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White-Collar Terror Probe: डॉक्टरों ने बनाया था नया आतंकी संगठन, डॉ. आदिल को बनाया 'अमीर', जांच में खुलासा

Sun, 15 Feb 2026 03:17 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली/श्रीनगर Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 15 Feb 2026 03:17 PM IST
सार

White-Collar Terror Probe: जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉक्टरों और उपदेशकों के एक व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल को पकड़ा है। इन लोगों ने अंसार इंतरिम नाम का संगठन बनाकर दिल्ली में बड़े हमले की साजिश रची थी। जानकारी के मुताबिक, लाल किले के बाहर हुआ धमाका इसी साजिश का हिस्सा था।

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Jammu and Kashmir Police White Collar Terror Module Ansar Interim Dr Umar-un-Nabi Red Fort Blast NIA
Crime demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के लाल किले के पास हुए धमाके के तार जम्मू-कश्मीर से जुड़े मिले थे। पुलिस जांच में एक व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल को लेकर कई बड़ी बातें सामने आई हैं। अब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस मामले में डॉ. अदील को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस ने हाल ही में जिस आतंकी समूह का पर्दाफाश किया है, उसमें शामिल डॉक्टर 2016 से ही कट्टरपंथी बन रहे थे। इन लोगों ने मिलकर 'अंसार इंतरिम' नाम का एक नया आतंकी संगठन बनाया था। इस संगठन को बनाने का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और देश के दूसरे हिस्सों में आतंकी वारदातों को अंजाम देना था।

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अब इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कर रही है। इस मॉड्यूल का मुख्य चेहरा डॉ. उमर-उन नबी था। उमर ने ही 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर विस्फोटकों से लटी कार को उड़ाया था, जिसमें कई लोग मारे गए थे। जांच में सामने आया कि उमर ने 2016 और 2018 में भी आतंकी समूहों में शामिल होने की कोशिश की थी, लेकिन तब वह इस मंसूबे में नाकाम रहा।
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अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल 2022 में श्रीनगर के ईदगाह में एक गुप्त बैठक हुई थी। इस बैठक में मुजम्मिल गनी, उमर-उन नबी, आदिल राथर, मौलवी इरफान और कुछ अन्य साजिश कर्ता शामिल थे। यहीं पर 'अंसार इंतरिम' बनाने का फैसला हुआ। अदिल को इस ग्रुप का मुखिया (अमीर) और मौलवी इरफान को उप-मुखिया बनाया गया। मुजम्मिल गनी को खजांची की जिम्मेदारी दी गई। इन लोगों ने नया ग्रुप इसलिए बनाया क्योंकि पुराने आतंकियों से इनका संपर्क टूट गया था।  
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इसके बाद साल 2023 में ग्रुप ने साजिश को अंजाम देने के लिए इन्होंने हरियाणा के सोहना और नूह से खाद खरीदी। फरीदाबाद की एक दुकान से पोटेशियम नाइट्रेट जैसा केमिकल लिया गया। उमर ने इंटरनेट पर वीडियो देखकर आईईडी और टीएटीपी जैसे खतरनाक विस्फोटक बनाना सीखा। अदील ने दक्षिण कश्मीर के दानिश नाम के युवक को सुसाइड हमले के लिए तैयार करने की कोशिश की, लेकिन दानिश आखिरी वक्त पर पीछे हट गया।

उमर का असली प्लान दिल्ली की किसी भीड़भाड़ वाली जगह या धार्मिक स्थल पर बड़ा धमाका करने का था। हालांकि, श्रीनगर पुलिस ने जब मुजम्मिल गनी को गिरफ्तार किया और विस्फोटक बरामद किए, तो उमर घबरा गया। इसी घबराहट में उसने लाल किले के बाहर समय से पहले धमाका कर दिया। इस पूरे नेटवर्क का पता 19 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर दिखने के बाद चला। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से पहले तीन स्थानीय लोगों को पकड़ा, जिनसे पूछताछ के बाद मौलवी इरफान और फिर इन डॉक्टरों तक पहुंचा जा सका।


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