{"_id":"661685817b17cf62880bd8bd","slug":"jmm-moves-delhi-hc-against-lokpal-s-order-asking-cbi-to-probe-party-s-properties-2024-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"JMM: लोकपाल के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची झामुमो, CBI से संपत्तियों की जांच करवाने से जुड़ा मामला","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
JMM: लोकपाल के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची झामुमो, CBI से संपत्तियों की जांच करवाने से जुड़ा मामला
Wed, 10 Apr 2024 05:59 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Wed, 10 Apr 2024 05:59 PM IST
सार
लोकपाल के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा के नाम पर मौजूद दो संपत्तियों की जांच सीबीआई को करने का निर्देश दिया गया था। जानें मामला...
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बुधवार को लोकपाल के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसमें पार्टी के नाम पर मौजूद दो संपत्तियों की जांच सीबीआई को करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि वह इस मामले की सुनवाई 23 अप्रैल को करेंगे।
क्या है मामला
याचिकाकर्ता झामुमो ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अरुणाभ चौधरी के माध्यम से प्रतिनिधित्व करते हुए भारत के लोकपाल के 4 मार्च के आदेश को चुनौती दी, जो राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दायर शिकायत पर दिया गया था। वरिष्ठ वकील ने कहा कि पहली नजर में यह एक गलत आदेश है।
भ्रष्टाचार निरोधक लोकपाल ने सीबीआई को झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन से जुड़ी कथित बेनामी संपत्तियों की छह महीने के भीतर जांच करने का निर्देश दिया है। लोकपाल, जिसने सीबीआई को झामुमो से संबंधित दो संपत्तियों की जांच करने का भी निर्देश दिया है, ने निशिकांत दुबे की 5 अगस्त, 2020 की शिकायत का निपटारा करते हुए यह निर्देश पारित किया। अधिवक्ता अभिषेक रॉय के माध्यम से उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि लोकपाल का आदेश प्रथम दृष्टया कानून की दृष्टि से खराब और अधिकार क्षेत्र के बिना था और इसे झामुमो की पीठ पीछे पारित किया गया था और जो भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के दायरे से बाहर था। इसमें कहा गया कि आदेश पारित करने से पहले झामुमो को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और उसे सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया।
विज्ञापन
निशिकांत दुबे ने ये लगाए थे आरोप
लोकपाल को दी गई अपनी शिकायत में, निशिकांत दुबे ने कहा था कि सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया और बेईमान और भ्रष्ट तरीकों को अपनाकर, अपने नाम पर, आय के ज्ञात और घोषित स्रोतों से अधिक बड़ी संपत्ति अर्जित की। उनके परिवार के सदस्यों, दोस्तों, सहयोगियों के नाम रांची, धनबाद और दुमका समेत झारखंड के कई जिलों में कई कंपनियों उनके नाम हैं।
विज्ञापन
क्या है मामला
याचिकाकर्ता झामुमो ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अरुणाभ चौधरी के माध्यम से प्रतिनिधित्व करते हुए भारत के लोकपाल के 4 मार्च के आदेश को चुनौती दी, जो राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन के खिलाफ भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा दायर शिकायत पर दिया गया था। वरिष्ठ वकील ने कहा कि पहली नजर में यह एक गलत आदेश है।
विज्ञापन
भ्रष्टाचार निरोधक लोकपाल ने सीबीआई को झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन से जुड़ी कथित बेनामी संपत्तियों की छह महीने के भीतर जांच करने का निर्देश दिया है। लोकपाल, जिसने सीबीआई को झामुमो से संबंधित दो संपत्तियों की जांच करने का भी निर्देश दिया है, ने निशिकांत दुबे की 5 अगस्त, 2020 की शिकायत का निपटारा करते हुए यह निर्देश पारित किया। अधिवक्ता अभिषेक रॉय के माध्यम से उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा गया है कि लोकपाल का आदेश प्रथम दृष्टया कानून की दृष्टि से खराब और अधिकार क्षेत्र के बिना था और इसे झामुमो की पीठ पीछे पारित किया गया था और जो भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल के दायरे से बाहर था। इसमें कहा गया कि आदेश पारित करने से पहले झामुमो को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया और उसे सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया।
विज्ञापन
निशिकांत दुबे ने ये लगाए थे आरोप
लोकपाल को दी गई अपनी शिकायत में, निशिकांत दुबे ने कहा था कि सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया और बेईमान और भ्रष्ट तरीकों को अपनाकर, अपने नाम पर, आय के ज्ञात और घोषित स्रोतों से अधिक बड़ी संपत्ति अर्जित की। उनके परिवार के सदस्यों, दोस्तों, सहयोगियों के नाम रांची, धनबाद और दुमका समेत झारखंड के कई जिलों में कई कंपनियों उनके नाम हैं।