के नीचे चलने वाले उपकरण
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने पानी के अंदर चलने वाले उपकरण बनाए हैं। इन मशीनों में खास तरह के सोनार और कैमरे लगे हैं, जो पानी के नीचे मौजूद बारूदी सुरंग जैसी संदिग्ध चीजों का रियल-टाइम में पता लगाने और पहचान करने में मदद करते हैं।
मंत्रालय ने कहा कि इन नए उपकरणों को मैन-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स (एमपी-एयूवी) कहा जाता है। इन्हें डीआरडीओ की विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला ने विकसित किया है। इन्हें पानी के नीचे बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने वाले मिशनों के लिए तैयार किया गया है।
ये भी पढ़ें: भारतीय सेना ने 16,000 फीट की ऊंचाई पर बनाया मोनो रेल सिस्टम, सप्लाई लाइन में बड़ी सफलता
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यह प्रणाली पानी के नीचे चलने वाले कई स्वचालित वाहनों (एयूवी) से मिलकर बनी है। इनमें साइड-स्कैन सोनार और कैमरे लगे हैं, जो बारूदी सुरंग जैसी वस्तुओं का तुरंत पता लगाने और उनकी पहचान करने में सक्षम हैं।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन उपकरणों में डीप लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल होता। इसकी मदद से ये खुद ही पानी के अंदर पाए गए संदिग्ध सामान की पहचान और वर्गीकरण कर सकते हैं, जिससे ऑपरेटर का काम और मिशन का समय दोनों कम हो जाते हैं।
इसके अलावा, इन मशीनों में पानी के अंदर आवाज से बात करने की मजबूत प्रणाली भी लगी है। इससे मिशन के दौरान अलग-अलग एयूवी आपस में डाटा साझा कर पाते हैं और स्थिति की बेहतर जानकारी मिलती रहती है।
ये भी पढ़ें: बंगाल में मिला बुजुर्ग का शव, टीएमसी बोली- एसआईआर का डर ले रहा लोगों की जान; कुल 11 मौतों पर दावा
मंत्रालय ने कहा कि एनएसटीएल/हार्बर में हाल ही में हुए परीक्षण में इन प्रणालियों के अहम तकनीकी पैरामीटर और मिशन उद्देश्यों की सफलतापूर्वक पुष्टि हो गई है। कई औद्योगिकी साझेदार इस प्रणाली के निर्माण में शामिल हैं और कुछ ही महीनों में इन मशीनों का उत्पादन किया जाएगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने एमपी-एयूवी के सफल विकास के लिए नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला की टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह सक्षम, स्मार्ट और नेटवर्क आधारित खदान-रोधी समाधान की दिशा में अहम उपलब्धि है।
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मंत्रालय ने कहा कि इन नए उपकरणों को मैन-पोर्टेबल ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल्स (एमपी-एयूवी) कहा जाता है। इन्हें डीआरडीओ की विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला ने विकसित किया है। इन्हें पानी के नीचे बारूदी सुरंग को निष्क्रिय करने वाले मिशनों के लिए तैयार किया गया है।
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यह प्रणाली पानी के नीचे चलने वाले कई स्वचालित वाहनों (एयूवी) से मिलकर बनी है। इनमें साइड-स्कैन सोनार और कैमरे लगे हैं, जो बारूदी सुरंग जैसी वस्तुओं का तुरंत पता लगाने और उनकी पहचान करने में सक्षम हैं।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इन उपकरणों में डीप लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल होता। इसकी मदद से ये खुद ही पानी के अंदर पाए गए संदिग्ध सामान की पहचान और वर्गीकरण कर सकते हैं, जिससे ऑपरेटर का काम और मिशन का समय दोनों कम हो जाते हैं।
इसके अलावा, इन मशीनों में पानी के अंदर आवाज से बात करने की मजबूत प्रणाली भी लगी है। इससे मिशन के दौरान अलग-अलग एयूवी आपस में डाटा साझा कर पाते हैं और स्थिति की बेहतर जानकारी मिलती रहती है।
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मंत्रालय ने कहा कि एनएसटीएल/हार्बर में हाल ही में हुए परीक्षण में इन प्रणालियों के अहम तकनीकी पैरामीटर और मिशन उद्देश्यों की सफलतापूर्वक पुष्टि हो गई है। कई औद्योगिकी साझेदार इस प्रणाली के निर्माण में शामिल हैं और कुछ ही महीनों में इन मशीनों का उत्पादन किया जाएगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने एमपी-एयूवी के सफल विकास के लिए नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला की टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह सक्षम, स्मार्ट और नेटवर्क आधारित खदान-रोधी समाधान की दिशा में अहम उपलब्धि है।