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Jammu-Kashmir: डेस्टिनेशन मैरिज का हब बन रहा कश्मीर, बढ़ रहा है वेडिंग प्लानर्स का कारोबार
सार
नवगाम बाईपास श्रीनगर स्थित उजाला सिग्नस के डॉ. परवेज का कहना है कि अब तो खूब शादियां हो रही हैं। जैसे लोग जयपुर, उदयपुर जाकर शादी की योजना बनाते हैं, वैसे ही लोग पिछले साल से श्रीनगर की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं।
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जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
12 मई दिन के एक बजे जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा श्रीनगर स्थित राजभवन 13 मई को चुनावी तैयारियों और सुरक्षा के हालात का जायजा लेने में व्यस्त थे। इस बीच एक सूचना ने चेहरे पर पूरी चमक बिखेर दी। सूचना थी अगले दिन घाटी में लोगों के बड़ी संख्या में मतदान में भाग लेने की। पूछने पर बस इतना बोले कि देश में लोकसभा चुनाव चल रहा है, इसलिए बोलना ठीक नहीं। उन्होंने कहा जो बदलाव देख रहे हैं, वह जम्मू-कश्मीर है। अब तो दिल्ली, पश्चिम बंगाल और देश के कोने-कोने से लोग आकर श्रीनगर में शादी-ब्याह कर रहे हैं।
उपराज्यपाल ने टोकते हुए कहा कि आप भी एक विवाह समारोह में आए हैं। इससे पहले कभी आए थे? अब तो खूब पर्यटक आ रहे हैं और सड़कों पर शांति है। जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा की तरफ है। डेस्टिनेशन मैरिज का हब बन रहा है। उपराज्यपाल का इशारा राघव और स्निग्धा के विवाह समारोह की तरफ था। राघव और स्निग्धा दोनों ने श्रीनगर में 9-12 मई तक विवाह के सभी कार्यक्रम और सात फेरे लेने का फैसला किया। जब राघव ने इसे अपने परिवार में साझा किया, तो परिवार के लोग सुरक्षा कारणों से चिंतित थे। लेकिन उनके आईएएस रिश्तेदार और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी तथा कुछ मित्रों ने झिझकने की बजाय श्रीनगर में शादी करने की सलाह दी।
400 लोगों ने लिया विवाह समारोह में हिस्सा
10 मई को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में डल झील के किनारे विवाह संपन्न हुआ। विवाह समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी वर-वधू को आशीर्वाद देने आए। इस विवाह समारोह की रस्में 9 मई को राजबाग रोड पर झेलम नदी के किनारे रेडिसन होटल में शुरू हुई और विवाह के बाद की सभी रस्में वहीं संपन्न हुईं। वर-वधू पक्ष को मिलाकर करीब 400 लोगों ने हिस्सा लिया। एक पल के लिए भी नहीं लग रहा था कि आप जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हैं। जहां कभी आतंकवाद के असर के कारण लोग जाने में संकोच करते थे। वेडिंग प्लानर कंपनी गोल्डन लीफ के अधिकारी रोहित बताते हैं कि इस साल उन्होंने श्रीनगर में तीन शादियां करवाईं। रोहित का कहना है कि पहली दो शादियों में 100 के करीब लोग थे। दो दिन में विवाह समारोह संपन्न हो गया। लेकिन यह बड़ा विवाह समारोह था। 400 के करीब लोग आए। रोहित कहते हैं कि कश्मीर (श्रीनगर) में लॉजिस्टिक समेत अन्य की कीमत बढ़ जाती है, लेकिन किसी तरह की कोई (सुरक्षा चिंता संबंधी) परेशानी नहीं होती।
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अब जम्मू-कश्मीर में खूब बज रही है शहनाई
