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सुप्रीम कोर्ट में अंतिम दिन: जस्टिस राव बोले- जज साधु नहीं होते, हम पर भी आ जाता है काम का दबाव

Fri, 20 May 2022 05:08 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Fri, 20 May 2022 05:08 PM IST
सार

न्यायमूर्ति राव ने कहा कि अगर मैंने अदालत की कार्यवाही के दौरान तेज आवाज से वकीलों को चोट पहुंचाई तो मैं माफी मांगता हूं।

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Judges are not monks, work pressure gets to them also: SC judge L N Rao
सुप्रीम कोर्ट जज न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव हुए रिटायर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जज साधु नहीं होते हैं और काम का दबाव कभी-कभी उन पर भी आ जाता है, सुप्रीम कोर्ट के पांचवें सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव ने शुक्रवार को कार्यालय में अपने अंतिम कार्य दिवस पर सीजेआई के साथ औपचारिक बेंच साझा करते हुए यह बात कही। शीर्ष अदालत के इतिहास में वह सातवें जज रहे जिन्हें बार से सीधे पदोन्नत किया गया था। न्यायमूर्ति राव ने शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में अपने छह साल से अधिक के कार्यकाल को एक अच्छा समय करार दिया और अपने वकालत के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा, मैं 22 साल से इस बार का सदस्य हूं और आप सभी के प्यार और स्नेह ने मेरे काम को बहुत आसान बना दिया है। मेरा समय बहुत अच्छा रहा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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जस्टिस राव बोले, वकील के तौर पर काम करना ज्यादा अच्छा रहा 
उन्होंने कहा, आज भी मुझे लगता है कि वह पक्ष (अधिवक्ता) इस पक्ष से काफी बेहतर है और मौका दिया तो मैं जीवन भर रहूंगा। आपका बहुत बहुत धन्यवाद। यह मेरे लिए एक अच्छा प्रवास रहा है। उन्होंने कहा कि मैंने जज भाइयों और बहनों से सीखा है और मुझे उम्मीद है कि मैं आपकी उम्मीदों पर खरा उतरूंगा क्योंकि मैं इस बार से हूं। बार के सदस्यों और अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की शुभकामनाओं से से भावुक होकर न्यायमूर्ति राव ने कहा कि अगर मैंने अदालत की कार्यवाही के दौरान तेज आवाज से वकीलों को चोट पहुंचाई तो मैं माफी मांगता हूं। अगर मैं अदालत में कठोर रहा हूं और अगर मैंने किसी को चोट पहुंचाई है तो इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूं। कृपया समझें कि ये नौकरी ऐसी है कि हमें एक व्यक्ति के पक्ष में फैसला करना है और जो दूसरा पक्ष होगा निश्चित रूप से हमारे कार्यों से खुश नहीं होगा।
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जस्टिस राव ने कहा, काम का दबाव कभी-कभी हम पर आ जाता है क्योंकि हम साधु नहीं हैं। मैं जानता हूं कि कभी-कभी मैंने वकीलों की आवाज को दबाने के लिए कई बार आवाज ऊंची की है। जस्टिस राव ने कहा कि वह जीवन भर वकील बनना पसंद करेंगे और कहा, जब मैं पदोन्नत हुआ तो मैंने जस्टिस गोगोई से कहा था कि मैं अभी भी एक वकील के रूप में सोचता हूं। इस पर उन्होंने कहा था कि आप ऐसा करना जारी रखें और इससे आपको वकीलों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। 
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जस्टिस राव का अवकाश प्राप्त करना पीठ के लिए बड़ी क्षति: सीजेआई 
इस बीच देश के प्रधान न्यायाधीश एनवी रमन्ना ने कहा कि न्यायमूर्ति एल.नागेश्वर राव का अवकाश प्राप्त करना पीठ के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि उनकी विश्लेषण करने की कुशलता और न्याय के प्रति जुनून की कमी हर कोई महसूस करेगा। न्यायमूर्ति राव के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित विदाई समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति रमण ने कहा कि उन्होंने कानून को प्रतिपादित करने और संविधान की व्याख्या करने में अहम भूमिका निभाई है।

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