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Hindi News ›   India News ›   Ignoring Expiry Dates: How Dangerous Is It? Why Can Expired Food Be Life-Threatening? What Do the Rules Say?

एक्सप्लेनर: एक्सपायरी डेट नजरअंदाज करना कितना खतरनाक, ऐसा खाना क्यों हो सकता है जानलेवा, क्या कहते हैं नियम?

Wed, 02 Sep 2026 05:48 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Wed, 02 Sep 2026 05:48 AM IST
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सार
पैकेटबंद खाने की एक्सपायरी और बेस्ट बिफोर तारीख को नजरअंदाज करना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। हाल में एक्सपायरी सामान की तारीख बदलकर बेचने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में जानें तारीखों का मतलब, एक्सपायरी खाने के नुकसान और इससे जुड़े नियम, साथ ही एफएसएसएआई के प्रस्तावित लाल चेतावनी लेबल के बारे में।
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Ignoring Expiry Dates: How Dangerous Is It? Why Can Expired Food Be Life-Threatening? What Do the Rules Say?
फर्जी लेबल का खेल - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पैकेटबंद खाना खरीदते समय हम आमतौर पर उसकी कीमत, स्वाद और ब्रांड देखते हैं, लेकिन पैकेट पर लिखी निर्माण तारीख, समाप्ति तारीख और 'बेस्ट बिफोर' को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। हाल के दिनों में एक्सपायरी खाद्य पदार्थों की तारीख बदलकर उन्हें दोबारा बेचने के मामले सामने आए हैं। 



ऐसे में यह सवाल उठता है कि खाने की चीजों पर लिखी इन तारीखों का असल मतलब क्या है? एक्सपायरी खाना बेचने पर क्या कार्रवाई हो सकती है? ये कैसे हानिकारक है? उपभोक्ता को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? 

कहां आए एक्सपायरी खाने से जुड़े मामले?

मुंबई: 75 लाख रुपये से ज्यादा का एक्सपायरी खाना
महाराष्ट्र के नवी मुंबई के तुर्भे इलाके में खाद्य एवं औषधि प्रशासन और पुलिस ने एक पैकेजिंग परिसर पर कार्रवाई की। यहां 4,942 कार्टन एक्सपायरी खाद्य पदार्थ मिले, जिनकी कीमत 75 लाख रुपये से ज्यादा बताई गई। अधिकारियों के अनुसार इन खाद्य पदार्थों की निर्माण और समाप्ति तारीख में छेड़छाड़ की गई थी।

जांच में सामने आया कि मूल पैकेट से निर्माण और समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख मिटाकर नई तारीखें छापी जा रही थीं। कुछ उत्पादों पर मूल सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी के ऊपर नए लेबल भी लगाए गए थे। जब्त सामान में लेज, कुरकुरे, बिंगो, मैगी, तैयार खाद्य पदार्थ, हेलमैन्स मेयोनीज और थम्स अप-लिम्का जैसे उत्पाद शामिल थे।

दिल्ली: एक्सपायरी सामान की तारीख बदलकर दोबारा बिक्री
जुलाई में दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र में पुलिस ने एक्सपायरी खाद्य पदार्थों की बिक्री, निर्माण और समाप्ति तारीख में बदलाव और दोबारा पैकिंग से जुड़े मामले का खुलासा किया। इस मामले में 20 लाख रुपये से अधिक का सामान जब्त किया गया और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।


पुलिस के अनुसार आरोपियों के पास एक्सपायरी या एक्सपायरी के करीब पहुंच चुके खाद्य पदार्थ थे। इनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए तारीखों में बदलाव किया जाता था। इसके बाद इन्हें बाजार, खुदरा दुकानों, मॉल और ऑनलाइन मंचों तक भेजे जाने की बात सामने आई।

कानपुर: सड़क किनारे फेंकी एक्सपायरी चॉकलेट, लोग उठाकर ले गए
कानपुर में एक चॉकलेट फैक्टरी की ओर से एक्सपायरी चॉकलेट को सड़क किनारे कचरे के पास फेंकने का मामला सामने आया। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए और कार्टन में रखी चॉकलेट उठाकर ले गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, चॉकलेट 2024 में ही एक्सपायर हो चुकी थीं और उन्हें हाईवे के किनारे फेंका गया था। वीडियो में लोगों को बड़ी संख्या में चॉकलेट ले जाते देखा गया।

तारीखों का मतलब
तारीखों का मतलब - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

खाने की चीजों पर लिखी तारीखों का मतलब क्या होता है?