नवगाम बाईपास श्रीनगर स्थित उजाला सिग्नस के डॉ. परवेज ने कहा कि अब तो खूब शादियां हो रही हैं। जैसे लोग जयपुर, उदयपुर जाकर शादी की योजना बनाते हैं, वैसे ही लोग पिछले साल से श्रीनगर की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। वसीम लोन के मुताबिक, वह शादी विवाह समेत पर्यटकों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। जैसे घोड़ी, बग्घी, बैंड बाजा, गाड़ी, फूल-सजावट सब कुछ। वसीम लोन कहते हैं कि इस साल उन्होंने दो विवाह समारोह में अपनी सेवाएं दीं। वसीम लोन कहते हैं कि अब पर्यटक बड़ी संख्या में आने लगे हैं। डल झील पर भीड़ बढ़ी है और शिकारा पर पर्यटकों की तादाद देखी जा सकती है। वसीम लोन कहते हैं कि इससे यहां की आवाम खुश है। क्योंकि उसके हाथ में पैसा जा रहा है। बिलाल और शकील को भी श्रीनगर में यह बदलाव काफी अच्छा लग रहा है। जमशेद टैक्सी चलाते हैं। बताते हैं तीन साल पहले उन्होंने हिम्मत करके एक इनोवा खरीदी थी। अब उनके पास इनोवा गाड़ी हो गई है। जमशेद के मुताबिक उनके पास काफी काम रहता है और मेहनत की आमदनी से अपना परिवार चला रहे हैं। आतंकवाद की चर्चा करने पर जमशेद कहते हैं कि पहले भी आतंकवादी कभी आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाते थे। जमशेद कहते हैं कि पूरे जम्मू-कश्मीर में बिहार और दूसरे राज्यों के तमाम मजदूर काम करते हैं। लुधियाना, पंजाब के कारोबारी गांव-गांव में व्यवसाय करते हैं। कभी इन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। जमशेद कहते हैं कि हम तो चाहते हैं कि अब यह बदलाव आगे बढ़े। इससे रोजगार बढ़ेगा और कश्मीर विकसित होगा।
पहले से अब में क्या बदला, एक दर्द तो सीने में है
श्रीनगर के लोगों के सीने में एक दर्द है। उन्हें समझ में नहीं आता कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा क्यों नहीं मिला? हैदरपोरा के यूनुस कहते हैं कि धारा 370 हटने से कोई फर्क नहीं पड़ा है, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलना बड़ी बात है। युनुस कहते हैं कि इधर सरकार काम कर रही है। अच्छी सड़कें बन रही हैं। पत्थरबाजी, हंगामा रुका है। बाजार खुल रहे हैं। युनुस कहते हैं कि पहले की तरह अब अस्थिरता नहीं है, लेकिन रोजगार बड़ा मसला है। मंहगाई से हम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, क्योंकि कश्मीर में बहुत सा सामान बाहर से आता है। यहां मंहगाई बहुत बढ़ जाती है। आगे पूछने पर युनुस कहते हैं कि हर बदलाव अच्छा होता है। अच्छी बात यह है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जनता के बीच में रहते हैं। कार्यक्रमों में खूब शामिल होते हैं। थोड़ा अपनापन सा लगता है।
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उपराज्यपाल ने टोकते हुए कहा कि आप भी एक विवाह समारोह में आए हैं। इससे पहले कभी आए थे? अब तो खूब पर्यटक आ रहे हैं और सड़कों पर शांति है। जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा की तरफ है। डेस्टिनेशन मैरिज का हब बन रहा है। उपराज्यपाल का इशारा राघव और स्निग्धा के विवाह समारोह की तरफ था। राघव और स्निग्धा दोनों ने श्रीनगर में 9-12 मई तक विवाह के सभी कार्यक्रम और सात फेरे लेने का फैसला किया। जब राघव ने इसे अपने परिवार में साझा किया, तो परिवार के लोग सुरक्षा कारणों से चिंतित थे। लेकिन उनके आईएएस रिश्तेदार और उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी तथा कुछ मित्रों ने झिझकने की बजाय श्रीनगर में शादी करने की सलाह दी।
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400 लोगों ने लिया विवाह समारोह में हिस्सा
