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कर्नाटक हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बदमाशों को मौखिक समन नहीं, पुलिस को एसएमएस या व्हाट्सएप का करना होगा इस्तेमाल

Fri, 12 Dec 2025 09:50 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 12 Dec 2025 09:50 PM IST
सार

Karnataka High Court: कर्नाटक हाई कोर्ट ने पुलिस की मनमानी पर सख्ती दिखाते हुए साफ कर दिया है कि अब किसी भी हिस्ट्रीशीटर को मौखिक रूप से थाने बुलाना गैरकानूनी होगा। कोर्ट ने आदेश दिया है कि समन केवल एसएमएस या वाट्सएप के जरिए ही भेजे जाएं। यहां जानें मामला क्या है और अदालत ने क्यों दिया ऐसा निर्देश...

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Karnataka HC Order: No Oral Summons to Rowdy Sheeters, Only SMS or WhatsApp Alerts
कर्नाटक हाईकोर्ट। - फोटो : ANI

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस की एक आम प्रैक्टिस पर रोक लगाते हुए साफ कहा है कि हिस्ट्रीशीटर/रोड़ी शिटर्स को मौखिक रूप से थाने तलब नहीं किया जा सकता, जब तक कि वे किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हों या किसी मामले में संदिग्ध न हों। अब पुलिस केवल एसएमएस या वाट्सएप संदेश के जरिए ही उन्हें जांच के लिए बुला सकेगी। यह आदेश जस्टिस आर. नटराज ने 4 दिसंबर को सुनाया। मामला बंगलूरू के हेब्बल निवासी सुनील कुमार की याचिका से जुड़ा था, जिनका नाम रोड़ी शीट में दर्ज था लेकिन उनके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं था।

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सुधर चुका हूं, फिर भी पुलिस बार-बार बुलाती है- याचिकाकर्ता
सुनील कुमार ने अदालत में बताया कि वह अब शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं, लेकिन पुलिस की बार-बार आने वाली मौखिक नोटिसें, पूछताछ के दौरान बदसलूकी और निराधार हिरासत उनकी स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं। उनके वकील ने तर्क दिया कि भारतिय न्याय संहिता और पुलिस मैनुअल कहीं भी मौखिक समन की अनुमति नहीं देते।
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पुलिस का तर्क: हजारों हिस्ट्रीशीटर को लिखित नोटिस भेजना मुश्किल
सरकार की ओर से दलील दी गई कि बंगलूरू में हजारों हिस्ट्रीशीटर हैं और उन्हें लिखित नोटिस भेजना व्यावहारिक नहीं है। पुलिस आमतौर पर उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ देती है, इसलिए यह उनके अधिकारों का उल्लंघन नहीं है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब कानूनी प्रक्रिया मौखिक समन की अनुमति नहीं देती, तो पुलिस ऐसी प्रथा नहीं अपना सकती। कोर्ट ने कहा कि बिना कारण व्यक्ति को लंबी अवधि तक थाने में रखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।
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अब पुलिस को पालन करने होंगे ये नए नियम
कोर्ट ने हिस्ट्रीशीटर/रोड़ी शिटर्स के अधिकारों और पुलिस की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। अब रोड़ी शिटर्स को अपना मोबाइल नंबर पुलिस को देना होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें जांच के लिए एसएमएस या वाट्सएप के जरिए समन भेजा जा सके। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना लिखित या डिजिटल नोटिस के पुलिस किसी को मौखिक रूप से तलब नहीं कर सकती। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो इन नियमों की बाध्यता नहीं होगी और ऐसे मामलों में पुलिस अपने विवेक से कार्रवाई कर सकेगी। इसके अलावा, अगर समन भेजे जाने के बाद कोई व्यक्ति एसएमएस या वाट्सएप संदेश का जवाब नहीं देता, तो पुलिस उसके घर जाकर आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।

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