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Hindi News ›   India News ›   Justice L Nageswara Rao : Journey from Ranji to Cinema and Supreme Court, CJI NV Raman said His historic decisions will always be remembered

Justice L Nageswara Rao : रणजी से सिनेमा... और सुप्रीम कोर्ट तक का सफर, सीजेआई बोले- उनके फैसले हमेशा याद रखे जाएंगे

Sat, 21 May 2022 05:19 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sat, 21 May 2022 05:19 AM IST
सार

जस्टिस एल नागेश्वर राव ने अपनी विदाई के मौके पर कहा कि शीर्ष अदालतों के जजों को 65 की उम्र में सेवानिवृत्त नहीं होना चाहिए। यह काफी कम है। जब तक जज यहां के कामकाज में ढलते हैं तब तक उनके सुप्रीम कोर्ट छोड़ने का वक्त आ जाता है। जजों को यहां कम से कम 7-8 साल काम करने का मौका मिलना चाहिए।

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Justice L Nageswara Rao : Journey from Ranji to Cinema and Supreme Court, CJI NV Raman said His historic decisions will always be remembered
फिल्म कानून अपना-अपना में इंस्पेक्टर की भूमिका में जस्टिस एल नागेश्वर राव। - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को जस्टिस एल नागेश्वर राव को गर्मजोशी से विदाई दी गई। भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण ने जस्टिस राव द्वारा दिए कई ऐतिहासिक निर्णयों के लिए उनकी प्रशंसा की। इस दौरान वकीलों ने क्रिकेट और सिनेमा के साथ उनके संबंध का भी खुलासा किया।

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जस्टिस राव ने आंध्र प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेली थी और कुछ फिल्मों में संक्षिप्त अभिनय भी किया। वकील से सीधे शीर्ष अदालत में पदोन्नत हुए जस्टिस राव ने कहा, मुझे सक्रिय रहना पसंद है और खेल ने मुझे जीवन में बहुत कुछ सिखाया है। मैं जवानी के दिनों में थिएटर किया करता था। 
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सीजेआई ने कहा, एक जज के रूप में जस्टिस राव ने कानून की व्याख्या करने और कई उल्लेखनीय विचारों पर संविधान की व्याख्या करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल ही में जस्टिस राव ने जैकब पुलियेल मामले में फैसला सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को टीकाकरण के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। जस्टिस नागेश्वर राव ने राजीव गांधी की हत्या के दोषी एजी पेरारीवलन की रिहाई वाला फैसला भी लिखा।
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सात से आठ साल होना चाहिए जज का कार्यकाल
शीर्ष अदालतों के जजों को 65 की उम्र में सेवानिवृत्त नहीं होना चाहिए। यह काफी कम है। जब तक जज यहां के कामकाज में ढलते हैं तब तक उनके सुप्रीम कोर्ट छोड़ने का वक्त आ जाता है। जजों को यहां कम से कम 7-8 साल काम करने का मौका मिलना चाहिए। - जस्टिस राव

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