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Hindi News ›   India News ›   Japanese antenna to serve as India in the Indo-Pacific; India-Japan defense pact to open up new avenues

India-Japan: हिंद-प्रशांत में भारत की आंख-कान बनेगा जापानी एंटीना; भारत-जापान में रक्षा समझौता खोलेगा कई द्वार

Fri, 03 Jul 2026 08:17 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Fri, 03 Jul 2026 08:17 AM IST
सार

भारत और जापान ने पहली रक्षा सह-विकास परियोजना के तहत अत्याधुनिक नेवल रेडियो एंटीना के संयुक्त निर्माण पर सहमति जताई है। यह तकनीक भारतीय नौसेना की निगरानी, सुरक्षित संचार और दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता बढ़ाएगी। दोनों देशों ने ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रणनीतिक तेल भंडारण, आपातकालीन आपूर्ति और ऊर्जा बाजार स्थिरता पर भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।

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Japanese antenna to serve as India in the Indo-Pacific; India-Japan defense pact to open up new avenues
पीएम मोदी और जापान की पीएम सनाए तकाइची (दाएं से बाएं) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत और जापान अब मिलकर भविष्य के अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों का निर्माण करेंगे। गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी जापानी समकक्ष सनाए ताकाइची के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने अपनी पहली रक्षा सह-विकास परियोजना के तहत नेवल रेडियो एंटीना के संयुक्त निर्माण की घोषणा की गई।
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क्या है यह तकनीक?
नेवल रेडियो एंटीना किसी भी युद्धपोत की आंख और कान होता है। जापान के साथ जिस विशिष्ट तकनीक पर समझौता हुआ है, उसे तकनीकी भाषा में यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना कहा जाता है। यह किसी मिसाइल या तोप से हटकर एक आधुनिक रडार और संचार प्रणाली है। दिखने में यह एक गुंबद या ऊंचे खंभे जैसा होता है, जिसे युद्धपोत के सबसे ऊपरी हिस्से पर फिट किया जाता है। इसके भीतर कई तरह के रडार, रेडियो संचार व इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण एक ही ढांचे में समाहित होते हैं।
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हिंद-प्रशांत को ये फायदे
  • इस जापानी प्रौद्योगिकी के भारत में बनने और नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात होने से समंदर में भारत की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
  • यह नया जापानी एंटीना रडार की नजर से बचने वाली डिजाइन पर आधारित है।
  • इसे लगाने से भारतीय युद्धपोतों को दुश्मन के रडार और मिसाइलें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाएंगी। यह एंटीना समंदर में चारों तरफ नजर रखने में सक्षम है।
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  • इसके जरिए नौसेना के युद्धपोत विपरीत परिस्थितियों और चक्रवातों के बीच भी उपग्रहों या अन्य विमानों से बाधारहित सुरक्षित संचार कर सकेंगे।
  • इसकी मदद से युद्धपोत बहुत दूर से दुश्मन के विमानों या जहाजों के सिग्नलों पकड़कर उन्हें डिकोड कर सकेंगे।
  • इससे हिंद महासागर क्षेत्र में चीनी पनडुब्बियों की जासूसी गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी।

दोनों देशों में सामरिक तेल भंडारण पर भी बनी सहमति
भारत और जापान ने मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए संयुक्त वक्तव्य जारी किया। भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय ने मिलकर सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा तैयार की। दोनों देशों ने कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक भंडारण, आपातकालीन आपूर्ति व्यवस्था और ऊर्जा बाजार स्थिरता के क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत उत्पादक देशों के साथ समन्वय, आपातकालीन प्रतिक्रिया और बाजार को स्थिर बनाए रखने के उपायों पर मिलकर काम किया जाएगा।
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