खाद्य पदार्थों की लेबलिंग, निर्माण/पैकिंग की तारीख, समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख और 'बेस्ट बिफोर' से जुड़े प्रावधान एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग एवं प्रदर्शन) विनियम, 2020 के तहत आते हैं।

शेल्फ लाइफ क्या है?
खाद्य उत्पाद की शेल्फ लाइफ से जुड़ी जानकारी के आधार पर उसके लेबल पर निर्माण या पैक करने की तारीख और समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख दी जाती है। 'बेस्ट बिफोर' को वैकल्पिक या अतिरिक्त जानकारी के तौर पर दिया जा सकता है।

'बेस्ट बिफोर' क्या बताता है?
एफएसएसएआई के अनुसार ‘बेस्ट बिफोर’ वह तारीख है जिसके अंत तक तय भंडारण परिस्थितियों में खाद्य उत्पाद बिक्री योग्य रहता है और अपनी बताई गई विशेष गुणवत्ता बनाए रखता है। इस तारीख के बाद खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं कि तुरंत असुरक्षित हो जाए। उसकी गुणवत्ता कम हो सकती है। लेकिन अगर उत्पाद असुरक्षित हो जाता है तो उसे बेचा नहीं जा सकता।

समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख
खाद्य पदार्थ के लेबल पर समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख दी जाती है। अगर इस तारीख की वैधता किसी खास भंडारण स्थिति पर निर्भर करती है तो वह स्थिति भी लेबल पर बतानी होती है।

तारीख लिखने के भी नियम हैं

  • 3 महीने तक की शेल्फ लाइफ वाले उत्पादों पर दिन, महीना और वर्ष लिखा जाता है।
  • 3 महीने से ज्यादा की शेल्फ लाइफ वाले उत्पादों पर महीना और वर्ष लिखा जा सकता है।
  • ऐसे उत्पादों पर दिन, महीना और वर्ष भी लिखा जा सकता है।

सात दिन या उससे कम शेल्फ लाइफ वाले खाद्य पदार्थों पर निर्माण की तारीख लिखना जरूरी नहीं हो सकता, लेकिन समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख लिखना जरूरी है। अगर किसी मिश्रित पैकेट में अलग-अलग खाद्य पदार्थ हैं तो उसकी घोषित शेल्फ लाइफ सबसे कम शेल्फ लाइफ वाले उत्पाद के आधार पर होगी।

एक्सपायरी खाना बेचने पर क्या सजा हो सकती है?

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 27 के तहत थोक विक्रेता या वितरक अगर खाद्य पदार्थ को उसकी समाप्ति तारीख के बाद सप्लाई करता है तो उसकी जिम्मेदारी तय की गई है। अगर खाद्य पदार्थ असुरक्षित है तो धारा 59 के तहत नुकसान की गंभीरता के आधार पर सजा हो सकती है।

  • कोई नुकसान नहीं हुआ: छह महीने तक की जेल और एक लाख रुपये तक जुर्माना।
  • गैर-गंभीर नुकसान: एक साल तक की जेल और तीन लाख रुपये तक जुर्माना।
  • गंभीर नुकसान: छह साल तक की जेल और पांच लाख रुपये तक जुर्माना।
  • मौत: कम से कम सात साल की जेल, जो उम्रकैद तक हो सकती है, और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना।

कानून में नुकसान में स्थायी या अस्थायी शारीरिक क्षति को शामिल किया गया है। अगर खाद्य पदार्थ खाने से उपभोक्ता को नुकसान या मौत होती है तो धारा 65 के तहत मुआवजे का भी प्रावधान है। मौत पर कम से कम पांच लाख रुपये, गंभीर नुकसान पर तीन लाख रुपये तक और अन्य नुकसान पर एक लाख रुपये तक मुआवजा दिया जा सकता है। गंभीर चोट या मौत के मामले में लाइसेंस रद्द करने, बाजार से खाद्य पदार्थ वापस मंगाने और प्रतिष्ठान या संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया जा सकता है।

आपकी सेहत पर क्या असर?
आपकी सेहत पर क्या असर? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

एक्सपायर्ड खाना कैसे है आपके लिए हानिकारक?

