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कर्नाटक कैबिनेट: धर्मांतरण विरोधी कानून रद्द करने का फैसला; पाठ्यपुस्तकों से हेडगेवार का चैप्टर भी हटाया जाएगा

Thu, 15 Jun 2023 08:48 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेंगलुरू Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 15 Jun 2023 08:48 PM IST
सार

कर्नाटक के शिक्षा मंत्री मधु बंगारप्पा ने बताया कि राज्य में स्कूली पाठ्य पुस्तकों से आरएसएस संस्थापक केबी हेडगेवार और अन्य के चैप्टर को हटाने का फैसला किया है।  

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Karnataka cabinet decides to revoke anti conversion law introduced by previous BJP government update news
सिद्धारमैया। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक में निजाम बदलने के साथ ही पुराने कानूनों को पलटने का काम भी शुरू हो गया है। महीना बीतते ही कांग्रेस सरकार ने पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा लाए गए धर्मांतरण के कानून को रद्द करने की न सिर्फ पूरी योजना बना ली है बल्कि कर्नाटक कैबिनेट ने इस पर मुहर भी लगा दी है। जल्दी ही इस प्रस्ताव को विधानसभा में लाया जाएगा। इसके साथ ही कैबिनेट ने राज्य में कक्षा छह से 10 तक की पाठ्यपुस्तकों में आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार और हिंदुत्ववादी विचारक वीडी सावरकर पर चैप्टर हटाने का भी फैसला किया है।

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कैबिनेट बैठक के बाद कानून एवं संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में भाजपा के समय लाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून पर चर्चा हुई। इसे रद्द करने के लिए सरकार विधानसभा के आगामी सत्र में बिल लाएगी। गौरतलब है कि कांग्रेस के विरोध के बीच यह विवादास्पद बिल 2022 में लागू किया गया था। इसके प्रावधानों का उल्लंघन संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है और इसमें सख्त सजा का भी प्रावधान है।
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पाठ्यपुस्तकों से जुड़े फैसले के बारे में बताते हुए पाटिल ने कहा कि कन्नड और सोशल साइंस की पाठ्यपुस्तकों में हेडगेवार और सावरकार पर पाठ हटाने के अलावा भाजपा सरकार के समय के अन्य संशोधनों को भी बदला जाएगा। समाज सुधारक सावित्री बाई फुले, इंदिरा को लिखे नेहरू के पत्र और अंबेडकर पर कविता को फिर पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। हालांकि, इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि क्या टीपू सुल्तान पर भी चैप्टर होगा।
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हर दिन पढ़नी होगी संविधान की प्रस्तावना
वहीं, सरकारी और गैर-सरकारी सभी स्कूल-कॉलेजों में प्रतिदिन संविधान की प्रस्तावना पढ़ना अनिवार्य किया जाएगा। यही नहीं, राज्य के सभी सरकारी और अर्ध-सरकारी कार्यालयों में संविधान की प्रस्तावना का चित्र लगेगा। सामाजिक कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा कि इससे युवाओं में भाईचारे की भावना बढ़ेगी।

एपीएमसी पर नया बिल आएगा
कैबिनेट ने कृषि मंडियों (एपीएमसी) पर भाजपा सरकार के फैसले को पलटते हुए एक नया बिल लाने का फैसला किया है। कृषि विपणन मंत्री शिवानंद पाटिल ने कहा, अपने वादे के अनुरूप एपीएमसी को बदलने के लिए हम बिल लाने जा रहे हैं। बिल 3 जुलाई से शुरू होने वाले बजट सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। साथ ही कैबिनेट ने सर्वसम्मति से स्कूली पाठ्यक्रम से आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार से संबंधित चैप्टर भी हटाने का फैसला किया है। 

 भाजपा के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार लाई थी धर्मांतरण कानून 
गौरतलब है कि पिछले साल पूर्व सरकार कर्नाटक में धर्मांतरण कानून लाई थी। तब भी कांग्रेस और जेडीएस ने भाजपा सरकार द्वारा लाए गए कानून के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। भाजपा सरकार ने विधानसभा से तो पिछले साल दिसंबर में ‘कर्नाटक प्रोटेक्शन ऑफ राइट टू फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल’ पारित किया था। विधान परिषद में उस वक्त बहुमत न होने की वजह से यह बिल अटक गया था। इस वजह से सरकार को विधेयक को प्रभाव में लाने के लिए मई में अध्यादेश लाना पड़ा था।

तब, तत्कालीन गृह मंत्री ने तर्क दिया था कि राज्य में प्रलोभन देकर और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं आम हो गई हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ये कानून लाया गया है। उन्होंने यह भी कहा था कि यह विधेयक किसी की धार्मिक आजादी नहीं छीनता। कोई भी व्यक्ति अपने अनुसार धर्म चुन सकता है, लेकिन किसी दबाव अथवा प्रलोभन में नहीं।


यह अधिनियम धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा करता है। साथ ही गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी भी धोखाधड़ी के माध्यम से एक धर्म से दूसरे धर्म में गैरकानूनी रूपांतरण पर रोक लगाने का प्रावधान करता है। इसके अतंर्गत 25,000 रुपये के जुर्माने के साथ तीन से पांच साल की कैद की सजा का प्रावधान है। वहीं, नाबालिगों, महिलाओं, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों के संबंध में  अपराधियों को तीन से 10 साल की कैद और 50,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। 

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