10 मई को शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में डल झील के किनारे विवाह संपन्न हुआ। विवाह समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा भी वर-वधू को आशीर्वाद देने आए। इस विवाह समारोह की रस्में 9 मई को राजबाग रोड पर झेलम नदी के किनारे रेडिसन होटल में शुरू हुई और विवाह के बाद की सभी रस्में वहीं संपन्न हुईं। वर-वधू पक्ष को मिलाकर करीब 400 लोगों ने हिस्सा लिया। एक पल के लिए भी नहीं लग रहा था कि आप जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हैं। जहां कभी आतंकवाद के असर के कारण लोग जाने में संकोच करते थे। वेडिंग प्लानर कंपनी गोल्डन लीफ के अधिकारी रोहित बताते हैं कि इस साल उन्होंने श्रीनगर में तीन शादियां करवाईं। रोहित का कहना है कि पहली दो शादियों में 100 के करीब लोग थे। दो दिन में विवाह समारोह संपन्न हो गया। लेकिन यह बड़ा विवाह समारोह था। 400 के करीब लोग आए। रोहित कहते हैं कि कश्मीर (श्रीनगर) में लॉजिस्टिक समेत अन्य की कीमत बढ़ जाती है, लेकिन किसी तरह की कोई (सुरक्षा चिंता संबंधी) परेशानी नहीं होती।
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अब जम्मू-कश्मीर में खूब बज रही है शहनाई
नवगाम बाईपास श्रीनगर स्थित उजाला सिग्नस के डॉ. परवेज ने कहा कि अब तो खूब शादियां हो रही हैं। जैसे लोग जयपुर, उदयपुर जाकर शादी की योजना बनाते हैं, वैसे ही लोग पिछले साल से श्रीनगर की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं। वसीम लोन के मुताबिक, वह शादी विवाह समेत पर्यटकों को तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। जैसे घोड़ी, बग्घी, बैंड बाजा, गाड़ी, फूल-सजावट सब कुछ। वसीम लोन कहते हैं कि इस साल उन्होंने दो विवाह समारोह में अपनी सेवाएं दीं। वसीम लोन कहते हैं कि अब पर्यटक बड़ी संख्या में आने लगे हैं। डल झील पर भीड़ बढ़ी है और शिकारा पर पर्यटकों की तादाद देखी जा सकती है। वसीम लोन कहते हैं कि इससे यहां की आवाम खुश है। क्योंकि उसके हाथ में पैसा जा रहा है। बिलाल और शकील को भी श्रीनगर में यह बदलाव काफी अच्छा लग रहा है। जमशेद टैक्सी चलाते हैं। बताते हैं तीन साल पहले उन्होंने हिम्मत करके एक इनोवा खरीदी थी। अब उनके पास इनोवा गाड़ी हो गई है। जमशेद के मुताबिक उनके पास काफी काम रहता है और मेहनत की आमदनी से अपना परिवार चला रहे हैं। आतंकवाद की चर्चा करने पर जमशेद कहते हैं कि पहले भी आतंकवादी कभी आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाते थे। जमशेद कहते हैं कि पूरे जम्मू-कश्मीर में बिहार और दूसरे राज्यों के तमाम मजदूर काम करते हैं। लुधियाना, पंजाब के कारोबारी गांव-गांव में व्यवसाय करते हैं। कभी इन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। जमशेद कहते हैं कि हम तो चाहते हैं कि अब यह बदलाव आगे बढ़े। इससे रोजगार बढ़ेगा और कश्मीर विकसित होगा।
पहले से अब में क्या बदला, एक दर्द तो सीने में है
श्रीनगर के लोगों के सीने में एक दर्द है। उन्हें समझ में नहीं आता कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा क्यों नहीं मिला? हैदरपोरा के यूनुस कहते हैं कि धारा 370 हटने से कोई फर्क नहीं पड़ा है, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलना बड़ी बात है। युनुस कहते हैं कि इधर सरकार काम कर रही है। अच्छी सड़कें बन रही हैं। पत्थरबाजी, हंगामा रुका है। बाजार खुल रहे हैं। युनुस कहते हैं कि पहले की तरह अब अस्थिरता नहीं है, लेकिन रोजगार बड़ा मसला है। मंहगाई से हम लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, क्योंकि कश्मीर में बहुत सा सामान बाहर से आता है। यहां मंहगाई बहुत बढ़ जाती है। आगे पूछने पर युनुस कहते हैं कि हर बदलाव अच्छा होता है। अच्छी बात यह है कि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जनता के बीच में रहते हैं। कार्यक्रमों में खूब शामिल होते हैं। थोड़ा अपनापन सा लगता है।