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कर्नाटक: हर दो साल पर बदले जाएंगे कांग्रेसी मंत्री, 'रोटेशन प्लान' तैयार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Updated Fri, 08 Jun 2018 08:57 AM IST
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कर्नाटक में करीब 15 दिन पहले गठित हुई जनता दल (सेक्युलर) और कांग्रेस के गठबंधन वाली सरकार के लिए पहले ही महीने में परेशानी खड़ी होनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के मंत्रिमंडल विस्तार में मंत्री पद नहीं पाने वाले कई असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। विधायकों में बढ़ते असंतोष को रोकने के लिए अब कांगेस ने एक खास रणनीति पर विचार कर रही है।
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नाराज विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिले इसके लिए कांग्रेस 'रोटेशन प्लान' अपनाएगी। पार्टी ने फैसला किया है कि वह राज्य में कुमारस्वामी सरकार में अपने मंत्रियों को दो साल के बाद नए चेहरे से रिप्लेस करेगी ताकि वेटिंग लाइन में खड़े अन्य विधायकों को भी मौका मिले। बता दें कि कांग्रेस अपने नॉन परफॉर्मर्स को छमाही में होने वाले असेसमेंट के आधार पर पहले भी पद से हटा चुकी है।
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अब इस रोटेशन प्लान से कांग्रेस अपने सभी कार्यकर्ताओं को यह संदेश देना चाहती है कि वह अपने सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रतिबद्ध है। जानकारी के लिए बता दें कि कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रेजिडेंट जी परमेश्वरा इससे पहले भी सिद्धारमैया सरकार में परफॉर्मेंस असेसमेंट की घोषणा कर चुके हैं लेकिन यह मूर्त रूप नहीं ले सकी थी।
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पार्टी हाई कमान ने निकाला थ्री पॉइंट फॉर्मूला
कर्नाटक प्रभारी और ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के जनरल सेक्रेटरी केसी वेणुगोपल ने बताया कि पार्टी की हाई कमान ही ये फैसला करेगी कि किन विधायकों को मंत्रिमंडल में लाना है और किन्हें हटाना है। इसके लिए थ्री प्वाइंट फॉर्मूले का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मौजूदा मंत्रिमंडल को अंतिम मानकर नहीं चलना चाहिए। मंत्रियों की परफॉर्मेंस को परखने के लिए हर छमाही में रिव्यू किया जाएगा और जो मंत्री अपने टार्गेट को पूरा नहीं कर पाएंगे उसे हटा दिया जाएगा। वहीं पहली बार विधायक बने किसी भी शख्स को कैबिनेट में जगह नहीं दी जाएगी। मंत्रियों का कार्यकाल भी दो साल के रोटेशन पर आधारित होगा।
गौरतलब है कि गुरुवार को हुई एक मीटिंग में कांग्रेस के कुछ नेता नाराज थे। उनका मानना है कि पार्टी को राज्य में मजबूत स्थिति दिलाने के बाद भी उन्हें मंत्री पद नहीं दिया गया। वहीं सूत्रों के हवाले से ये भी जानकारी मिली है कि जो लोग पार्टी के खिलाफ बोल रहे हैं उन्हें मंत्री नहीं बनाया जाएगा।
बाहर रह गए सिद्धारमैया सरकार के कई मंत्री
जेडीएस और कांग्रेस के बीच पदों के बंटवारे में राज्य में सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार के कई मंत्रियों को बाहर बैठना पड़ा है। इनमें एमबी पाटिल, दिनेश गुंडू राव, रामलिंगा रेड्डी, आर. रोशन बेग, एचके पाटिल, तनवीर सैत, शमानुर शिवशंकराप्पानंद, सतीश जारकीहोली आदि शामिल हैं। बृहस्पतिवार को पाटिल के आवास पर बैठक में एमटीबी नागराज, सतीश जारकीहोली, सुधाकर और रोशन बेग समेत कई असंतुष्ट विधायक मौजूद रहे। बैठक के बाद अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) में सचिव सतीश ने माना कि विधायकों के बीच कैबिनेट विस्तार पर चर्चा हुई और वे सभी मंत्री पद नहीं मिलने से नाखुश थे। हमने ये बात राज्य व दिल्ली में बैठे शीर्ष नेताओं तक पहुंचाने को लेकर बुधवार को भी चर्चा की थी और बृहस्पतिवार को भी है। आगे भी हम मिलेंगे।
अन्य जगह भी हुई बैठक
कुछ सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय वीरशैव महासभा का चेहरा माने जाने वाले शिवशंकराप्पा ने भी कुछ नेताओं व नजदीकी लोगों से मंत्री मंडल को लेकर चर्चा की है। सूत्रों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एचके पाटिल के आवास पर भी यशवंतराय गौड़ा व एसआर पाटिल समेत कुछ असंतुष्ट विधायकों के पहुंचने की जानकारी भी दी है। हालांकि एचके पाटिल ने विधायकों के साथ बैठक होने के बजाय उनसे मात्र फोन पर वार्ता की बात स्वीकारी है।