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जेटली बोले- राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने के लिए हम किसी भी सुझाव पर विचार को तैयार
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Mon, 08 Jan 2018 08:54 AM IST
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चुनावी बांड की व्यवस्था देश में राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा सुधार है। सरकार इस संबंध में किसी भी नए सुझाव पर विचार करने के लिए तैयार है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को एक फेसबुक पोस्ट में यह बात कही। उन्होंने लिखा है, अभी तक राजनीतिक दलों को चंदा देना और उनका खर्च, दोनों काम नकदी में होता रहा है।
चंदा देने वालों के नाम का या तो पता नहीं होता, या वे परोक्ष होते हैं। यह कभी नहीं बताया जाता कि कितना पैसा आया... और व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि अज्ञात स्रोतों से संदिग्ध धन आता रहे।
जेटली के अनुसार, यह बिल्कुल पारदर्शी तरीका नहीं है। ज्यादातर राजनीतिक दल और समूह मौजूदा व्यवस्था से बहुत संतुष्ट नजर आते हैं। इस व्यवस्था के चलते रहने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारी सरकार का प्रयास है कि ऐसी वैकल्पिक प्रणाली लाई जाए, जो राजनीति चंदे की व्यवस्था में स्वच्छता ला सके।
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वित्त मंत्री ने पिछले हफ्ते राजनीतिक दलों को बांड के जरिये चंदा देने की एक रूपरेखा पेश की थी। चुनावी बांडों की समयसीमा केवल 15 दिन की होगी। इन्हें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जा सकेगा। इन बांडों को नकद चंदे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
पढ़ें- सर्वसम्मति न बनने पर भी चुनाव बांड पर आगे बढ़ेगी केंद्र सरकार
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चंदा देने वालों के नाम का या तो पता नहीं होता, या वे परोक्ष होते हैं। यह कभी नहीं बताया जाता कि कितना पैसा आया... और व्यवस्था ऐसी बना दी गई है कि अज्ञात स्रोतों से संदिग्ध धन आता रहे।
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जेटली के अनुसार, यह बिल्कुल पारदर्शी तरीका नहीं है। ज्यादातर राजनीतिक दल और समूह मौजूदा व्यवस्था से बहुत संतुष्ट नजर आते हैं। इस व्यवस्था के चलते रहने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारी सरकार का प्रयास है कि ऐसी वैकल्पिक प्रणाली लाई जाए, जो राजनीति चंदे की व्यवस्था में स्वच्छता ला सके।
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वित्त मंत्री ने पिछले हफ्ते राजनीतिक दलों को बांड के जरिये चंदा देने की एक रूपरेखा पेश की थी। चुनावी बांडों की समयसीमा केवल 15 दिन की होगी। इन्हें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से खरीदा जा सकेगा। इन बांडों को नकद चंदे के विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
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लोगों के पास सोच-समझकर चुनने का विकल्प
अरुण जेटली
- फोटो : SELF
उन्होंने लिखा, अब लोगों के लिए सोच समझ कर यह तय करने का विकल्प होगा कि वे संदिग्ध नकद धन के चंदे की मौजूदा व्यवस्था को अपनाए रखना चाहते हैं या चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर और चुनावी बांड का जरिया चुनते हैं। हालांकि बाद के तीन तरीकों में से दो (चेक और ऑनलाइन) पूरी तरह पारदर्शी हैं, जबकि बांड योजना अपारदर्शी राजनीतिक चंदे की मौजूदा व्यवस्था की तुलना में एक बड़ा सुधार है।
जेटली के अनुसार, सरकार भारत में राजनीतिक चंदे की वर्तमान व्यवस्था को स्वच्छ बनाने और इसे मजबूती देने के लिए सभी सुझावों पर विचार करने को तैयार है। लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अव्यवहारिक सुझावों से नकद चंदे की व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि उससे यह और पुख्ता हो जाएगी।
सात दशक में भी नहीं ला पाए सियासी चंदे की स्वच्छ प्रणाली
जेटली ने लिखा, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद सात दशक बाद भी राजनीतिक चंदे की स्वच्छ प्रणाली नहीं निकाल पाया है। राजनीतिक दलों को पूरे साल बहुत बड़ी राशि खर्च करनी होती है। ये सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च होता है। बावजूद इसके राजनीतिक प्रणाली में चंदे के लिए अभी कोई पारदर्शी प्रणाली नहीं बन सकी है।
जेटली के अनुसार, सरकार भारत में राजनीतिक चंदे की वर्तमान व्यवस्था को स्वच्छ बनाने और इसे मजबूती देने के लिए सभी सुझावों पर विचार करने को तैयार है। लेकिन यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अव्यवहारिक सुझावों से नकद चंदे की व्यवस्था नहीं सुधरेगी, बल्कि उससे यह और पुख्ता हो जाएगी।
सात दशक में भी नहीं ला पाए सियासी चंदे की स्वच्छ प्रणाली
जेटली ने लिखा, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद सात दशक बाद भी राजनीतिक चंदे की स्वच्छ प्रणाली नहीं निकाल पाया है। राजनीतिक दलों को पूरे साल बहुत बड़ी राशि खर्च करनी होती है। ये सैकड़ों करोड़ रुपये का खर्च होता है। बावजूद इसके राजनीतिक प्रणाली में चंदे के लिए अभी कोई पारदर्शी प्रणाली नहीं बन सकी है।