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कंगना रणौत मामले में हाईकोर्ट ने संजय राउत से पूछा- बताएं किसे कहा था हरामखोर

Mon, 28 Sep 2020 03:30 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 28 Sep 2020 03:30 PM IST
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Kangana Ranaut property demolition matter Hearing underway at Bombay High Court
कंगना रणौत-संजय राउत (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

कंगना रणौत के दफ्तर में तोड़फोड़ को लेकर सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सुनवाई की। इस दौरान अदालत में विवादित शब्द 'हरामखोर' भी गूंजा। इसपर अदालत ने कहा कि संजय राउत को यह बताना होगा कि उन्होंने यह शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया था। दरअसल, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील डॉ. बीरेंद्र सराफ ने एक वीडियो क्लिप चलाया, जिसमें राउत 'वो हरामखोर लड़की' कहते हुए सुनाई दे रहे थे। अदालत ने डॉ. सराफ से रणौत के सभी ट्वीट और राउत के पूरे वीडियो साक्षात्कार को प्रस्तुत करने के लिए कहा। 

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वहीं अदालत ने एक बार फिर बृह्नमुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को फटकार लगाई है। अदालत ने बीएमसी पर तंज कसते हुए कहा कि कई मामलों में आदेश के बाद भी ऐसा नहीं किया गया। यदि इस तरह की तेजी बीएमसी हर मामले में दिखाती तो मुंबई रहने के लिए और बेहतर शहर होता।
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कंगना के वकील ने उच्च न्यायालय में दलील देते हुए कहा कि बीएमसी की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। कंगना के वकीलों की जिरह पूरी हो गई है। बता दें कि कंगना सुशांत सिंह राजपूत मामले में काफी मुखर रही हैं। इस दौरान उन्होंने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से कर दी थी। इसे लेकर शिवसेना और उनके बीच तनातनी चल रही है।
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यह भी पढ़ें- कंगना पर राजद्रोह के मुकदमे के लिए कोर्ट में प्रार्थनापत्र, अधिवक्ता ने एक ट्वीट को बनाया आधार


शिवसेना के नेता संजय राउत सहित कई नेताओं ने उन्हें मुंबई न आने के चेतावनी दी थी। हालांकि वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलने के बाद वे नौ सितंबर को मुंबई पहुंची थीं। इसी दिन बीएमसी ने उनके दफ्तर को कथित अवैध निर्माण का हवाला देते हुए जेसीबी लाकर तोड़ दिया था। इस कार्रवाई के खिलाफ अभिनेत्री ने बॉम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

रणौत ने पहले नौ सितंबर को स्टे की मांग की थी। बाद में उन्होंने तोड़फोड़ से हुए नुकसान को लेकर बीएमसी से दो करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है। 25 सितंबर को हुई सुनवाई में अदालत ने बीएमसी से पूछा था कि क्या अवैध निर्माण को गिराने में वह हमेशा इतनी ही तेजी दिखाती है जितनी कंगना का बंगला गिराने में दिखाई?

अदालत की पीठ ने यह भी कहा था कि प्रदीप थोराट के मुवक्किल (शिवसेना नेता संजय राउत) ने वास्तव में वही किया जो उन्होंने कहा था। अदालत ने यह टिप्पणी उस संदर्भ में दी थी जिसमें शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में 'उखाड़ दिया' नाम से एक लेख प्रकाशित किया था। यह लेख कंगना रणौत के पाली हिल बंगले के हिस्से को गिराए जाने के बाद प्रकाशित हुआ था। 

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