Karnataka: राज्यपाल गहलोत के आदेश के खिलाफ कर्नाटक HC ने टाली सुनवाई, सीएम सिद्धारमैया ने दायर की थी याचिका
कर्नाटक में मुदा जमीन आवंटन घोटाले में सीएम सिद्धारमैया को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही उनके खिलाफ जांच शुरू करने और मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। राज्यपाल के आदेश को सीएम सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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मुदा मामले में राज्यपाल थावरचंद गहलोत की ओर से दिए गए सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ मुकद्मा चलाने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई 31 अगस्त तक के लिए टाल दी है। कोर्ट ने 19 अगस्त के अंतरिम आदेश को भी बढ़ा दिया। इसमें हाईकोर्ट ने विशेष एमपी एमएलए कोर्ट को सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई को अगली कार्यवाही तक स्थगित करने के लिए कहा था।
दरअसल, कर्नाटक में मुदा जमीन आवंटन घोटाले में सीएम सिद्धारमैया को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उनके खिलाफ जांच शुरू करने और मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। राज्यपाल के आदेश को सीएम सिद्धारमैया ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में मामले को लेकर गुरुवार को सुनवाई की गई। इस दौरान सीएम सिद्धारमैया के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं।
न्यायाधीश एम नागाप्रसन्ना ने कहा कि उन्होंने वकील अभिषेक मनु सिंघवी को सुना। उन्होंने अपना सबमिशन पूरा कर लिया है। अब वह प्रत्युत्तर प्रस्तुत करेंगे। 19 अगस्त को दिया गया अंतरिम आदेश सुनवाई की अगली तारीख तक जारी रहेगा। राज्यपाल की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मामले की सुनवाई 31 अगस्त को होगी। तब वह अपनी दलीलें पूरी करेंगे।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुदा मामले में 16 अगस्त को प्रदीप कुमार एसपी, टीजे अब्राहम और स्नेहमयी की याचिका पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। इस आदेश के खिलाफ 19 अगस्त को सिद्धारमैया ने उच्च न्यायालय का रुख किया। याचिका में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने आदेश बिना सोचे-समझे, वैधानिक आदेशों का उल्लंघन करते हुए और मंत्रिपरिषद की सलाह सहित संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत जारी किया था। सिद्धारमैया ने राज्यपाल के आदेश को रद्द करने की मांग की।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने शिवकुमार के खिलाफ दायर सीबीआई की याचिका खारिज कर दी
कर्नाटक हाईकोर्ट ने डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार आय से अधिक संपत्ति (डीए) की जांच के लिए दी गई सहमति वापस लेने के कांग्रेस सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति के सोमशेखर और न्यायमूर्ति उमेश एम अडिगा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट को संबोधित करना चाहिए। पीठ ने 12 अगस्त को इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि शिवकुमार ने 2013 और 2018 के बीच अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। वह इस दौरान कांग्रेस सरकार में मंत्री थे। राज्य की पूर्व भाजपा सरकार ने शिवकुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई को मंजूरी दी थी। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और आय से अधिक संपत्ति के आरोप में जांच की गई।
मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक मंत्रिमंडल ने 23 नवंबर को माना कि शिवकुमार के खिलाफ मामले की जांच के लिए सीबीआई को सहमति देने का पिछली भाजपा सरकार का कदम कानून के अनुरूप नहीं था और मंजूरी वापस लेने का फैसला किया। शिवकुमार ने कहा कि पता था कि मुझे न्याय मिलेगा क्योंकि मैनें कभी कुछ गलत नहीं किया। मेरे खिलाफ मामले उनकी मृत्यु तक जारी रहेंगे क्योंकि विरोधी उनकी वृद्धि को पचा नहीं पा रहे हैं।
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