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Karnataka: येदियुरप्पा की छांव में भाजपा का दांव, रिटायरमेंट ले चुका यह नेता क्यों है इतना खास? जानें

Sun, 05 Mar 2023 09:24 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रांजुल श्रीवास्तव Updated Sun, 05 Mar 2023 09:24 PM IST
सार

सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुके येदियुरप्पा भाजपा के लिए इतना खास क्यों है? क्यों चुनावी अभियान में भाजपा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की जगह येदियुरप्पा को ही अपना पोस्टर ब्वॉय बना रही है?

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Karnataka Elections 2023: BS Yediyurappa special for BJP, why  party make him poster boy
बीएस येदियुरप्पा

विस्तार

कर्नाटक में इस साल मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा यहां सत्ता में है, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की एंट्री से चुनावी जंग रोमांचक हो चुकी है। हालांकि, कांग्रेस भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। ऐसे में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी 80 साल के अपने वयोवृद्ध दिग्गज नेता येदियुरप्पा की छांव में पहुंच गई है। 

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भाजपा अपने चुनावी प्रचार अभियानों में येदियुरप्पा को ही चेहरा बना रही है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और खुद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जनसभाओं में येदियुरप्पा की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। आइए जानते हैं कि सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर चुका यह नेता पार्टी के लिए इतना खास क्यों है? क्यों भाजपा मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई की जगह येदियुरप्पा को ही अपना पोस्टर ब्वॉय बना रही है?

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भाजपा के सबसे कद्दावर नेता 

80 साल के बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक हैं। राज्य में भाजपा को जमीनी स्तर पर खड़ा करने में उनका काफी योगदान है, ऐसे में भाजपा से इतर येदियुरप्पा का अपना अलग जनाधार है। भाजपा यह बात जानती है, यही कारण है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में उनको चाहकर भी नजरअंदाज नहीं कर सकती। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के राजनीतिक विश्लेषक ए नारायण कहते हैं कि भाजपा पहले येदियुरप्पा के बिना ही चुनाव लड़ने की योजना बना रही थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर लोगों का पार्टी के प्रति भरोसा कम है। ऐसे में भाजपा को येदियुरप्पा का ही सहारा लेना पड़ा। 

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लिंगायत समुदाय पर येदियुरप्पा की पकड़

कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत समुदाय का खास स्थान है। यह समुदाय राज्य में 17 प्रतिशत के आसपास है और करीब 100 विधानसभा सीटों पर इसका प्रभाव है। ऐसे में भाजपा के लिए इस समुदाय को नजरअंदाज करना मुश्किल है। दूसरी तरफ, इस समुदाय पर येदियुरप्पा की मजबूत पकड़ मानी जाती है। बीते दिनों ही लिंगायत मठों के 100 से अधिक संतों ने येदियुरप्पा को अपना समर्थन दिया था। यह दूसरा कारण है, जिसके चलते भाजपा इस बार भी येदियुरप्पा फैक्टर पर निर्भर है। 

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चार बार रहे राज्य के मुख्यमंत्री 

येदियुरप्पा कर्नाटक के चार बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि, वह कभी भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 12 नवंबर, 2007 को वह मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, उन्हें सात दिन बाद इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद 2008, 2018 और 2019 में भी मुख्यमंत्री बने, लेकिन हर बार उन्होंने इस्तीफा दे दिया। बता दें, वर्तमान में येदियुरप्पा भाजपा के संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं। उन्होंने हाल ही में सक्रिय राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया था। 

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पीएम से लेकर नड्डा तक कर रहे तारीफ 

राज्य की जनता पर मजबूत पकड़ रखने वाले येदियुरप्पा की अहमियत को भाजपा अच्छे से जानती है। इसलिए बीते दिनों कर्नाटक पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने खुद उनकी तारीफ की थी। यहां तक कि उनको झुककर प्रणाम भी किया था। इसके अलावा अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा भी विभिन्न मंचों पर येदियुरप्पा की तारीफ करते नजर आए हैं। 

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