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Calcutta High Court: मेले के दौरान हुई दो मौतों के मामले में कोर्ट का फैसला, दो शवों का होगा दूसरा पोस्टमार्टम
Sun, 10 Aug 2025 03:22 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Sun, 10 Aug 2025 03:22 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में खेयूरी मेले के दौरान हुई दो मौतों के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने दोनों शवों का दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। परिजनों ने पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाए और हत्या का आरोप लगाया। अदालत ने कहा कि शव सुरक्षित हैं और जांच में मदद के लिए दूसरा मत जरूरी है।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले में खेयूरी मेले के दौरान हुई दो मौतों के मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। मृतकों के परिजनों के शक और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल उठाने के बाद अदालत ने दोनों शवों का दूसरा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि यह कदम जांच में अहम साबित होगा और सच्चाई सामने लाने में मदद करेगा।
मामला 12 जुलाई का है, जब एक 60 वर्षीय व्यक्ति और एक 23 वर्षीय युवक खेयूरी मेले में गए थे। दावा किया गया कि उन पर बिजली का खंभा गिरने से उनकी मौत हो गई। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि दोनों की हत्या की गई। पुलिस ने पहले इसे अप्राकृतिक मौत का मामला माना था, लेकिन बाद में परिजनों की शिकायत पर हत्या के आरोप में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल
परिजनों ने कोर्ट में कहा कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का असली कारण स्पष्ट नहीं किया गया। आरोप है कि शव पर मौजूद कई चोटों का जिक्र रिपोर्ट में नहीं है। मृतकों की तस्वीरें पेश करते हुए वकीलों ने कहा कि एक पीड़ित के शरीर पर जो चोटें दिखाई दे रही थीं, उन्हें रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। इसी वजह से दूसरी पोस्टमार्टम की मांग की गई, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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ये भी पढ़ें- 'महायुति में सब ठीक', शिंदे का MVA को जवाब, बोले- मेरे दिल्ली जाने से सिर्फ विपक्ष को परेशानी
सरकार का विरोध और अदालत का रुख
राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि अगर हर मामले में दूसरी पोस्टमार्टम की अनुमति दी गई तो यह खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस अभी हत्या के मामलों की जांच कर रही है और जांच पूरी नहीं हुई है। लेकिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि शव सुरक्षित हैं और जांच में मदद के लिए दूसरा मत लिया जा सकता है, इसलिए यह कदम जरूरी है।
ये भी पढ़ें- दिल्ली में भाजपा ने भी लगाए थे राहुल गांधी जैसे आरोप, बिहार में ये काम क्यों नहीं कर रही कांग्रेस?
सख्त निगरानी में होगा दूसरा पोस्टमार्टम
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरी पोस्टमार्टम कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल के अधीक्षक को एक विशेषज्ञ टीम गठित करने को कहा गया है। पोस्टमार्टम न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगा और रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस कदम से न केवल जांच मजबूत होगी बल्कि परिजनों की शंकाएं भी दूर होंगी।
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मामला 12 जुलाई का है, जब एक 60 वर्षीय व्यक्ति और एक 23 वर्षीय युवक खेयूरी मेले में गए थे। दावा किया गया कि उन पर बिजली का खंभा गिरने से उनकी मौत हो गई। हालांकि, परिजनों का आरोप है कि दोनों की हत्या की गई। पुलिस ने पहले इसे अप्राकृतिक मौत का मामला माना था, लेकिन बाद में परिजनों की शिकायत पर हत्या के आरोप में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गईं।
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पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल
परिजनों ने कोर्ट में कहा कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का असली कारण स्पष्ट नहीं किया गया। आरोप है कि शव पर मौजूद कई चोटों का जिक्र रिपोर्ट में नहीं है। मृतकों की तस्वीरें पेश करते हुए वकीलों ने कहा कि एक पीड़ित के शरीर पर जो चोटें दिखाई दे रही थीं, उन्हें रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। इसी वजह से दूसरी पोस्टमार्टम की मांग की गई, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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सरकार का विरोध और अदालत का रुख
राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि अगर हर मामले में दूसरी पोस्टमार्टम की अनुमति दी गई तो यह खतरनाक मिसाल बन जाएगी। उन्होंने बताया कि पुलिस अभी हत्या के मामलों की जांच कर रही है और जांच पूरी नहीं हुई है। लेकिन हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि शव सुरक्षित हैं और जांच में मदद के लिए दूसरा मत लिया जा सकता है, इसलिए यह कदम जरूरी है।
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सख्त निगरानी में होगा दूसरा पोस्टमार्टम
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरी पोस्टमार्टम कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में किया जाएगा। इसके लिए अस्पताल के अधीक्षक को एक विशेषज्ञ टीम गठित करने को कहा गया है। पोस्टमार्टम न्यायिक मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगा और रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक को सौंपी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस कदम से न केवल जांच मजबूत होगी बल्कि परिजनों की शंकाएं भी दूर होंगी।
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