कानों देखी: कर्नाटक में येदियुरप्पा ने साध लिया, अब राजस्थान में बारी वसुंधरा राजे की है
राजस्थान में भाजपा के अंदरूनी सर्वे में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का कोई तोड़ नहीं है। महारानी के करीबी गुलाब चंद कटारिया अब असम के राज्यपाल हैं। कटारिया के उत्तराधिकार की गणेश परिक्रमा जारी है। लेकिन बताते हैं कि 70 में अधिकांश विधायक राजे खेमे के हैं। लगे हाथ आठ मार्च की बजाय चार मार्च को वसुंधरा ने चूरू में जन्मदिन का कार्यक्रम रखा है। यह जन्मदिन समारोह कम, ताकत का प्रदर्शन ज्यादा है।
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अप्रैल में कर्नाटक विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। लेकिन पिछले कुछ महीने में ही कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने अपनी ताकत का एहसास करा दिया है। नतीजतन प्रधानमंत्री न केवल उनके 80वें जन्मदिन में शरीक होने गए, बल्कि 48 दिन में उनका यह पांचवां दौरा था। हर बार नेताओं को येदियुरप्पा की बड़ी हैसियत का एहसास भी कराया। जब प्रधानमंत्री खुद ऐसा कर रहे हों तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह क्या करेंगे, समझा जा सकता है। इसका कारण केवल एक है। लिंगायत समाज में येदियुरप्पा का तोड़ नहीं है। मुख्यमंत्री बसावराज बोम्मई भी नहीं।
उधर, यही तैयारी वसुंधरा राजे की भी है। राजस्थान में भाजपा के अंदरूनी सर्वे में महारानी का कोई तोड़ नहीं है। महारानी के करीबी गुलाब चंद कटारिया अब असम के राज्यपाल हैं। कटारिया के उत्तराधिकार की गणेश परिक्रमा जारी है। लेकिन बताते हैं कि 70 में अधिकांश विधायक राजे खेमे के हैं। लगे हाथ आठ मार्च की बजाय चार मार्च को वसुंधरा ने चूरू में जन्मदिन का कार्यक्रम रखा है। यह जन्मदिन समारोह कम, ताकत का प्रदर्शन ज्यादा है। दिल्ली के लुटियन जोन में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल समेत कई नेता चूरू पर निगाह गड़ाए हैं। इसका अर्थ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी साफ समझ रहे हैं। समझ तो कांग्रेस का खेमा भी रहा है। आखिर वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस कार्यकाल की ताकत भी तो हैं।
'क्या नीतीश कुमार अब बुढ़ापे तक उछल कूद करते रहेंगे?'
लालू प्रसाद के करीबी और राष्ट्रीय जनता दल के संस्थापक एक नेता जी भड़क गए। भड़कने का कारण एक सवाल था कि क्या नीतीश कुमार फिर पलटी मार देंगे? नेता जी पहले भड़के। इसी भड़कने में राजद के सुधाकर सिंह को भी बुरा भला कहा और फिर कहा कि क्या नीतीश कुमार बुढ़ापे तक बस उछल कूद ही करते रहेंगे? अंत में हिदायत दी कि मेरे नाम से न छापिएगा। बिहार के पुराने नेताओं में से एक लालू प्रसाद और नीतीश कुमार के साथी ने कहा कि वह दोनों की रग-रग से वाकिफ हैं। उन्हें लालू भी सम्मान देते हैं और नीतीश भी उनका आदर करते हैं। जब 2015 में नीतीश साथ आए थे और छोड़कर जा रहे थे तो उससे पहले उन्होंने सुलह की कोशिश की थी, लेकिन तब गलती लालू की तरफ से भी थी। दोनों नेता अलग-अलग घोड़े पर सवार थे। इस बार ऐसा नहीं है। अब लालू, नीतीश और तेजस्वी सबकुछ गंभीरता से समझ रहे हैं। सूत्र का कहना है कि इंतजार कीजिए। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अभी आपको राजनीति के तमाम रंग दिखने वाले हैं।
योगी बाबा के मंत्रियों को ही अच्छा नहीं लगा अपने मुख्यमंत्री का अंदाज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पूरे तेवर में चल रहे हैं। दो दिन पहले विधानसभा में उन्होंने जो कहा वह सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारे में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जब बाबा पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अपने अंदाज में जवाब दे रहे थे तो इसका रिकार्डेड प्रसारण दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भी चल रहा था। मुख्यमंत्री की एक ललकार कि माफिया को मिट्टी में मिला देंगे, ने सभी को आकर्षित किया, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निजी हमले का अंदाज उनके पार्टी के ही नेताओं को रास नहीं आया। योगी सरकार के एक मंत्री ने प्रतिक्रिया में कहा कि बाबा का तवा हमेशा गर्म रहता है। पानी की बूंद पड़ते ही छनक उठते हैं। सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री के इस अंदाज से तो विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना भी सकते में आ गए थे। हालांकि बाद में सबकुछ ठीक हो गया।
क्या मध्यप्रदेश में 'मामा' बचा गए अपनी कुर्सी?
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान क्या हीरो बनकर उभर रहे हैं। भाजपा के भोपाल के एक नेता का कहना है कि शिवराज के बाद मध्यप्रदेश में जो भी भाजपा के नेता हैं, उनकी सभी गुटों पर उतनी अच्छी पकड़ नहीं है। कांग्रेस के बड़े नेता इसका कारण कुछ और बताते हैं। उनका कहना है कि आए दिन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल में दरबार लगा देते थे। लेकिन केंद्रीय मंत्री अमित शाह के समझाने के बाद सिंधिया थोड़ा लाइन पर आए हैं। इसके अलावा भाजपा में मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार हैं। फिलहाल सभी में एक चर्चा सामान्य है कि 2023 का कार्यकाल भले ही शिवराज सिंह चौहान पूरा कर लें, लेकिन उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। वहीं शिवराज खेमा को अपने नेता और मध्यप्रदेश के बच्चों के मामा की काबिलियत पर पूरा भरोसा है। शिवराज ने वैसे भी मुख्यमंत्री के रूप में करीब 18 साल राज किया है। पिछले दिनों वह उमा भारती के घर भी गए थे। नई आबकारी नीति को लेकर उमा भारती ने शिवराज का अभिनंदन किया, तिलक लगाया और शिवराज ने भी मौका देखकर पैर छुआ। आशीर्वाद लिया।
शशि थरूर के इस ट्वीट पर भाजपा के नेता खामोश क्यों हैं
कांग्रेस नेता शशि थरूर थोड़ा अलग किस्म की राजनीति करते हैं। हाल में उन्होंने शुचिता की राजनीति करने वाली भगवा पार्टी को आईना दिखा दिया। थरूर ने यह आईना दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद दिखाया। मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस पार्टी असमंजस में थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसी प्रतिक्रिया देना अच्छा रहेगा? इन सबके बीच शशि थरूर ने 400 नेताओं की सूची जारी कर दी। यह वह नेता हैं कि जो कई दलों से हैं और भाजपा में आए। इन नेताओं पर भाजपा में आने से पहले तमाम आरोप थे और भाजपा में आने के बाद किसी के खिलाफ न तो आगे कोई जांच की कार्रवाई की चर्चा है और न ही ऐसी कोई प्रक्रिया दिखती है। इसमें असम के मुख्यमंत्री से लेकर पश्चिम बंगाल में भाजपा का प्रमुख चेहरा बने शुभेंदु अधिकारी तक शामिल हैं।