राहत : कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए आगे आईं राज्य सरकारें, मुफ्त शिक्षा समेत मिलेंगी ये सुविधाएं
कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों की सहायता के लिए कर्नाटक, असम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकार आगे आई है। इन सभी राज्यों ने मुफ्त शिक्षा से लेकर वित्तीय सहायता तक का एलान किया है।
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कोरोना की दूसरी लहर ने कई बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। ये सभी बच्चे बेसहारा और असहाय नजर आ रहे हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बाद अब इन बच्चों की मदद के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारें भी आगे आई हैं। इन सरकारों के द्वारा बच्चों की मुफ्त शिक्षा से लेकर वित्तीय सहायता तक का एलान किया गया है।
केंद्र सरकार करेगी मदद
केंद्र सरकार की घोषणा के तहत अनाथ बच्चों को 18 साल की उम्र में मासिक सहायता राशि और 23 साल की उम्र में पीएम केयर्स फंड से 10 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए लोन दिया जाएगा और इसके लिए जो भी ब्याज होगा वह पीएम केयर फंड से भुगतान किया जाएगा। कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों को 18 साल की उम्र तक आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख तक का हेल्थ इंश्योरेंस भी दिया जाएगा। इसके लिए जो भी प्रीमियम है वो पीएम केयर की तरफ से भुगतान किया जाएगा।
कर्नाटक
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने एलान करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने बाल सेवा योजना की घोषणा की है जिसके तहत अभिभावकों/देखभाल करने वालों को 3500 रुपए प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। जिन बच्चों के अभिभावक नहीं हैं, उन्हें चाइल्ड केयर संस्थानों में रखा जाएगा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उन्हें आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रवेश दिया जाएगा। 10वीं कक्षा पूरी करने वाले बच्चों को उच्च/व्यावसायिक शिक्षा के लिए मुफ्त लैपटॉप/टैब दिया जाएगा। 21 साल की उम्र पूरी करने वाली लड़कियों को शादी, उच्च शिक्षा, स्वरोजगार के लिए 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए मेंटरशिप दी जाएगी।'
असम
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम सरकार कोविड-19 के कारण अनाथ प्रत्येक बच्चे के अभिभावक को उनकी शिक्षा के लिए 3,500 रुपए प्रति माह प्रदान करेगी। ऐसे बच्चों को आवासीय संस्थानों में भेजा जाएगा, जिनके परिवार में और कोई सगा-संबंधी नहीं है। सरकार ऐसे बच्चों का सारा खर्च उठाएगी।
तमिलनाडु
मुख्यमंत्री एम. के स्टालिन द्वारा शनिवार को यहां सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया। विज्ञप्ति के मुताबिक ऐसे बच्चों के नाम से पांच लाख रुपये जमा कराए जाएंगे और यह रकम उनके 18 साल के पूरा होने पर उन्हें ब्याज के साथ मिलेगी। जिन बच्चों के माता-पिता दोनों की मौत बीमारी से हो गई है उन्हें सरकारी आश्रय गृहों या छात्रावासों में ठहरने की व्यवस्था के लिहाज से प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षा भी मुफ्त दी जाएगी
ऐसे बच्चों के ठहरने से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई करने तक सारे खर्च सरकार उठाएगी। इसके अलावा ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु महामारी से हो गई है, उन्हें तात्कालिक सहायता के तौर पर तीन लाख रुपये दिए जाएंगे। जिन बच्चों की परवरिश रिश्तेदार या अभिभावक द्वारा की जाएगी उन्हें बच्चे के 18 साल का होने तक इसके लिए तीन हजार रुपये का मासिक भत्ता दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश
कोरोना संक्रमण के चलते अपने मां-बाप को खोने वाले अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे बच्चों की देखभाल करने वालों को सरकार जहां 4 हजार रुपये प्रतिमाह देगी, वहीं बालिकाओं की शादी के लिए भी एक लाख एक हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराएगी। इसी प्रकार पढ़ने वाले बच्चों को भी सरकार की ओर से निशुल्क लैपटाप व टैबलेट दिया जाएगा।
निराश्रित बच्चों के लालन-पालन, रहने, शिक्षा समेत अन्य सुविधाएं देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ प्रारंभ करने की घोषणा की है। जल्द ही इस योजना को कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर प्रदेश में लागू किया जाएगा।
अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए शुरू होने वाली इस अभिनव योजना की शनिवार को घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा इस योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार उन सभी बच्चों के लालन-पालन की जिम्मेदारी उठाएगी, जिन्होंने कोरोना संक्रमण के चलते मां-बाप को खोने से अनाथ हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस योजना में अनाथ हुए बच्चों के पालन-पोषण व रहने के साथ ही बड़े होने पर उनकी शिक्षा और शादी आदि की भी व्यवस्था की गई है। ताकि ऐसे बच्चों को अपने पैर पर खड़े होने तक किसी तरह की आर्थिक दिक्कत का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से सरकार ने ’उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ प्रारंभ करने जा रही है।
हरियाणा
हरियाणा में कोरोना संक्रमण की वजह से जो बच्चे अनाथ हो गए हैं, उन बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की गई है। जो बच्चे परिवारों में रहेंगे उन्हें 18 वर्ष तक 2,500 रुपए प्रति माह दिए जाएंगे और पढ़ाई समेत अन्य खर्चों के लिए 12,000 रुपए हर साल दिए जाएंगे। जो बच्चे बाल देखभाल संस्थान में रहेंगे उन बच्चों को बाल देखभाल संस्थान पालेंगी। 18 वर्ष तक इनके नाम से 1,500 रुपए प्रतिवर्ष जमा कराए जाएंगे। जब ये बच्चे 21 साल के हो जाएंगे तो ये जमा राशि इन्हें दे दी जाएगी।