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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकते हैं छोटे दल, येदियुरप्पा ने भरा पर्चा

Thu, 19 Apr 2018 02:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Updated Thu, 19 Apr 2018 02:02 PM IST
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Karnataka Elections2018 Minor parties play Major role in this election spoil Cong, BJP voters
BS Yeddyurappa
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बस कुछ ही दिन बचे हैं। यह चुनाव एकबार फिर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी की नाक का सवाल बना हुआ है। चुनाव के मद्देनजर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आज अपने विधानसभा चुनाव शिमोगा के शिकारीपुरा से नॉमिनेशन फाइल किया। येदियुरप्पा ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए नॉमिनेशन भरने से पहले शिमोगा में रोड शो किया। इस दौरान उनके साथ बीजेपी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह भी मौजूद थे।
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नॉमिनेशन भरने के पहले बीजेपी से मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदार येदियुरप्पा ने कहा कि इस चुनाव में 30 से 40 हजार वोटों से जीतूंगा। लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी के लिए कांटे की टक्कर वाला होगा। इस चुनाव में छोटी पार्टियां अहम किरदार निभाएंगी। 
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बता दें कि एक ओर जहां कांग्रेस पार्टी देश में सिमटती अपनी साख को बचाने में जीजान से जुटी है वहीं बीजेपी एकबार फिर कर्नाटक में अपनी वापसी को लेकर मैदान में उतरने को तैयार है। लेकिन राजनीति जानकारों का मानना है कि बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) का खेल बिगाड़ सकती हैं छोटी पार्टियां। 224 विधानसभा सदस्यों वाली कर्नाटक में बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल तीन पार्टियां ही प्रमुख दावेदार मानी जा रही हैं।
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लेकिन आम आदमी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी (M) यहां तक की कर्नाक जनता पक्ष भी यहां की राजनीति में बड़ा नाम हैं जो बीजेपी के आंकड़े को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। इसके साथ ही यहां छोटी छोटी कई पार्टियां हैं जैसे महिला इंपावरमेंट पार्टी और कर्नाटक प्रज्ञनयावंथा जनता पार्टी और भारतीय जनशक्ति कांग्रेस भी इस चुनाव में अहम किरदार निभा सकते हैं। 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में इन पार्टियों का भी असर देखने को मिलेगा और इन पार्टियों के नेता बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल एस पर अपना प्रभाव छोड़ेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि छोटी पार्टियों को मिलने वाले वोट बड़ी पार्टियों की जीत में अहम किरदार निभा सकते हैं यही नहीं किसी भी नेता की जीत या हार में बहुत कम का ही अंतर रहेगा।

 फिलहाल कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे के साथ ही असंतोष देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में पार्टी में सीट बंटवारे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं बीजेपी का अंसतोष खुल कर सामने नहीं आया है। 
 
 बता दें कि आप पार्टी के पृथ्वी रेड्डी बंगलूरू के विकास मंत्री के जी जॉर्ज के खिलाफ चुनाव लड़ेगे और यह तय कि वह उनके वोटों को प्रभावित करेंगे। वहीं सीपीआई (एम)  भी इस चुनाव में  राज्य के किसानों और मजदूरों की स्थिति को अहम मुद्दा बना रही है। कालबर्गी से सीपीएम के नेता मारुति मानपाडे ने कहा कि सिद्धारमैया की सरकार जो खुद को सामाजिक कहती है लेकिन वह धीरे धीरे निजीकरण की ओर बढ़ रही है।

यहां तक कि किसानी में भी। लेकिन हां इस सरकार ने गरीबों और मजदूर वर्ग के लिए काम किया है। वहीं केजेपी पार्टी  के अध्यक्ष  प्रसन्ना कुमार ने बताया कि केजीपी ने भी भाजपा के खिलाफ कमर कस ली है। पार्टी ने तय किया है कि वह भाजपा के कुछ चुनिंदा प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारेगी। उन्होंने कहा कि इस बार हम बीजेपी की सांसद शोभा को हराने के लिए मैदान में उतरेंगे। कुमार ने यह भी कहा कि वह जहां से भी चुनाव लड़ेगीं मैं उनके खिलाफ लड़ूंगा।
 

कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे के साथ ही असंतोष देखने को मिल रहा है

Karnataka Elections2018 Minor parties play Major role in this election spoil Cong, BJP voters
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में इन पार्टियों का भी असर देखने को मिलेगा और इन पार्टियों के नेता बीजेपी, कांग्रेस और जनता दल एस पर अपना प्रभाव छोड़ेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि छोटी पार्टियों को मिलने वाले वोट बड़ी पार्टियों की जीत में अहम किरदार निभा सकते हैं यही नहीं किसी भी नेता की जीत या हार में बहुत कम का ही अंतर रहेगा।

 फिलहाल कांग्रेस पार्टी में टिकट बंटवारे के साथ ही असंतोष देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में पार्टी में सीट बंटवारे को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं बीजेपी का अंसतोष खुल कर सामने नहीं आया है। 
 
 बता दें कि आप पार्टी के पृथ्वी रेड्डी बंगलूरू के विकास मंत्री के जी जॉर्ज के खिलाफ चुनाव लड़ेगे और यह तय कि वह उनके वोटों को प्रभावित करेंगे। वहीं सीपीआई (एम)  भी इस चुनाव में  राज्य के किसानों और मजदूरों की स्थिति को अहम मुद्दा बना रही है।

कालबर्गी से सीपीएम के नेता मारुति मानपाडे ने कहा कि सिद्धारमैया की सरकार जो खुद को सामाजिक कहती है लेकिन वह धीरे धीरे निजीकरण की ओर बढ़ रही है।यहां तक कि किसानी में भी। लेकिन हां इस सरकार ने गरीबों और मजदूर वर्ग के लिए काम किया है।

वहीं केजेपी पार्टी  के अध्यक्ष  प्रसन्ना कुमार ने बताया कि केजीपी ने भी भाजपा के खिलाफ कमर कस ली है। पार्टी ने तय किया है कि वह भाजपा के कुछ चुनिंदा प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारेगी। उन्होंने कहा कि इस बार हम बीजेपी की सांसद शोभा को हराने के लिए मैदान में उतरेंगे। कुमार ने यह भी कहा कि वह जहां से भी चुनाव लड़ेगीं मैं उनके खिलाफ लड़ूंगा।
 
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