उजाला सिग्नस अस्पताल के संस्थापक निदेशक डॉ. शुचिन बजाज ने बताया कि अगर आप एक्सपायर्ड खाना खाते हैं तो यह शरीर के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। पहला, खाने का पोषण मूल्य कम हो जाता है और दूसरा, संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसमें कीटाणु, बैक्टीरिया और वायरस फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।

हालांकि, यह खाने की पैकेजिंग पर भी निर्भर करता है। अगर कोई सूखा खाना है और वैक्यूम पैक किया गया है, तो संक्रमण का खतरा कम हो सकता है, लेकिन उसकी गुणवत्ता कम हो सकती है। वहीं, अगर खाना गीला है तो उसमें खतरनाक बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनप सकते हैं। इससे इसे खाने वाले व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग, डायरिया और बुखार हो सकता है। इसका असर कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों तक रह सकता है।

लोगों में यह गलतफहमी है कि अगर ऐसे खराब खाने को गर्म या उबाल दिया जाए तो खतरा टल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से गंभीर संक्रमण भी हो सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए ऐसा खाना ज्यादा हानिकारक हो सकता है। साथ ही, जो लोग पहले से बीमार हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें भी खतरा हो सकता है।

सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि खाने को देखकर हमेशा पता नहीं चलता कि वह सुरक्षित है या नहीं। कई बार खाने की महक और स्वाद भी सामान्य होता है। ऐसे में हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला से ही खाना खरीदना चाहिए।

खाने को किस तरह और किस तापमान पर रखा गया है, यह भी उसकी समाप्ति तारीख जितना ही महत्वपूर्ण है। अगर खाने का पैकेट फट गया हो या उसे गर्म तापमान में रखा गया हो तो वह समाप्ति तारीख से पहले भी खराब हो सकता है। ऐसे मामले खासकर डेयरी और मांसाहारी उत्पादों में देखने को मिलते हैं। डॉ. बजाज ने कहा, “जब संदेह हो, तो फेंक दें।” यानी खाने की सुरक्षा को लेकर थोड़ा भी शक हो तो उसे खाने के बजाय फेंक देना बेहतर है।

उपभोक्ता ध्यान दें
उपभोक्ता ध्यान दें - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

उपभोक्ताओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • खरीदने से पहले निर्माण और समाप्ति/उपयोग की अंतिम तारीख जरूर देखें।
  • ‘बेस्ट बिफोर’ और ‘एक्सपायरी’ में अंतर समझें।
  • पैकेट पर दी गई भंडारण की शर्तों का पालन करें।
  • पैकेट फटा, खुला या क्षतिग्रस्त हो तो न खरीदें।
  • खाद्य पदार्थ की महक और स्वाद सामान्य होने पर भी उसे सुरक्षित न मानें।
  • एक्सपायरी या सुरक्षा को लेकर थोड़ा भी संदेह हो तो उसे न खाएं।
  • डेयरी और मांसाहारी उत्पादों को लेकर विशेष सावधानी रखें।
  • खाद्य पदार्थ भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें।

क्या है ये रेड लेबल?
क्या है ये रेड लेबल? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

रेड चेतावनी लेबल को लेकर क्या हो रही है चर्चा?

इस बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों के सामने लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है। इसमें जरूरत के अनुसार अधिक चीनी, अधिक नमक, अधिक फैट या अधिक मीठा पेय जैसी चेतावनी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य उपभोक्ता को पैकेट के सामने ही यह जानकारी देना है कि उत्पाद में चिंता वाले पोषक तत्वों की मात्रा अधिक है।

यह कैसे लागू होगा?
एफएसएसएआई के प्रस्ताव के मुताबिक इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है। पहले चरण में ऐसे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लगाने का प्रस्ताव है, जिनमें चीनी, नमक या वसा में से कम से कम दो की मात्रा तय सीमा से अधिक होगी। बाद के चरण में यह व्यवस्था और सख्त करने का प्रस्ताव है, जिसमें इनमें से किसी एक की मात्रा अधिक होने पर भी चेतावनी लग सकती है।

दूसरे देशों में क्या व्यवस्था है?

भारत में अभी यह प्रस्ताव है, लेकिन कई देशों में पैकेट के सामने चेतावनी या पोषण संबंधी लेबल पहले से लागू हैं।

  • चिली: पैकेट पर काले रंग के स्टॉप-साइन जैसे निशान लगाए जाते हैं, जिनमें अधिक चीनी, नमक, संतृप्त वसा या कैलोरी की चेतावनी होती है।
  • मेक्सिको: चिली की तरह काले चेतावनी निशान वाली व्यवस्था अपनाई गई है।
  • अर्जेंटीना: पैकेट के सामने बड़े काले अष्टकोणीय चेतावनी निशान लगाए जाते हैं।
  • इस्राइल: पैकेट पर लाल चेतावनी लेबल की व्यवस्था है।
  • ब्रिटेन: लाल, पीले और हरे रंग वाली ट्रैफिक-लाइट प्रणाली से पोषक तत्वों की मात्रा बताई जाती है।
  • ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड: यहां हेल्थ स्टार रेटिंग का इस्तेमाल किया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कई देशों ने फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग को उपभोक्ताओं को पोषण संबंधी जानकारी समझाने और बेहतर खाद्य विकल्प चुनने में मदद करने के लिए अपनाया है।

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