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कर्नाटक ने राष्ट्रीय लहर से उलट तैरने की परंपरा कायम रखी

Wed, 23 May 2018 03:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 23 May 2018 03:07 PM IST
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Karnataka maintains tradition of political record, swim opposite national wave
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडी(एस) गठबंधन की सरकार - फोटो : PTI
कर्नाटक ने एक बार फिर परंपरा कायम रखी है। इस राज्य में ज्यादातर उसी पार्टी का शासन रहा है जो केंद्र सरकार के विपक्ष में रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा के 55 घंटे के कार्यकाल की सरकार कर्नाटक के 35 सालों के रिकॉर्ड में महज एक असामान्य बात है। 
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येदियुरप्पा के बाहर होने और कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के सत्ता तक पहुंचने के बाद चीजें फिर से सामान्य हो गईं। कर्नाटक पर उस गठबंधन का शासन होगा जो केंद्र में विपक्ष में है और नई दिल्ली में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व करने वाली भाजपा बेंगलुरू में विपक्ष में बैठेगी। 
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1983 में जब रामकृष्ण हेगड़े ने राज्य में पहली गैर-कांग्रेस सरकार बनाई थी तब से कर्नाटक ने हमेशा साबित किया है कि यह राष्ट्रीय धारा के उलट तैरता है। जब हेगड़े की जनता पार्टी सत्ता में आई तब कांग्रेस केंद्र की सत्ता पर आसीन थी।
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जब जनता दल ने 1989 में विधानसभा में कांग्रेस के लिए सत्ता छोड़ी, तब जनता दल के वीपी सिंह की अगुवाई में राष्ट्रीय मोर्चा ने नई दिल्ली में सत्ता संभाली।

हालांकि अपवाद भी रहे हैं लेकिन बहुत कम। जैसे 2013 में जब कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शपथ ली थी तब यूपीए सत्ता में थी, या जब संयुक्त मोर्चा की एचडी देवेगौड़ा सरकार देश की सत्ता संभाल रही थी तब जनता दल के जेएच पटेल राज्य पर शासन कर रहे थे। 

कर्नाटक और केंद्र दोनों जगह सत्ता बनाए रखने में कोई पार्टी निकटतम प्रयास किया तो 2004 में कांग्रेस और 2018 में बीजेपी थी।  

जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए केंद्र में शासन कर रही थी, तब 1999 से 2004 तक कर्नाटक की सत्ता में रहे कांग्रेस के मुख्यमंत्री एस एम कृष्णा ने राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के पक्ष में लहर को भांपते हुए छह महीने पहले चुनाव कराने का फैसला किया। हालांकि कृष्णा बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे और कांग्रेस और जेडी(एस) की गठबंधन सरकार सत्ता में आई, लेकिन वह लंबे समय तक नहीं टिक पाई। 


इस बार भी ऐसी ही स्थिति बनती दिख रही थी। बीजेपी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने भगवा पार्टी के पक्ष में लहर बनाने की कोशिश की। और मतदाताओं को राज्य में सत्ता में बार-बार आने वाली पार्टी के शासन के फायदे गिनाए। हालांकि बीजेपी बहुमत के नजदीक पहुंची लेकिन कुछ सीटों से सरकार बनाने से चूक गई। एक राजनीतिक विश्लेषक के मुताबिक येदियुरप्पा का इस्तीफे एक बार फिर से ये बता रहा है कि "जब देश सोता है तब कर्नाटक जागता रहता है।" 
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