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Arunachal Pradesh: सीजेआई बीआर गवई बोले- जनता के दरवाजे तक पहुंचे न्याय, सत्ता के गलियारों तक सीमित न रहे
Sun, 10 Aug 2025 03:29 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ईटानगर
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 10 Aug 2025 03:29 PM IST
सार
Arunachal Pradesh: गौहाटी हाई कोर्ट की इटानगर स्थायी पीठ की नई इमारत का उद्घाटन सीजेआई बीआर गवई ने किया। बता दें कि करीब 135.35 करोड़ रुपये की लागत से बने इस अत्याधुनिक भवन में पांच अदालतें और आधुनिक सुविधाएं हैं। इसका निर्माण फरवरी 2021 में शुरू हुआ था, जिसकी नींव 2018 में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने रखी थी।
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बी. आर. गवई, भारत के मुख्य न्यायाधीश
- फोटो : X @PemaKhanduBJP
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी. आर. गवई ने रविवार को कहा कि न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका का अस्तित्व केवल जनता की सेवा और तेज व सस्ती न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए है। गौहाटी हाईकोर्ट की इटानगर स्थायी पीठ की नई इमारत के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने कहा, 'मैं हमेशा विकेंद्रीकरण का समर्थक रहा हूं। न्याय लोगों के दरवाजे तक पहुंचना चाहिए। न अदालतें, न न्यायपालिका, न विधायिका - किसी शाही वर्ग या अधिकारियों के लिए हैं, हम सब जनता को न्याय देने के लिए हैं।'
यह भी पढ़ें - Asiatic Lion: देश में एशियाई शेरों की संख्या बढ़ी, पांच साल में 32 प्रतिशत बढ़े; सरकार ने जारी किए आंकड़े
अरुणाचल प्रदेश की 'विविधता में एकता' की सराहना
सीजेआई बीआर गवई ने अरुणाचल प्रदेश की 'विविधता में एकता' की सराहना करते हुए कहा कि यहां 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां हैं, और राज्य सरकार ने सभी की संस्कृति-संरक्षण के लिए प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा, 'देश को आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपराओं की कीमत पर नहीं।'
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भारत हम सबका घर है- सीजेआई बीआर गवई
मणिपुर के राहत शिविरों के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा कि एक महिला ने उनसे कहा, 'आप अपने घर में स्वागत हैं।' उन्होंने कहा, 'भारत हम सबका घर है।' डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए गवई ने कहा, 'हर धर्म का अपना ग्रंथ होता है, लेकिन हर भारतीय के लिए संविधान ही सबसे बड़ा ग्रंथ है। हमारी पहली निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी दोहराया कि केवल राजनीतिक समानता, आर्थिक और सामाजिक समानता के बिना अधूरी है।
नया न्यायालय परिसर न्याय का मंदिर है- मेघवाल
वहीं केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि नया न्यायालय परिसर कोई साधारण इमारत नहीं, बल्कि न्याय का मंदिर है।' मेघवाल ने कहा, 'नया न्यायालय भवन 'विकसित भारत' के अनुरूप विकास का माध्यम बनेगा।' उन्होंने आगे कहा कि 1 जुलाई, 2024 एक ऐतिहासिक कदम था जब सरकार ने लोगों की बेहतर सेवा के लिए पुराने ब्रिटिशकालीन कानूनों को भारतीय न्याय संहिता से बदल दिया। इस मौके पर गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार ने कहा, 'जैसे अरुणाचल में देश का पहला सूर्योदय होता है, वैसे ही यहां न्याय भी सबसे पहले और बिना देरी के पहुंचे।'
यह भी पढ़ें - Calcutta High Court: मेले के दौरान हुई दो मौतों के मामले में कोर्ट का फैसला, दो शवों का होगा दूसरा पोस्टमार्टम
'आम लोगों के लिए कानूनों को सरल बनाने की जरूरत'
इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि न्यायिक ढांचे, खासकर निचली न्यायपालिका में, को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि न्याय सुलभ, त्वरित और जन-अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर निचली न्यायपालिका में। रिजिजू ने कहा कि न्यायाधीशों और वादियों के लिए अच्छी सुविधाओं की आवश्यकता है। केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा, 'हमें आम लोगों के लिए न्याय को आसान बनाना होगा और लोगों और न्याय के बीच की दूरी को कम करना होगा। न्याय अदालतों से परे भी दिया जाना चाहिए।'
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अरुणाचल प्रदेश की 'विविधता में एकता' की सराहना
सीजेआई बीआर गवई ने अरुणाचल प्रदेश की 'विविधता में एकता' की सराहना करते हुए कहा कि यहां 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से अधिक उप-जनजातियां हैं, और राज्य सरकार ने सभी की संस्कृति-संरक्षण के लिए प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा, 'देश को आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन अपनी संस्कृति और परंपराओं की कीमत पर नहीं।'
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भारत हम सबका घर है- सीजेआई बीआर गवई
मणिपुर के राहत शिविरों के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए सीजेआई ने कहा कि एक महिला ने उनसे कहा, 'आप अपने घर में स्वागत हैं।' उन्होंने कहा, 'भारत हम सबका घर है।' डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए गवई ने कहा, 'हर धर्म का अपना ग्रंथ होता है, लेकिन हर भारतीय के लिए संविधान ही सबसे बड़ा ग्रंथ है। हमारी पहली निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए।' उन्होंने यह भी दोहराया कि केवल राजनीतिक समानता, आर्थिक और सामाजिक समानता के बिना अधूरी है।
नया न्यायालय परिसर न्याय का मंदिर है- मेघवाल
वहीं केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि नया न्यायालय परिसर कोई साधारण इमारत नहीं, बल्कि न्याय का मंदिर है।' मेघवाल ने कहा, 'नया न्यायालय भवन 'विकसित भारत' के अनुरूप विकास का माध्यम बनेगा।' उन्होंने आगे कहा कि 1 जुलाई, 2024 एक ऐतिहासिक कदम था जब सरकार ने लोगों की बेहतर सेवा के लिए पुराने ब्रिटिशकालीन कानूनों को भारतीय न्याय संहिता से बदल दिया। इस मौके पर गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार ने कहा, 'जैसे अरुणाचल में देश का पहला सूर्योदय होता है, वैसे ही यहां न्याय भी सबसे पहले और बिना देरी के पहुंचे।'
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'आम लोगों के लिए कानूनों को सरल बनाने की जरूरत'
इस दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि न्यायिक ढांचे, खासकर निचली न्यायपालिका में, को मजबूत किया जाना चाहिए ताकि न्याय सुलभ, त्वरित और जन-अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर निचली न्यायपालिका में। रिजिजू ने कहा कि न्यायाधीशों और वादियों के लिए अच्छी सुविधाओं की आवश्यकता है। केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा, 'हमें आम लोगों के लिए न्याय को आसान बनाना होगा और लोगों और न्याय के बीच की दूरी को कम करना होगा। न्याय अदालतों से परे भी दिया जाना चाहिए।'